Friday, May 15, 2026
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गौशाला उन्नयन के लिए विशेष पहल – विधायक श्री टण्डन

गौ-शालाएं आत्म निर्भरता की ओर अग्रसर हो – कलेक्टर

विदिशा : गुरूवार, जुलाई 3, 2025,

विदिशा जिला मुख्यालय पर एक दिवसीय जिला स्तरीय गौशाला सम्मेलन का आयोजन किया गया था जिसमें गौ-संचालको का प्रबोधन के माध्यम से गौशालाआंे के संवर्धन हेतु नवीन सुझावो को सांझा किया गया है। कार्यक्रम का शुभांरभ जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती गीता कैलाश रघुवंशी, विधायक श्री मुकेश टण्डन व अन्य जनप्रतिनिधियों ने दीप प्रज्जवलित कर किया।

जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती गीता कैलाश रघुवंशी ने कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री डाॅ मोहन यादव के नेतृत्व में और प्रभारी मंत्री श्री लखन पटेल के मार्गदर्शन में जिले में गौशालाओं को आत्म सबल बनाने के लिए विशेष प्रयास किए जा रहे है। उन्होंने भारतीय संस्कृति में गायो के महत्व को रेखांकित किया।

मुख्यमंत्री डाॅ मोहन यादव के द्वारा गौ-शालाओं के उन्नयन हेतु विशेष पहल की जा रही है इस पहल में हरेक नागरिक अपना सहयोग देकर प्रदेश में विदिशा जिले को अग्रणी कर सकता है उक्त आश्य के विचार विदिशा विधायक श्री मुकेश टण्डन ने गुरूवार को आयोजित जिला स्तरीय गौ-शाला संचालको का प्रबोधन कार्य्रक्रम में व्यक्त किए है। उन्होंने कहा कि गौवंश की रक्षा के लिए हम सबका नैतिक दायित्व है ऐसे ही गायपालको को भी ध्यान रखना होगा कि दूध निकालने के उपरांत उन्हें खुले में ना छोड़े। कई बार सड़को पर बैठे गौवंश के कारण अनेक प्रकार की दुर्घटनाएं हो जाती है जिसमें जन और पशु चोटिल हो जाते है।

विधायक श्री टण्डन ने प्राचीनकालीन व्यवस्था को रेखांकित करते हुए कहा कि गायो के लिए पहले पूरा परिवार समर्पित रहता था और घर के सभी सदस्यों को अलग-अलग काम बटे हुआ करते थे किन्तु धीरे-धीरे आधुनिकता के परिवेश में अब हम पहले जैसा ध्यान ना देकर गौवंश को खुले में विचरण हेतु छोड़ देते हैं। उन्होंने गौ-शालाओं के संवर्धन हेतु किए जाने वाले कार्यो को रेखांकित किया है। कार्यक्रम को जिला पंचायत की कृषि समिति के सभापति श्री धनराज सिंह दांगी ने भी सम्बोधित किया।

कलेक्टर श्री अंशुल गुप्ता ने जिले की सभी 144 गौशालाओं में पानी, बिजली की सतत उपलब्धता बनाए रखने पर जोर देते हुए उन्होंने आदर्श गौशाला की रूपरेखा को रेखांकित किया है। कलेक्टर श्री गुप्ता ने कहा कि गौशालाएं आत्म निर्भरता की ओर कैसे अग्रसर हो, उनकी आमदनी कैसे बढे, हरेक गौशाला में चारा प्रबंधन के स्त्रोत कैसे उन्नयन हो इस ओर विशेष प्रयास करने होंगे।

कलेक्टर श्री गुप्ता ने बताया कि राज्य सरकार द्वारा गौ-शालाओं में रखे जाने वाले प्रति गौवंश के लिए अब हर रोज 40 रूपए की राशि जारी की जा रही है। उक्त राशि के साथ-साथ जनभागीदारी सामाजिक सहभागिता के माध्यम से हम जिले की गौ-शालाओं को कैसे सुदृढीकरण करें के लिए आपसी समन्वय जरूरी है।

कलेक्टर श्री अंशुल गुप्ता ने कहा कि नंदनी उपवन प्रत्येक गौशाला के एक हिस्से में स्थानीय छायादार वृक्ष जैसे पीपल, बरगद, फलदार आम, इमली, औषधी गुणो से युक्त वृक्ष जैसे नीम, बिल्ब, सहजन आदि का रोपण और संरक्षण करें। जिससे गौवंश को छाया सहित पेड़ो की पत्तियों से पोषण भी प्राप्त होता रहे। गौशालाओं मे संरक्षित प्रत्येक गौवंश की टैगिंग अनिवार्य रुप से हो। गौशालाओं मे एक पंजी रखें जिसमें नव प्रवेशी गौवंश, गुमशुदा व मृत गौवंश का पारदर्शी तरीके से प्रविष्टि हो। सभी गौवंश को टीकाकरण कराएँ। गौवंश, पश ुचिकित्सक और स्वयं की सुरक्षा के लिए प्रत्येक गौशाला में ट्रेविस (कटघरा) लगवाएँ।

जिला स्तरीय गौ-शाला सम्मेलन के शुभांरभ अवसर पर पशुपालन एवं डेयरी विभाग के उप संचालक श्री एनके शुक्ला ने पालन प्रतिवेदन प्रस्तुत करते हुए बताया कि जिले में कुल 144 गौ-शालाएं संचालित हो रही  है जिसमें से 132 शासकीय व 12 निजी गौशालाएं शांमिल है। जिले में सम्पन्न हुई 21वीं पशुगणना के प्रारंभिक रूझान अनुसार जिले में कुल 23 हजार गौवंश है। कार्यशाला में एमपी गौसंवर्धन बोर्ड भोपाल के डाक्टर विनीत तिवारी ने गौशाला व गौवंश प्रबंधन और आवश्यक अभिलेखो का संधारण कैसे करे को रेखांकित किया है। एमव्हीएससी मेडिसिन डाॅ आरबी बघेल ने गौवंश को बीमारियों से बचाव के उपाय पर प्रकाश डाला है।

किसान कल्याण तथा कृषि विकास विभाग के उप संचालक श्री केएस खपेडिया ने गौवंश के पोषण एवं हरे चारे की उपलब्धता के प्रबंधो को रेखांकित किया है। कृषि महाविद्यालय गंजबासौदा के अधिष्ठाता डाॅ विनोद कुमार गर्ग ने बहुवर्षीय चारा उत्पादन एवं संवर्धन पर और डाॅ आशीष श्रीवास्तव ने चारा संरक्षण विधि एवं उपयोगिता पर प्रकाश डाला है। जिला पंचायत के अतिरिक्त सीईओ श्री पंकज जैन ने गौ-शालाओं के आत्म निर्भरता के उपायो को रेखांकित किया है।

                उक्त कार्यक्रम में उत्कृष्ट गौ-शालाओं की अवधारणा को प्रतिपादित करने वाले कार्यो पर आनंदपुर और मेहलुआ चैराहे की गौशाला संचालको द्वारा अनुभव सांझा किए गए है। कार्यक्रम में गौशाला संचालको एवं प्रतिनिधियों के द्वारा सुझाव व समस्याओं को अवगत कराया गया है। उनके समाधान हेतु किए जाने वाले प्रबंधो पर बल दिया गया है।

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