Tuesday, April 21, 2026
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400 करोड़ के चक्कर में एम3एम के बंसल बंधुओं का खेल खत्म, बसंत-रूप और पंकज बंसल की बढ़ेगी मुसीबत

नई दिल्ली: भारत में आर्थिक अपराध के मामलों की जांच करने वाली एजेंसी ईडी ने काले धन के मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए m3m बिल्डर्स के बसंत बंसल को गिरफ्तार कर लिया है. मनी लांड्रिग के मामले में बसंत बंसल, रूप बंसल और पंकज बंसल को गिरफ्तार किया गया है. वास्तव में 400 करोड़ रुपए के चक्कर में इन तीनों भाइयों के गंदे खेल का खात्मा हो गया है.

ईडी के मुताबिक बंसल बंधुओं ने मनी लॉन्ड्रिंग की है और इसके खिलाफ सबूत भी हैं. ईडी को m3m और आईआरईओ ग्रुप के 400 करोड़ रुपए की मनी लॉन्ड्रिंग का पता लगा है. इसके बाद ईडी ने रियल्टी कंपनी के कई दफ्तर पर छापेमारी की. इस छापेमारी में ईडी को 60 करोड़ की लग्जरी कार, 6 करोड़ की ज्वैलरी और नकदी मिली है.

रियल्टी कंपनी m3m का मामला अचानक चर्चा में नहीं आया है. पिछले कई सालों से m3m के खिलाफ जांच चल रही है. M3M ग्रुप के जरिए हजारों करोड़ रुपए की मनी लॉन्ड्रिंग के आरोप हैं.

ईडी ने एम3एम के प्रमोटर बसंत बंसल, रूप बंसल और पंकज बंसल को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है. आरोप है कि बंसल बंधुओं ने फर्जी कंपनियों में निवेश दिखाकर आईआरईओ से ₹400 करोड़ लिए हैं. रियल एस्टेट कंपनी m3m के खिलाफ आरोपों का यह सिलसिला नया नहीं है. हाल में ही इंदिरापुरम और नोएडा में कामकाज करने वाले शिप्रा real-estate ने कहा था कि m3m बिल्डर्स एक एनबीएफसी के साथ मिलकर उसकी ₹6000 की संपत्ति को हजम करने की योजना बना रही है.

इससे पहले भी m3m के खिलाफ कई गंभीर आरोप लगाए जा चुके हैं और उसकी जांच करते समय ही ईडी को money-laundering संबंधी मामले का पता लगा है. m3m के बंसल बंधुओं पर आरोप है कि उन्होंने शेल कंपनियों के जरिए करोड़ों की रकम का हेरफेर किया है.

बंसल बंधुओं की जिस मामले में गिरफ्तारी हुई है उसमें 400 करोड़ रुपए के मनी लॉन्ड्रिंग के आरोप हैं. हाल में ही दिल्ली हाईकोर्ट ने बंसल बंधुओं की गिरफ्तारी के मामले में दखल देने से इनकार कर दिया है. बसंत बंसल की गिरफ्तारी दिल्ली उच्च न्यायालय द्वारा 5 जुलाई तक गिरफ्तारी से अंतरिम संरक्षण दिए जाने के बाद हुई है.इससे पहले ईडी ने रियल एस्टेट डेवलपर एम3एम के दिल्ली और गुरुग्राम के सात दफ्तर पर छापेमारी की थी. m3m ग्रुप ने कई लेयर वाली शेल कंपनियों के जरिए एक-दूसरे रियल एस्टेट कंपनी से 400 करोड़ रुपए प्राप्त किए. इसके बाद रकम को डेवलपमेंट राइट के जरिए भुगतान में दिखाया गया. जमीन m3m ग्रुप की थी और उसकी मार्केट वैल्यू ₹4 करोड़ थी. कंपनी ने ₹10 करोड़ के पेमेंट के लिए जमीन 5 शेल कंपनियों को बेच दिया.

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