Thursday, May 14, 2026
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Kidney Health: किडनी का स्वस्थ रहना बहुत जरूरी है. क्योंकि ये वही अंग है जो खून से टॉक्सिन पदार्थों और अतिरिक्त तरल पदार्थों को फिल्टर करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं. ब्लड प्रेशर, रेड ब्लड सेल के उत्पादन को नियंत्रित करने में मदद करते हैं. यह संपूर्ण शारीरिक संतुलन बनाए रखने और हानिकारक पदार्थों के निर्माण को रोकने के लिए होते हैं.अगर ये खराब हो जाए तो व्यक्ति का जिंदा रहना मुश्किल हो सकता है.वैसे तो ज्यादातर एल्कोहल के सवन से किडनी फेल होने की समस्या होती है, लेकिन इसके पीछे और भी कारण हो सकते हैं.आइए जानते हैं इस बारे में… किडनी फेल होने के कारण जानिए डायबिटीज के कारण-खराब ढंग से प्रबंधित डायबिटीज, किडनी में रक्त वाहिकाओं को नुकसान पहुंचा सकता है, जिससे समय के साथ उनका कार्य ख़राब हो सकता है. किडनी के फिल्टर डैमेज हो जाते हैं और किडनी खून से यूरिन में आ सामान्य मात्रा में प्रोटीन रिलीज करने लगती है. ये स्थिति शरीर के लिए खतरनाक हो सकती है. अगर वक्त पर इलाज न किया जाए तो किडनी फेल हो सकती है. क्रोनिक हाइपरटेंशन-क्रॉनिक हाइपरटेंशन किडनी में रक्त वाहिकाओं पर जरूर से ज्यादा दबाव डालता है, जिससे रक्त प्रवाह कम हो जाता है और गुर्दे की क्षति होती है. इस कारण भी किडनी फेल हो सकती है. किडनी स्टोन-किडनी स्टोन यूरिन पास करने में बाधा डाल सकती हैं, जिससे दबाव बनता है और किडनी को नुकसान होता है इससे भी संभावित रूप से किडनी फेल हो सकती है.

वर्ल्ड हेपेटाइटिस डे’ (World Hepatitis Day 2023) पूरी दुनिया में हर साल 28 जुलाई को मनाया जाता है. आज हम इस खास अवसर पर आपको हेपेटाइटिस के टाइप्स के बारे में बात करेंगे. साथ ही बात करेंगे कि यह बीमारी कितना खतरनाक है. इसके टाइप्स को लेकर सतर्क रहने के साथ-साथ इससे अवगत रहना भी बहुत जरूरी है. ज्यादातर लोग हेपेटाइटिस ए, बी से ज्यादा अवगत हैं क्योंकि यह बीमारी वो ज्यादा सुनते हैं. लेकिन आपकी जानकारी के लिए बता दें कि सिर्फ हेपेटाइटिस ए, बी,नहीं बल्कि हेपेटाइटिस ए, बी, सी, डी और ई होता है. और इनके बीच में भी काफी ज्यादा फर्क होता है.

हेपेटाइटिस ए
यह वायरल हेपेटाइटिस का सबसे आम प्रकार है और आमतौर पर इंफेक्टेड खाना और गंदे पानी के संपर्क में आने से फैलता है. यह आमतौर पर एक छोटी बीमारी है जो लिवर में सूजन का कारण बनती है. सही वक्त पर इलाज किया जाए तो ठीक हो जाएगा. हेपेटाइटिस ए के लक्षणों में त्वचा और आंखों का पीला पड़ना (पीलिया), गहरे पीला रंग का पेशाब, मतली, उल्टी, पेट में दर्द, थकान और बुखार शामिल हो सकते हैं. हेपेटाइटिस ए से बचाव के लिए टीके उपलब्ध हैं.

हेपेटाइटिस बी
यह भी एक वायरस है जो लीवर में सूजन पैदा कर सकता है. यह आमतौर पर इंफेक्टेड ब्लड या दूसरी तरह के खराब शारीरिक तरल पदार्थों के संपर्क से फैलता है. हेपेटाइटिस बी के लक्षणों में पीलिया, गहरे पीला रंग का पेशाब, मतली, उल्टी, पेट में दर्द, थकान और बुखार शामिल हो सकते हैं. अगर इसका इलाज न किया जाए तो यह काफी लंबे वक्त तक आपको परेशान कर सकता है.  स्वास्थ्य समस्याओं का कारण भी बन सकता है. हेपेटाइटिस बी से सुरक्षा के लिए टीके उपलब्ध हैं. और ज़रूरत पड़ने पर एंटीवायरल दवाएं भी हैं. जिसकी मदद से इस लंबे इंफेक्शन भी ठीक किया जा सकता है.

हेपेटाइटिस सी
यह एक वायरस है जो लिवर में सूजन पैदा कर सकता है. यह आमतौर पर ब्लड या अन्य शारीरिक तरल पदार्थों के संपर्क से फैलता है. हेपेटाइटिस सी के लक्षणों में पीलिया, गहरे पीले रंग का पेशाब, मतली, उल्टी, पेट में दर्द, थकान और बुखार शामिल हो सकते हैं. यदि आवश्यक हो तो दीर्घकालिक संक्रमण को प्रबंधित करने में मदद के लिए एंटीवायरल दवाएं उपलब्ध हैं.

हेपेटाइटिस डी
यह एक असामान्य वायरस है जो केवल उन लोगों को प्रभावित करता है जो पहले से ही हेपेटाइटिस बी से संक्रमित हैं. यह संक्रमित रक्त या अन्य शारीरिक तरल पदार्थों के संपर्क से फैलता है. हेपेटाइटिस डी के लक्षणों में पीलिया, गहरे रंग का पेशाब, मतली, उल्टी, पेट में दर्द, थकान और बुखार शामिल हो सकते हैं. हेपेटाइटिस डी के लिए कोई टीका या विशिष्ट उपचार नहीं है, लेकिन कुछ मामलों में लंबे संक्रमण के प्रबंधन के लिए एंटीवायरल दवाओं का उपयोग किया जा सकता है.

हेपेटाइटिस ई
यह एक वायरस है जो लिवर में सूजन पैदा कर सकता है. यह आमतौर पर गंदा खाना और पानी के संपर्क से फैलता है. हेपेटाइटिस ई के लक्षणों में पीलिया, गहरे पीले रंग का पेशाब, मतली, उल्टी, पेट में दर्द, थकान और बुखार शामिल हो सकते हैं. हेपेटाइटिस ई के लिए कोई टीका या खास इलाज नहीं है, लेकिन कुछ मामलों में लंबे इंफेक्शन के प्रबंधन के लिए कुछ एंटीवायरल दवाओं का उपयोग किया जा सकता है.

इन पांच प्रकार के वायरल हेपेटाइटिस के बीच अंतर जानना महत्वपूर्ण है ताकि आप खुद को संक्रमण से बचाने के लिए कदम उठा सकें और जरूरत पड़ने पर उचित इलाज करवा सकें. हेपेटाइटिस ए और बी से सुरक्षा के लिए टीके उपलब्ध हैं, जबकि जरूरत पड़ने पर हेपेटाइटिस सी, डी या ई के कारण होने वाले लंबे संक्रमण के प्रबंधन के लिए एंटीवायरल दवाओं का इस्तेमाल किया जा सकता है.

Disclaimer: इस आर्टिकल में बताई विधि, तरीक़ों और सुझाव पर अमल करने से पहले डॉक्टर या संबंधित एक्सपर्ट की सलाह जरूर लें.

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हेपेटाइटिस डी यह एक असामान्य वायरस है जो केवल उन लोगों को प्रभावित करता है जो पहले से ही हेपेटाइटिस बी से संक्रमित हैं. यह संक्रमित रक्त या अन्य शारीरिक तरल पदार्थों के संपर्क से फैलता है. हेपेटाइटिस डी के लक्षणों में पीलिया, गहरे रंग का पेशाब, मतली, उल्टी, पेट में दर्द, थकान और बुखार शामिल हो सकते हैं. हेपेटाइटिस डी के लिए कोई टीका या विशिष्ट उपचार नहीं है, लेकिन कुछ मामलों में लंबे संक्रमण के प्रबंधन के लिए एंटीवायरल दवाओं का उपयोग किया जा सकता है. हेपेटाइटिस ई यह एक वायरस है जो लिवर में सूजन पैदा कर सकता है. यह आमतौर पर गंदा खाना और पानी के संपर्क से फैलता है. हेपेटाइटिस ई के लक्षणों में पीलिया, गहरे पीले रंग का पेशाब, मतली, उल्टी, पेट में दर्द, थकान और बुखार शामिल हो सकते हैं. हेपेटाइटिस ई के लिए कोई टीका या खास इलाज नहीं है, लेकिन कुछ मामलों में लंबे इंफेक्शन के प्रबंधन के लिए कुछ एंटीवायरल दवाओं का उपयोग किया जा सकता है. इन पांच प्रकार के वायरल हेपेटाइटिस के बीच अंतर जानना महत्वपूर्ण है ताकि आप खुद को संक्रमण से बचाने के लिए कदम उठा सकें और जरूरत पड़ने पर उचित इलाज करवा सकें. हेपेटाइटिस ए और बी से सुरक्षा के लिए टीके उपलब्ध हैं, जबकि जरूरत पड़ने पर हेपेटाइटिस सी, डी या ई के कारण होने वाले लंबे संक्रमण के प्रबंधन के लिए एंटीवायरल दवाओं का इस्तेमाल किया जा सकता है. Disclaimer: इस आर्टिकल में बताई विधि, तरीक़ों और सुझाव पर अमल करने से पहले डॉक्टर या संबंधित एक्सपर्ट की सलाह जरूर लें.
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