Thursday, April 16, 2026
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‘पैसों की सियासत वेश्याओं की राजनीति की तरह’, महाराष्ट्र में KCR की एंट्री पर सामना का तंज

Maharashtra: तेलंगाना के मुख्यमंत्री के चंद्रशेखर राव महाराष्ट्र में अपनी पार्टी भारत राष्ट्र समिति की जड़ें मजबूत करना चाहते हैं, जिसके चलते केसीआर हाल ही में अपने दो दिन के दौरे पर सोलापुर पहुंचे. इस मौके पर सीएम केसीआर के साथ राज्य के मंत्री, एमएलसी, सांसद, विधायक और पार्टी के वरिष्ठ नेता का एक विशाल काफिला था. वहीं महाराष्ट्र में इस तरह की राजनीतिक एंट्री के बाद अब उद्धव गुट वाली शिवसेना ने अपने मुखपत्र ‘सामना’ के संपादकीय में केसीआर पर जमकर हमला बोला है.

सामना में लिखा गया, ‘महाराष्ट्र की राजनीति में तेलंगाना के मुख्यमंत्री के. चंद्रशेखर राव ने अपना काफिला घुसा दिया है. कल तक यही के.सी.आर. घोर बीजेपी विरोधी के तौर पर खड़े थे. महाराष्ट्र में उद्धव ठाकरे और शरद पवार से मिलकर गए. उन्हीं महाशय ने अब यू-टर्न ले लिया है. वो महाराष्ट्र में बीजेपी की मदद के लिए ही घूम रहे हैं. महाराष्ट्र की राजनीति किसी दौर में प्रगतिशील विचारों का मजबूत गढ़ हुआ करती थी. बाहरी विचारों के कीड़े यहां नहीं घुसते थे. अब महाराष्ट्र की अवस्था ढहते किले की तरह हो गई है.

‘सीएम पद पर कौन बैठना चाहता है, ये अब केसीआर तय करने लगे हैं’

सामना में ये भी लिखा है, ”अमित शाह से लेकर तेलंगाना के सीएम के. चंद्रशेखर राव तक जो भी उठता है, वो महाराष्ट्र की राजनीति और अर्थव्यवस्था पर कब्जा करने की ख्वाहिश रखता है. यह मराठी राज्य के लिए खतरे की घंटी है. स्वाभिमानी शेतकरी संगठन के प्रमुख राजू शेट्टी ने एक बयान दिया है कि ‘चंद्रशेखर राव ने हमको महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री पद का ‘ऑफर’ दिया है!’ महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री पद पर कौन बैठना चाहता है, ये अब केसीआर तय करने लगे हैं. प्रकाश आंबेडकर और राव में भी मेल-मुलाकात हुई. ” संपादकीय में आगे लिखा है कि तेलंगाना राष्ट्र समिति केसीआर की मूल क्षेत्रीय पार्टी है. राव ने इसे ‘भारत राष्ट्र समिति दल’ में तब्दील कर दिया क्योंकि उन्हें राष्ट्रीय राजनीति में कदम रखना है. उन्हें ऐसा करने की आवश्यकता क्या थी? यह एक रहस्य ही है.

 

सामना में लिखा है, ”कलेश्वरम् लिफ्ट सिंचाई योजना देश में सबसे बड़ा घोटाला है और इस योजना में कम से कम 70 हजार करोड़ रुपयों की लूट हुई है लेकिन बीजेपी और केंद्र सरकार इस पर चुप्पी साधे हुए है. कलेश्वरम् सिंचाई योजना की लागत वैसे बढ़ाई गई और उसमें ‘कमीशन’ कहां घुमाया गया, ये खुला रहस्य है. वही कमीशन अब महाराष्ट्र में घुमाकर बीजेपी की मदद के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है. तेलंगाना मॉडल महाराष्ट्र में लेकर आनेवाले केसीआर संघर्ष करके आगे आए नेतृत्वकर्ता हैं. उनकी काबिलियत और राज-काज की उनकी क्षमता पर संदेह व्यक्त करने की कोई वजह नहीं है, लेकिन पहले से ही बिगड़ते जा रहे महाराष्ट्र को और अधिक बिगाड़ने में वे योगदान दे रहे हैं. पैसों की सियासत ये वेश्याओं की राजनीति की तरह होती है, ऐसा दादा धर्माधिकारी ने कहा था. के.सी.आर. ने ये सब टालना चाहिए. राष्ट्रीय राजनीति में आने की उनकी दिशा चुक गई है.”

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