Thursday, April 16, 2026
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जल गंगा संवर्धन अभियानः जीवन के लिए जल संरक्षण अपरिहार्य

जबलपुर में 50 वर्ष पुरानी जल संरचना को किया पुनर्जीवित
अभियान बना जन सहभागिता की अनूठी मिसाल

पृथ्वी पर जल सबसे महत्वपूर्ण संसाधनों में से एक है, इसीलिए जीवन के लिए जल संरक्षण अपरिहार्य है। यह अनमोल संसाधन संरक्षित रहे इसके लिए मध्यप्रदेश शासन द्वारा जल गंगा संवर्धन अभियान चलाया जा रहा है। 16 जून तक चलाए जाने वाले इस अभियान के तहत जल स्रोतों के संरक्षण एवं जीर्णोद्धार का कार्य प्रदेश भर में किया जा रहा है। अभियान के सफल परिणाम भी हम सभी को प्रत्यक्ष रूप से देखने को मिल रहे हैं। 50 वर्ष पुरानी जल संरचना को पुनर्जीवित करते हुए इस अभियान ने जल संरक्षण की दिशा में नया कीर्तिमान स्थापित किए हैं। जबलपुर ज़िले के बघराजी ग्राम पंचायत में करीब 50 वर्ष पुरानी जल संरचना को पुनर्जीवित किया गया है। बारिश के मौसम में ग्रामीणों के लिए यह वरदान साबित होगा।

पेयजल की समस्या होगी दूर

जल गंगा संवर्धन अभियान के तहत कूपों के जीर्णोद्धार का कार्य किया जा रहा है। कूप की गाद निकालने व बंधाई कार्य करने से कूप का जल पेयजल के लिए उपयोग में लिया जाएगा। जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल की समस्या दूर होगी।

जल जनित बीमारियों से मिलेगी राहत

जल स्रोतों के निकट प्रदूषण न हो इसके लिए अभियान के तहत सामुदायिक प्रयास किए जा रहे हैं। जन प्रतिनिधियों से लेकर नागरिक जन तक श्रमदान कर रहे हैं और जल को प्रदूषित होने से बचा रहे हैं। इससे न केवल पेयजल की गुणवत्ता में सुधार होगा बल्कि जल प्रदूषण के कारण होने वाली जल जनित बीमारियों से भी राहत मिलेगी।

विभिन्न क्षेत्रों में हो रहे प्रयास

जल गंगा संवर्धन अभियान के तहत समस्त जिलों में पौधारोपण, नदी, नालों, ऐतिहासिक एवं पारम्परिक जल संरचनाओं, तालाब, झील, कुंओं, बावड़ियों आदि के संरक्षण एवं पुनर्जीवन का कार्य किया जा रहा है। इस अभियान में आमजन की सहभागिता भी सुनिश्चित की जा रही है। समाज के सभी वर्गों के लोग इस अभियान में सहयोग कर रहे हैं और श्रमदान कर जल स्त्रोतों की सफाई में योगदान दे रहे हैं।

इसी क्रम में खरगोन ज़िले की ग्राम पंचायत अघावन में स्थित बावड़ी में श्रमदान कर साफ-सफाई की गई। इस बावड़ी में कूडा-करकट एवं गंदगी हो जाने से इसका पानी पेयजल के रूप में उपयोग नहीं किया जा रहा था। जनसहयोग से श्रमदान कर इस बावड़ी की सफाई की गई। इसमें बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने श्रमदान किया। नगर परिषद बिस्टान के सदस्यों और जनप्रतिनिधियों की उपस्थिति में इंद्रावती नदी के सेठानी घाट पर श्रमदान कर नदी की साफ सफाई की गई। इस दौरान सभी के सहयोग से नदी में जमा प्लास्टिक, पॉलीथीन और कुड़ा करकट, कटिली झाड़िया को काटकर साफ-सफाई की गई। नगर परिषद बिस्टान के सदस्यों और जनप्रतिनिधियों की उपस्थिति में इंद्रावती नदी के सेठानी घाट पर श्रमदान कर नदी की साफ सफाई की गई। इस दौरान सभी के सहयोग से नदी में जमा प्लास्टिक, पॉलीथीन और कुड़ा करकट, कटिली झाड़िया को काटकर साफ-सफाई की गई। उमरिया ज़िले में युवाओं द्वारा तालाब के घाटों में जल गंगा संवर्धन अभियान गीत गाकर नागरिकों को जल संरक्षण के प्रति प्रेरित किया जा रहा। बुरहानपुर ज़िले में वर्षा के जल को संरक्षित करने वाले घरों को जल मंदिर का टैग दिया जा रहा है। इसी तरह अभियान के सफल परिणाम अन्य ज़िलों में भी देखने को मिल रहे हैं।

28 लाख 43 हज़ार 666 से अधिक की लागत के जीर्णोद्धार कार्य संपन्न

प्राप्त जानकारी अनुसार जल गंगा संवर्द्धन अभियान के तहत सभी 55 ज़िलों के ग्रामीण क्षेत्रों में मनरेगा योजना के अंतर्गत नदी, तालाबों, कुओं, बावड़ियों सहित जल स्त्रोतों की साफ सफाई, जीर्णोद्धार का कार्य चल रहा है। इस योजना के शुरू होने अर्थात 5 जून से 12 जून तक 3200 नवीन कूपों का निर्माण कार्य पूर्ण कराया गया साथ ही 5440 कूपों का जीर्णोद्धार कार्य सम्पन्न हुआ। इसी तरह 8818 नए खेत तालाब बनाए गये तथा 74 खेत तालाबों का जीर्णोद्धार कार्य किया गया, 1363 चेक डैम/ स्टॉप डैम के नवीन कार्य हुए एवं 2974 का जीर्णोद्धार कार्य पूर्ण किया गया। प्रदेश भर में गेबियन, तालाब गहरीकरण, नदी गहरीकरण एवं साफ़-सफ़ाई, नाला सुधार, परकोलेशन टैंक, रिचार्ज पिट एवं जलस्रोतों के संरक्षण के लिये अन्य कार्य किए गए। अभी तक कुल 35,630 नवीन कार्य एवं 19,428 जीर्णोद्धार कार्यों का कार्य किए गए हैं। नवीन कार्यों की कुल लागत 99 लाख 48 हजार 881 रूपये है एवं जीर्णोद्धार कार्यों की कुल लागत 28 लाख 43 हज़ार 666 रूपये है।

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