Saturday, May 9, 2026
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एजुकेशन हब इंदौर में सवा लाख लोगों को नहीं आता ‘क ख ग’, सर्वे में सामने आई चौंकाने वाली जानकारी

इंदौर । प्रदेश का एजुकेशन हब कहलाने वाले इंदौर में शिक्षा के मामले में दीपक तले अंधेरा जैसे हाल हैं। जिस इंदौर में आईआईएम और आईआईटी जैसे दिग्गज संस्थान हैं, वहीं पर भारत सरकार के एक साक्षरता कार्यक्रम के तहत हुए सर्वे में सवा लाख लोग ऐसे मिले हैं, जिन्हें क ख ग भी नहीं आता। यह तब है जबकि यहां शिक्षा का एक बड़ा ढांचा तैयार है और हजारों सरकारी व निजी संस्थान शिक्षा के क्षेत्र में लगे हैं।इसी शहर में शिक्षा संबंधी कारोबार का टर्नओवर करोड़ों रुपये में है, किंतु हाल ऐसे हैं कि एक लाख 16 हजार लोग अब तक निरक्षर हैं। चौंकाने वाला यह तथ्य भारत सरकार द्वारा चलाए जा रहे उल्लास नव भारत सारक्षता कार्यक्रम के तहत हुए सर्वे में सामने आया है।

 

इंदौर में पिछले दो वर्षों में एक लाख 16 हजार लोग ऐसे मिले हैं, जिन्हें बिल्कुल भी पढ़ना-लिखना नहीं आता है। अब इस कार्यक्रम के माध्यम से इन लोगों को साक्षर बनाया जा रहा है। अब तक 60 हजार लोग साक्षर हो चुके हैं। भारत सरकार द्वारा वर्ष 2022-23 में उल्लास नव भारत साक्षरता कार्यक्रम शुरू किया गया था। इसमें इंदौर में वर्ष 2027 तक कुल दो लाख लोगों को साक्षर किया जाना है। इसके तहत वर्ष 2023 में दो बार परीक्षाएं हुईं, जिनमें 23 हजार और 17 हजार लोगों ने पंजीयन करवाते हुए परीक्षा दी।

इस वर्ष मार्च माह में 20 हजार लोगों ने परीक्षा दी, वहीं सितंबर में होने वाली परीक्षा के लिए अब 56 हजार से अधिक लोगों ने पंजीयन करवाया है। इस कार्यक्रम के लिए सभी संकुल के प्राथमिक व माध्यमिक स्तर पर शिक्षकों को असाक्षर लोगों को खोजने की जिम्मेदारी दी गई, तो यह आंकड़ा सामने आया। शासकीय शिक्षक यह काम स्कूल समय के अलावा कर रहे हैं।

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