कार्मिक, लोक शिकायत और पेंशन राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा है कि क्षमता निर्माण को नियम-आधारित कार्यप्रणाली से आगे बढ़कर भूमिका-आधारित दृष्टिकोण की ओर अग्रसर होना चाहिए, ताकि अधिकारी विभिन्न क्षेत्रों में तेज़ी से स्वयं को ढाल सकें। नई दिल्ली में चल रहे ‘साधना सप्ताह’ के दौरान एक विशेष सत्र को संबोधित करते हुए डॉ. सिंह ने कहा कि ‘विकसित भारत 2047’ के दृष्टिकोण को हासिल करने और भविष्य के लिए तैयार सिविल सेवा को मज़बूत बनाने में क्षमता निर्माण की महत्वपूर्ण भूमिका है।
उन्होंने क्षमता निर्माण आयोग को सुझाव दिया कि वह अधिकारियों में प्रक्रियागत समझ को मज़बूत करने के लिए ‘संसदीय प्रश्नों के उत्तर देने के बारे में एक विशेष पाठ्यक्रम तैयार करे। उन्होंने यह भी कहा कि शासन में पारदर्शिता, निष्पक्षता और प्रभावी सेवा वितरण सुनिश्चित करने के लिए प्रौद्योगिकी का समावेश ज़रूरी है। डॉ. सिंह ने कहा कि ‘मिशन कर्मयोगी’ ने अपने पाँच वर्ष पूरे कर लिए हैं, जो निरंतर सीखने और दक्षता-आधारित प्रशिक्षण के माध्यम से सिविल सेवाओं में सुधार की दिशा में हुई महत्वपूर्ण प्रगति का प्रतीक है।
इस कार्यक्रम के दौरान, डॉ. सिंह ने कई महत्वपूर्ण उपाय शुरू किउ, जिनमें वैज्ञानिकों और शिक्षाविदों के लिए प्रशासनिक क्षमता निर्माण कार्यक्रम, नए रूप में उन्नति पोर्टल और ‘कर्मयोगी कर्तव्य कार्यक्रम’ को राष्ट्रीय स्तर पर लागू करने की रूपरेखा शामिल है।
मिशन कर्मयोगी के तहत इस महीने की 2 से 8 तारीख तक ‘साधना सप्ताह’ मनाया जा रहा है, जो एक सप्ताह तक चलने वाली सीखने की पहल है। इसका उद्देश्य सिविल सेवकों में सतत कौशल विकास और उभरती हुई तकनीकों को अपनाने को बढ़ावा देना और क्षमता निर्माण को बेहतर बनाकर एक ऐसा शासन तंत्र तैयार करना है जो भविष्य के लिए तैयार, कुशल और नागरिक-केंद्रित हो।




