सरकार बिक्री पेशकश याने ऑफर फोर सेल (ओएफएस) के जरिए हिंदुस्तान जिंक में 2.5 प्रतिशत हिस्सेदारी 505 रुपये प्रति शेयर के न्यूनतम मूल्य पर बेचेगी. हिस्सेदारी बिक्री से न्यूनतम मूल्य पर 5,000 करोड़ रुपये से अधिक की राशि प्राप्त होगी.ओएफएस बुधवार को संस्थागत बोलीदाताओं के लिए और गुरुवार को खुदरा निवेशकों के लिए खुलेगा. याने कुल दो दिन चलेगा. ओएफएस में लगभग 5.28 करोड़ शेयरों की बिक्री शामिल होगी, जो इक्विटी के 1.25% के बराबर है. साथ ही 1.25% इक्विटी के ओवरसब्सक्रिप्शन का एक्स्ट्रा ऑप्शन भी होगा. सरकार को इस बिक्री से लगभग 5,900 करोड़ रुपये का विनिवेश राजस्व प्राप्त होगा.
हिंदुस्तान जिंक लिमिटेड (एचजेडएल) में बिक्री के लिए ऑफर बुधवार को नॉन रिटेल इन्वेस्टर्स के लिए खुलेगा. खुदरा निवेशक गुरुवार 7 नवंबर को बोली लगा सकते हैं. सरकार ग्रीनशू ऑप्शन के रूप में अतिरिक्त 1.25 प्रतिशत के साथ 1.25 प्रतिशत इक्विटी का विनिवेश करेगी.वेदांता की सहायक कंपनी हिंदुस्तान जिंक जस्ता, सीसा और चांदी के दुनिया के सबसे बड़े इन्टीग्रेट प्रोडक्ट में से एक है. उदयपुर में मुख्यालय वाली यह कंपनी कई खदानों और स्मेल्टर्स का परिचालन करती है और इसका मुख्य ध्यान सस्टेनेबल माइनिंग प्रैक्टिस, रिसोर्स कन्ज़र्वेशन और मेटल प्रोडक्शन में अपनी मज़बूत मार्केट पोज़ीशन बनाए रखने पर है.
सरकार के पास वर्तमान में वेदांता द्वारा संचालित जिंक-लेड खननकर्ता में 29.54% हिस्सेदारी है. इस निवेश से बाहर निकलना एक क्रमिक प्रक्रिया होगी.
वेदांता ने 2002-2003 में निजीकरण के दौरान खनिक में बहुलांश हिस्सेदारी हासिल की थी, जबकि शेष हिस्सेदारी को सार्वजनिक होल्डिंग के रूप में नामित किया गया था. साल 2021 में वेदांता को सरकार की शेष हिस्सेदारी हासिल करने से रोकने वाले न्यायालय के फैसले के बाद सुप्रीम कोर्ट ने सरकार को सार्वजनिक पेशकश के माध्यम से अपनी हिस्सेदारी बेचने की अनुमति दे दी है.हिंदुस्तान जिंक का स्टॉक चर्चा का विषय बना हुआ है, क्योंकि कंपनी ने सितंबर तिमाही में अपने कंसोलिडेट नेट प्रॉफिट में 35 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की है, जो 2,327 करोड़ रुपये है, जबकि एक साल पहले इसी अवधि में कंपनी ने 1,729 करोड़ रुपये का लाभ कमाया था.




