Saturday, May 16, 2026
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काटजू अस्पताल में विख्यात विषय विशेषज्ञों ने दी स्तनपान और पोषण आहार की जानकारी

मां के दूध का कोई विकल्प नहीं – मंत्री श्री पटेल

सिविल हॉस्पिटल डॉ. कैलाशनाथ काटजू में स्तनपान जागरूकता एवं पोषण आहार परामर्श कार्यक्रम का आयोजन मंत्री लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा श्री नरेंद्र शिवाजी पटेल की गरिमामयी उपस्थिति में किया गया। कार्यक्रम के पूर्व मंत्री द्वारा चालित खाद्य प्रयोगशाला का अवलोकन किया गया। इस प्रयोगशाला के माध्यम से खाने में मिलावट की जांच सरल विधियों से किए जाने की जानकारी दी जाती है। चलित प्रयोगशाला से विभिन्न खाद्य पदार्थों, पेय पदार्थों, मसाले इत्यादि में मिलावट की जांच करने के सरल घरेलू तरीके भी बताए जाते हैं।

कार्यक्रम में महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा पोषण आहार प्रदर्शनी लगाई गई। जिसमें घर में उपलब्ध खाद्य पदार्थों चना, मूंगफली, नारियल, बेसन इत्यादि से पौष्टिक व्यंजन बनाने के तरीके बताए गए। खाद्य एवं औषधि प्रशासन भोपाल द्वारा मिलेट्स आधारित फूड्स प्रदर्शनी के माध्यम से जानकारी देकर जागरूक किया गया। इन मेलेट्स प्रोडक्ट्स को विदेशों में भी सप्लाई किया जा रहा है। प्रदर्शनी अवलोकन के दौरान राज्य मंत्री ने कहा कि अन्न के दैनिक जीवन में उपयोग को बढ़ावा देने के लिए इस तरह के जागरूकता कार्यक्रम बेहद उपयोगी है।

कार्यक्रम में वरिष्ठतम शिशु रोग विशेषज्ञ प्रोफेसर डॉ. शीला भम्बल एवं वरिष्ठ न्यूट्रीशनिस्ट डॉ. अमिता सिंह द्वारा एएनसी एवं धात्री महिलाओं को स्तनपान एवं पोषण आहार पर जानकारी दी गई। स्तनपान एवं पोषण आहार के महत्व एवं इससे जुड़ी भ्रांतियों को दूर करने के लिए स्वास्थ्य विभाग जिला भोपाल द्वारा विश्व स्तनपान सप्ताह के तारतम्य में यह कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस वर्ष ये सप्ताह क्लोजिंग द गैप, ब्रेस्टफीडिंग सपोर्ट फॉर ऑल की थीम पर मनाया जा रहा है।

कार्यक्रम में स्थानीय जनप्रतिनिधि, मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी भोपाल डॉ. प्रभाकर तिवारी, महिला एवं बाल विकास अधिकारी श्री सुनील सोलंकी, काटजू चिकित्सालय अधीक्षक कर्नल प्रवीण सिंह सहित बड़ी संख्या में चिकित्सक, स्वास्थ्य कार्यकर्ता एवं हितग्राही महिलाएं उपस्थित रही।

निजी स्वास्थ्य संस्थाओं में भी सुनिश्चित करवाया जाएगा एक घंटे के भीतर स्तनपान

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए लोग स्वस्थ एवं चिकित्सा शिक्षा राज्य मंत्री श्री नरेंद्र शिवाजी पटेल ने कहा कि मां और बेटे के बीच जो भावनात्मक संबंध ताउम्र बना रहता है उसके पीछे निश्चित रूप से ही मां के दूध की भूमिका है। सभी शासकीय प्रसव केंद्रों में जन्म के 1 घंटे के भीतर बच्चे को मां का पहला पीला गाढ़ा दूध पिलाना सुनिश्चित किया जाता है। निजी अस्पतालों में भी ये व्यवस्था अनिवार्य रूप से लागू की जावेगी। श्री पटेल ने कहा कि हर्ष का विषय है कि डॉ. शीला भंबल और डॉ. अमिता सिंह जैसे विद्वान लोग इस क्षेत्र में सराहनीय काम कर रहे हैं।

स्तनपान प्रकृति का पहला टीका

कार्यक्रम में वरिष्ठतम एवं विख्यात शिशु रोग विशेषज्ञ प्रोफेसर डॉ. शीला भंबल ने कहा कि जन्म के 1 घंटे के भीतर स्तनपान बच्चों के लिए अमृत है । इस दौरान दूध से निकलने वाला कोलस्ट्रम नामक तत्व बच्चों के लिए पहले प्राकृतिक टीके का काम करता है। छह माह के बाद बच्चे को अर्धठोस आहार देना जरूरी है। छह माह तक के बच्चे को सिर्फ और सिर्फ मां के दूध की जरूरत होती है। इस दौरान पानी की भी जरूरत नहीं है । बोतल का दूध बच्चों के लिए बहुत ही हानिकारक होता है।

घर के भोजन में ही हैं सभी पोषक तत्व

गर्भवती एवं प्रसव पश्चात महिलाओं के पोषण के लिए वरिष्ठ न्यूट्रीशनिस्ट डॉ. अमिता सिंह ने कहा कि घर की बनी और दैनिक इस्तेमाल के पदार्थों से ही पोषक भोजन बनाया जा सकता है। प्रसवकाल एवं प्रसव पश्चात पोषक भोजन के लिए बेसन या चने की रोटी, हरी सब्जी, अमरूद, आंवला का उपयोग करना चाहिए। लोहे के बर्तन में बना खाना आयरन का अच्छा स्रोत है। प्रसव काल में आयरन के अब्जॉर्प्शन को बढ़ाने के लिए खट्टी चीजों के इस्तेमाल को प्राथमिकता देनी चाहिए।

प्रसव केंद्रों में सुनिश्चित की जा रही है अर्ली ब्रेस्टफीडिंग

इस अवसर पर मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी भोपाल डॉ. प्रभाकर तिवारी ने बताया कि 1 से 7 अगस्त की अवधि में स्तनपान के लाभ एवं स्तनपान के प्रति फैली भ्रांतियों को दूर करने के लिए विभिन्न जागरूकता गतिविधियों का आयोजन किया जा रहा है। स्वास्थ्य संस्थाओं में स्तनपान की विधि, मां और शिशु को होने वाले लाभ सहित पोषण आहार संबंधी परामर्श दिए जा रहे हैं। सभी प्रसव केंद्रों पर शिशु जन्म के 1 घंटे के भीतर उसे मां का पहला पीला गाढ़ा दूध पिलवाना सुनिश्चित करवाया जा रहा है।

बच्चे के गंभीर बीमार होने पर हुआ गलती का अहसास

कार्यक्रम में हितग्राहियों से संवाद कर उनके अनुभव भी साझा किए गए। नेहरू नगर निवासी परिजनों ने बताया कि अस्पताल से डिस्चार्ज होने के बाद उन्होंने बच्चे को ऊपरी दूध पिलाना शुरू कर दिया था,किंतु बच्चे को उल्टी दस्त की शिकायत होने पर उन्हें अपनी गलती का एहसास हुआ। बच्चे के गंभीर बीमार होने पर जे पी हॉस्पिटल में उपचार करवाया गया है। मां ने बताया कि अब वह अपने बच्चों को सिर्फ अपना ही दूध पिला रही है। कार्यक्रम में ऐसी महिलाओं को प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित एवं प्रोत्साहित किया गया, जिन्होंने जन्म के 1 घंटे के भीतर स्तनपान शुरू करवाया है।

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