Monday, May 18, 2026
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ट्रुडो की पार्टी के सांसद चंद्र आर्य ने अपनी ही सरकार से पूछे तीखे सवाल, खालिस्तान आंदोलन पर साधा निशाना

Indian Community In Canada: भारत-कनाडा राजनयिक गतिरोध के बीच, कनाडाई सांसद चंद्र आर्य ने आरोप लगाया कि चरमपंथी तत्व हिंदू-कनाडाई लोगों पर ‘हमला’ कर रहे हैं और भारत वापस जाने के लिए ‘धमकी’ दे रहे हैं. न्यूज एजेंसी एएनआई के मुताबिक उन्होंने देश के सभी हिंदू-कनाडाई लोगों से शांत और सतर्क रहने और किसी भी अप्रिय घटना की सूचना कानून प्रवर्तन एजेंसियों को देने की भी अपील की है. बता दें चंद्र आर्य एक इंडो-कनाडाई नेता हैं जो कनाडा की लिबरल पार्टी से आते हैं, जो कि पीएम जस्टिन ट्रूडो की ही पार्टी है.

आर्य ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट किया, ‘कुछ दिन पहले कनाडा में खालिस्तान आंदोलन के नेता और तथाकथित जनमत संग्रह का आयोजन करने वाले सिख फॉर जस्टिस के अध्यक्ष गुरपतवंत सिंह पन्नून ने हिंदू कनाडाई लोगों पर हमला किया और हमें कनाडा छोड़ने और भारत वापस जाने के लिए कहा.’कनाडाई सांसद ने कहा, ‘मैंने कई हिंदू-कनाडाई लोगों से सुना है जो इस लक्षित हमले के बाद भयभीत हैं. मैं हिंदू-कनाडाई लोगों से शांत लेकिन सतर्क रहने का आग्रह करता हूं. कृपया हिंदूफोबिया की किसी भी घटना की सूचना अपनी स्थानीय कानून प्रवर्तन एजेंसियों को दें.’

आर्य ने आगे कहा कि खालिस्तान आंदोलन के नेता कनाडा के हिंदू लोगों को प्रतिक्रिया देने और कनाडा में ‘हिंदू और सिख समुदायों को विभाजित करने’ के लिए ‘उकसाने’ की कोशिश कर रहे हैं.

अधिकांश कनाडाई सिख खालिस्तान आंदोलन के खिलाफ
हालांकि, आर्य ने यह भी स्पष्ट किया कि अधिकांश कनाडाई सिख खालिस्तान आंदोलन का समर्थन नहीं करते हैं. उन्होंने कहा, ‘मुझे स्पष्ट करने दीजिए. हमारे अधिकांश कनाडाई सिख भाई-बहन खालिस्तान आंदोलन का समर्थन नहीं करते हैं. अधिकांश सिख कनाडाई कई कारणों से खालिस्तान आंदोलन की सार्वजनिक रूप से निंदा नहीं कर सकते हैं, लेकिन वे हिंदू-कनाडाई समुदाय से गहराई से जुड़े हुए हैं. कनाडाई हिंदू और सिख पारिवारिक रिश्तों और साझा सामाजिक और सांस्कृतिक संबंधों के माध्यम से जुड़े हुए हैं.’

आर्य ने उन्होंने, ‘कनाडा में उच्च नैतिक मूल्य हैं और हम पूरी तरह से कानून के शासन का समर्थन करते हैं.’ उन्होंने ‘आतंकवाद के महिमामंडन’ और ‘अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता’ के नाम पर घृणा अपराध की अनुमति दिए जाने पर निराशा व्यक्त की.

आतंकवाद का महिमामंडन कैसे किया जा सकता है
कनाडाई सांसद ने कहा, ‘मैं यह नहीं समझ पा रहा हूं कि भाषण और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के नाम पर किसी धार्मिक समूह को निशाना बनाकर आतंकवाद या घृणा अपराध का महिमामंडन कैसे किया जा सकता है. यदि कोई श्वेत वर्चस्ववादी नस्लवादी कनाडाई लोगों के किसी समूह पर हमला कर उन्हें हमारे देश से बाहर निकलने के लिए कहे तो कनाडा में आक्रोश फैल जाएगा. लेकिन जाहिर तौर पर, यह खालिस्तानी नेता इस घृणा अपराध से बच सकता है.’

आर्य ने कहा कि हिंदू कनाडाई कम प्रोफ़ाइल खुद को लॉ प्रोफाइल हैं, उन्हें आसान लक्ष्य माना जाता है, और ‘हिंदू विरोधी तत्व’ हिंदू-कनाडाई लोगों की सफलता को पचा नहीं सकते हैं.

दो समूह कर रहे हैं हिंदुओं पर हमले’
कनाडाई सांसद ने कहा, ‘अपनी आस्थाओं का प्रतिनिधित्व करने का दावा करने वाले दो सुसंगठित समूह हिंदू-कनाडाई समुदाय के नेताओं, हिंदू संगठनों और यहां तक कि मुझ पर भी हमला कर रहे हैं. दस महीने से अधिक समय से, हमारी संसद पर हमारे हिंदू धार्मिक पवित्र प्रतीक ओम के साथ झंडा फहराने के लिए मुझ पर हमला किया जा रहा है.’

आर्य ने आगे हिंदू-कनाडाई लोगों से शांत लेकिन सतर्क रहने का आह्वान किया. उन्होंने कहा, ‘कनाडाई होने के नाते, हमें अपनी हिंदू आस्था और विरासत और हमारे देश कनाडा की सामाजिक-आर्थिक सफलता में हमारे प्रभावशाली योगदान पर गर्व हो सकता है.’

भारत-कनाडा संबंधों में तनाव
इससे पहले सोमवार को, भारत-कनाडा संबंधों में तनाव तब चरम पर पहुंच गया जब, कनाडाई पीएम जस्टिन ट्रूडो ने भारत में नामित आतंकवादी हरदीप निज्जर की हत्या में भारत की संलिप्तता का आरोप लगाया. इसके बाद कनाडा ने एक भारतीय राजनयिक को देश से निष्कासित कर दिया.

भारत ने आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है और इसे ‘बेतुका’ और ‘प्रेरित’ करार दिया है. इसके बाद जवाबी कदम उठाते हुए भारत ने कनाडा के एक वरिष्ठ राजनयिक को देश से निष्कासित कर दिया

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