Thursday, April 16, 2026
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इंडिया टुडे की रिपोर्ट में कहा गया है कि ने प्रस्तावित यूसीसी के मसौदे में एलजीबीटीक्यू+ समुदाय के अधिकारों पर विचार किया है. हालांकि, इन्हें सिफारिश का हिस्सा नहीं बनाया गया है क्योंकि समलैंगिक विवाह को कानूनी मान्यता देने का मामला अभी सुप्रीम कोर्ट में है और इस पर फैसला आना बाकी है. ड्राफ्ट में लिव-इन, कंसेंट भी इंडिया टु़डे ने सूत्रों के हवाले से लिखा है कि पैनल ने शादी की एक समान उम्र, लिव-इन रिलेशनशिप और ऐसे रिश्तों से पैदा होने वाले बच्चों, विवाह के पंजीकरण, सेक्स के लिए सहमति (कंसेंट) की उम्र, कम उम्र में बच्चे के जन्म जैसे मुद्दों को ध्यान में रखा है. महिलाओं के लिए शादी की उम्र बढ़ाने को लेकर भी ड्राफ्ट में विचार किया गया है. लैंगिक समानता सुनिश्चित करना- जस्टिस रंजना देसाई जस्टिस (रिटायर्ड) रंजना देसाई ने कहा कि कमेटी की रिपोर्ट जल्द ही प्रकाशित की जाएगी और सरकार को सौंप दी जाएगी. उन्होंने बताया कि समिति ने उत्तराखंड के विभिन्न हिस्सों में प्रचलित विभिन्न पारंपरिक प्रथाओं की ‘बारीकियों’ को समझने की कोशिश की है. हमारा जोर महिलाओं, बच्चों और दिव्यांग व्यक्तियों को ध्यान में रखते हुए लैंगिक समानता सुनिश्चित करना है. हमने भेदभाव को खत्म कर सभी को एक समान स्तर पर लाने का प्रयास किया है. देसाई ने कहा कि समिति ने मुस्लिम देशों सहित विभिन्न देशों में मौजूदा कानूनों का अध्ययन किया है लेकिन उनके नाम साझा करने से इनकार कर दिया. बीते साल हुआ था समिति का गठन उत्तराखंड सरकार ने पिछले साल मई में न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) देसाई की अध्यक्षता में विशेषज्ञों की एक समिति का गठन किया था. इस समिति का गठन उत्तराखंड के निवासियों के व्यक्तिगत दीवानी मामलों से जुड़े विभिन्न मौजूद कानूनों पर गौर करने और विवाह, तलाक, संपत्ति के अधिकार, उत्तराधिकार, विरासत, गोद लेने और रखरखाव जैसे विषयों पर मसौदा कानून या कानून तैयार करने या मौजूदा कानूनों में बदलाव का सुझाव देने के लिए किया गया था. इस संबंध में एक अधिसूचना 27 मई 2022 को जारी की गई थी. सीएम धामी ने दी प्रतिक्रिया उत्तराखंड के सीएम धामी ने ट्वीट कर लिखा, प्रदेशवासियों से किए गए वादे के अनुरूप समान नागरिक संहिता का मसौदा तैयार करने के लिये बनाई गई समिति ने आज 30 जून को अपना कार्य पूरा कर लिया है और जल्द ही देवभूमि उत्तराखंड में समान नागरिक संहिता को लागू किया जाएगा.

Uniform Civil Code: यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC) पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बयान के बाद सियासी घमासान जारी है. जहां कुछ पार्टियां इसका समर्थन कर रही हैं तो वहीं कुछ पार्टियां ऐसी भी हैं जो यूसीसी की जमकर आलोचना कर रही हैं. अब मेघालय के मुख्यमंत्री कॉनराड के. संगमा ने कहा कि यूनिफॉर्म सिविल कोड भारत के वास्तविक विचार के खिलाफ है. उन्होंने कहा कि ये देश के लिए उपयुक्त नहीं है, क्योंकि हमारा देश विविधता में एकता वाला एक विविध राष्ट्र है.

नेशनल पीपुल्स पार्टी (एनपीपी) के अध्यक्ष कॉनराड के. संगमा ने कहा, ‘मेघालय की एक अनूठी संस्कृति और समाज है. यहां के लोग ऐसे ही रहना चाहेंगे.’ उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि मेघालय एक मातृसत्तात्मक समाज हैं, यही हमारी ताकत रही है और यही हमारी संस्कृति रही है. हम नहीं चाहेंगे कि इसे बदला जाए. यूसीसी ड्राफ्ट की वास्तविक सामग्री को देखे बिना विवरण में जाना मुश्किल होगा.

पीएम मोदी ने क्या कहा था?

पीएम मोदी ने हाल ही में अपने भोपाल दौरे के दौरान कहा था कि यूनिफॉर्म सिविल कोड के नाम पर लोगों को भड़काने का काम किया जा रहा है. एक घर में एक सदस्य के लिए एक कानून हो और दूसरे के लिए दूसरा तो घर चल पायेगा क्या? ऐसी दोहरी व्यवस्था से देश कैसे चल पाएगा?” इतना ही उन्होंने आगे कहा था कि मुसलमान बेटियों पर ‘तीन तलाक’ का फंदा लटकाकर, कुछ लोग उन पर हमेशा अत्याचार करने की खुली छूट चाहते हैं. यही लोग तीन तलाक का समर्थन भी करते हैं.

 

पीएम मोदी के इस बयान के बाद असदुद्दीन औवेसी ने बीजेपी पर सवाल खड़े किए. ओवैसी ने कहा कि सरकार दलित मुस्लिमों के लिए अनुसूचित जाति आरक्षण (SC) का विरोध क्यों कर रही है? बीजेपी पिछड़े मुस्लिमों का आरक्षण देने का विरोध क्यों कर रही है? क्या वह इस सामाजिक अन्याय का दोष भी यूसीसी को देंगे? वहीं दूसरी ओर कुछ ऐसी पार्टियां भी हैं जो यूनिफॉर्म सिविल कोड का समर्थन करती हुए नजर आ रही हैं, जिनमें आम आदमी पार्टी और उद्धव ठाकरे गुट की शिवसेना का नाम शामिल है.

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