Friday, May 15, 2026
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महिला से सरेराह मारपीट, पुलिस ने एफआइआर दर्ज करने के बजाय एनसीआर काटकर थाने से किया चलता

भोपाल, । राजधानी के कोलार थाना पुलिस अपराधों को दबाने और बदमाशों को बचाने के लिए गजब का काम कर रही है। मुख्यमंत्री शिवराज जहां महिला अपराधों को लेकर पर ततकल कार्रवाई करने की बात कह रहे हैं तो कोलार पुलिस महिला अपराधों पर कार्रवाई करना तो दूर हीलाहवाली करती नजर आ रही है। ताजा मामला कोलार में रहने वाली एक महिला का है। उसके साथ एक युवक ने सड़क पर मारपीट कर दी। जब महिला थाने एफआइआर दर्ज कराने पहुंची तो उसकी शिकायत पर पुलिस ने गैर संज्ञेय अपराध मानते हुए एनसीआर काटकर उसे थाने से टरका दिया। ऐसे पुलिस की कार्यशैली पर सवाल खड़े हो रहे हैं। अब इस मामले में आला अधिकारी थाना पुलिस से सवाल जबाव कर रहे हैं।

जानकारी के मुताबिक गौरव नगर कोलार रोड निवासी मनीषा पाटिल घरेलू काम करती है। वह छह सितंबर को रात करीब साढ़े ग्यारह बजे अपने स्कूटर पर अपने एक परिचित को लेकर जा रही थी। रास्ते में गड्डा आया तो उन्होंने अपने स्कूटर की रफ्तार को कम कर लिया था। उसी समय उनको लगा कि किसी कुछ फेंककर मारा , जो उनके गाल पर आकर लगा। इससे मनीषा की गाड़ी अनियंत्रित होकर गिर गई। इससे उनके चेहरे पर चोट लग गई। तभी एक युवक शराब के नशे में आया और उसने महिला से मारपीट करना शुरु कर दी। मनीषा ने मदद के लिए लोगों से शोर मचाया तो आरोपित ने उनका मुंह दबा दिया। कुछ लोग महिला की मदद के लिए आगे बढ़े तो आरोपित खेत की तरफ भाग गया। बाद में महिला अपने पति को साथ लेकर कोलार थाने मामले की रिपोर्ट कराने पहुंची। महिला की शिकायत पर एफआइआर दर्ज करने के स्थान पर पुलिस ने एनसीआर काटकर उसे रवाना कर दिया। जबकि पुलिस ने उनका मेडिकल भी कराया था।

 

 

 

 

एनसीआर और एफआइआर में यह है अतंर

 

 

पुलिस द्वारा एफआइआर दर्ज करने के बाद उसे तमाम कानूनी शक्तियां मिल जाती हैं, जिससे पुलिस आरोपित को गिरफ्तार कर सकती है। जबकि एनसीआर दर्ज करने के बाद मामले में पुलिस खानापूर्ति करती है। कुल मिलाकर एनसीआर यानी गैर संज्ञेय अपराध में पुलिस के पास ना तो किसी व्यक्ति को गिरफ्तार करने का अधिकार होता और ना ही वह गंभीरता से मामले की जांच करते हैं।
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