Wednesday, April 22, 2026
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मोदी कैबिनेट में दिखेगा महाराष्ट्र इफेक्ट, इन नेताओं के मंत्री बनने की संभावना सबसे ज्यादा

Modi Cabinet Reshuffle: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मंत्रिमंडल में फेरबदल की अटकलें तेज हैं. मंत्रियों की नई सूची कभी भी जारी हो सकती है. आगामी लोकसभा चुनावों को देखते हुए कई नए नामों की एंट्री मंत्रिमंडल में हो सकती है, तो कई को छुट्टी देकर पार्टी के काम में लगाया जा सकता है. पिछली बार 2021 में मोदी मंत्रिमंडल में फेरबदल हुआ था, तब 43 मंत्रियों ने शपथ ली थी.

नए बदलाव में किसकी एंट्री होगी और कौन आउट होगा, इसे लेकर कयासों का दौर शुरू हो गया है. सबसे ज्यादा चर्चा महाराष्ट्र को लेकर है, जहां पर हाल ही में बड़ा सियासी उलटफेर हुआ है. मोदी कैबिनेट में होने वाले बदलाव पर भी इसका असर दिखने के संकेत मिल रहे हैं.

फडणवीस  के दिल्ली जाने की अटकलें

महाराष्ट्र में एक साल पहले जब एकनाथ शिंदे के साथ मिलकर बीजेपी ने सरकार बनाई तो सबसे अप्रत्याशित था, देवेंद्र फडणवीस का डिप्टी सीएम का पद स्वीकार करना. उस वक्त कहा गया था कि उन्होंने कुर्बानी दी है, लेकिन अब लगता है उसका इनाम मिलने का समय आ गया है. फडणवीस के दिल्ली जाने की अटकलें तेज हैं. उन्हें मोदी सरकार में मंत्री बनाया जा सकता है.

 

शिंदे गुट से किसे मिलेगा मौका ?

महाराष्ट्र में एकनाथ शिंदे की सरकार गठन को एक साल हो चुका है. इसके पहले बीजेपी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार के मंत्रिमंडल में शामिल थी, ऐसे में सरकार गठन के बाद से ही इसे लेकर अटकलें थीं कि शिवसेना को मोदी कैबिनेट में एंट्री मिल सकती है. अब जानकारी सामने आई है कि शिंदे गुट से प्रताप राव जाधव को केंद्र में मंत्री बनाया जा सकता है. इसके साथ ही एक और नाम भावना गवली का भी चर्चा में है. उन्हें भी मोदी मंत्रिमंडल में जगह मिल सकती है.

अजित पवार खेमे की भी एंट्री

महाराष्ट्र में हाल में हुए सियासी उलटफेर हुआ है. एनसीपी नेता अजित पवार चाचा शरद पवार से बगावत कर शिंदे सरकार में शामिल हो गए. कहा जा रहा है कि अजित पवार को आश्वासन दिया गया है कि एनसीपी को केंद्रीय मंत्रिमंडल में जगह दी जाएगी. अजित पवार खेमे से प्रफुल्ल पटेल को केंद्र में मंत्री बनाया जा सकता है. प्रफुल्ल पटेल अभी राज्यसभा से सांसद हैं. इसके पहले वे यूपीए सरकार में नागरिक उड्डयन मंत्री रह चुके हैं. बीते जून महीने में ही प्रफुल्ल पटेल को शरद पवार ने पार्टी का कार्यकारी अध्यक्ष बनाया था, लेकिन अजित पवार के साथ जाने की वजह से एक दिन पहले 3 जुलाई को पार्टी से निष्कासित कर दिया.

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एनसीपी के किन-किन लोगों ने ली शपथ अजित पवार – अजित पवार ने उपमुख्यमंत्री पद की शपथ ली है. वह बारामती सीट से विधायक हैं. छगन भुजबल – छगन भुजबल ने मंत्री पद की शपथ ली है. वह नासिक के येवला सीट से विधायक हैं. दिलिप राव वलसेपाटिल – मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की सरकार में कैबिनेट मंत्री बने दिलिप राव वलसेपाटिल पुणे की अंबेगांव से विधायक हैं. हसन मियांलाल मुशरिफ – कैबिनेट मंत्री बने हसन मियांलाल मुशरिफ कोल्हापुर की कागल सीट से विधायक हैं. धनंजय पंडितराव मुंडे – कैबिनेट मंत्री बने धनंजय पंडितराव मुंडे बीड की परळी सीट से विधायक हैं. धर्माराव बाबा भगवंतरंव आत्राम – गड़चिरौली की अहेरी सीट से विधायक हैं. अदिति वरदा सुनीत तटकरे – श्रीवर्धन सीट से विधायक हैं. संजय शंकुलता बाबूराव बनसोड़े- लातूर की उदगीर सीट से विधायक हैं. अनिल भाईदास पाटिल – जलगांव की अमलनेर सीट से विधायक हैं. आइये जानते हैं किस नेता के खिलाफ कौन से मामले हैं… 1. अजीत पवार अजित पवार के खिलाफ प्रवर्तन निदेशालय के जांच की लंबी सूची है. इसमें सहकारी बैंक घोटाला और सिंचाई घोटाला मामला प्रमुख हैं. यहां तक की उनकी अपनी कंपनी पर भी भ्रष्टाचार का मामला चल रहा है. प्रवर्तन निदेशालय ने साल 2021 में स्पार्कलिंग सॉइल प्रा.लि. के खिलाफ एक आरोप पत्र दायर कर किया था. हालांकि दायर चार्जशीट पर अजित पवार और उनकी पत्नी का नाम शामिल नहीं है लेकिन जिस कंपनी के खिलाफ शिकंजा कसा गया है वह अजित पवार और उनकी पत्नी की है. सहकारी बैंक घोटाला: मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की सरकार में डिप्टी सीएम बने अजित पवार के खिलाफ महाराष्ट्र राज्य सहकारी बैंक से दिए गए लोन में अनियमितताओं के आरोप हैं. इसी आरोप पर दायर एक जनहित याचिका (पीआईएल) के आधार पर वह आर्थिक अपराध शाखा द्वारा जांच का सामना कर रहे थे. ईडी ने भी इसी संबंध में उनपर मनी लॉन्ड्रिंग की जांच के लिए मामला दर्ज किया था. इसके बाद साल नवंबर 2019 में, महा विकास अघाड़ी – कांग्रेस, राकांपा और अविभाजित शिवसेना का तीन-पक्षीय गठबंधन सत्ता में आया. उस दौरान अजित पवार को उपमुख्यमंत्री बनाया गया. डिप्टी सीएम बनने के एक साल के भीतर, सितंबर 2020 में, ईओडब्ल्यू ने कहा कि अजित पवार के खिलाफ किसी भी आपराधिक गलत काम का कोई सबूत नहीं मिला है और विशेष अदालत के समक्ष एक क्लोजर रिपोर्ट दायर की. ईडी ने साल 2020 में ईओडब्ल्यू के रुख का विरोध किया था लेकिन उसके हस्तक्षेप को विशेष अदालत ने खारिज कर दिया था. सुप्रीम कोर्ट के फैसले के मुताबिक, अगर ईओडब्ल्यू केस बंद हो जाता तो ईडी भी जांच जारी नहीं रख सकती थी. इससे पहले कि विशेष अदालत ईओडब्ल्यू की क्लोजर रिपोर्ट पर फैसला कर पाती, पिछले साल जून महीने में राज्य सरकार बदल गई. इस बीच, ईडी ने अप्रैल में अपनी जांच में आरोप पत्र दायर किया. इस आरोप पत्र में बैंक और बैंक से लोन लेने वाली चीनी सहकारी समितियों को खरीदने वाली कुछ कंपनियों में अजित की भूमिका का जिक्र किया गया है. लेकिन उन्हें इन मामले में आरोपी नहीं बनाया गया है. 2. छगन भुजबल महाराष्ट्र के गवर्नर रमेश बैस ने बीते रविवार जिन 9 एनसीपी विधायकों को शपथ दिलाई है उनमें विधायकों में कईयों के खिलाफ ईडी की कार्रवाई चल रही है. छगन भुजबल भी उन्हीं विधायकों में शामिल हैं. छगन दो बार मुंबई के मेयर रह चुके हैं और उन्हें पवार के करीबी नेताओं में गिना जाता रहा है. फिलहाल छगन पर साल 2006 में पीडब्ल्यूडी मंत्री रहते हुए 100 करोड़ की परियोजनाओं का कॉन्ट्रैक्ट देने में अनियमितता का मामला दर्ज है. छगन पर एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) की रिपोर्ट के आधार पर प्रवर्तन निदेशालय ने अलग से भी मनी लॉन्ड्रिंग का मामला दर्ज किया था जिसमें साल 2016 में उनकी गिरफ्तारी हुई थी और साल 2018 में उन्हें हाईकोर्ट के आदेश पर जमानत भी मिल गई थी. इसके अलावा छगन भुजबल पर मुंबई विश्वविद्यालय भ्रष्टाचार मामले में एसीबी ने एक केस दर्ज किया था. जो अब तक विशेष अदालत में लंबित है. 3. हसन मुश्रीफ मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की सरकार में कैबिनेट मंत्री बने एनसीपी नेता हसन मुश्रीफ भी ईडी की जांच का सामना कर रहे हैं. दरअसल उनपर सर सेनापति संताजी घोरपडे शुगर फैक्ट्री में अनियमितताओं का मामला दर्ज है. जिसकी जांच ईडी कर रही है. 4. धनंजय पंडितराव मुंडे साल 2021 में एकनाथ शिंदे की सरकार में कैबिनेट मंत्री बने धनंजय पंडितराव मुंडे के खिलाफ रेप की शिकायत दर्ज की गई थी. हालांकि मुंडे ने बलात्कार के आरोपों का खंडन किया था. कुछ दिन बाद महिला ने भी शिकायत वापस ले ली थी. शपथ समारोह के बाद अजित पवार ने क्या कहा अजित पवार और छगन भुजबल ने एनडीए में शामिल होने के बाद एक प्रेस कॉन्फ्रेंस की. जिसमें प्रफुल्ल पटेल भी साथ बैठे नजर आए. इस प्रेस कॉन्फ्रेंस में अजीत पवार ने अपने फैसले पर बात करते हुए कहा, “हमने एनसीपी पार्टी के नाते शिंदे-फडनवीस सरकार में शामिल होने का फैसला लिया है.” उन्होंने आगे कहा, “हम देश का विकास चाहते हैं इसलिए एनडीए में शामिल हो रहे हैं. एनसीपी के सभी विधायक हमारे साथ हैं. हम अगले चुनाव में एनसीपी पार्टी के नाम और चुनाव चिन्ह के साथ मैदान में उतरेंगे. ” वहीं दूसरी तरफ प्रेस कॉन्फ्रेंस में मौजूद छगन भुजबल ने कहा “हमें कुछ दिन पहले शरद पवार साहब ने कहा था कि मोदी प्रधानमंत्री के तौर पर वापस आने वाले हैं. अगर ऐसा है तो एक सकारात्मक कदम लेते हुए हमने विकास के उद्देश्य से उनकी सरकार में शामिल होने का फ़ैसला लिया है.” उन्होने आगे कहा, “कई लोगों का कहना है कि हमारे नेताओं मे से कई लोगों के खिलाफ ईडी के केस चल रहे हैं लेकिन ऐसा नहीं है. शपथ लेने वाले नेताओं के नाम आप देख सकते हैं. हम सभी लोग मोदी के साथ जाना चाहते हैं.” शरद पवार ने क्या कहा महाराष्ट्र की राजनीति में आए सियासी भूचाल पर एनसीपी चीफ शरद पवार ने भी बयान दिया. उन्होंने अजित पवार पर निशाना साधते हुए कहा, “एनसीपी किसकी है, ये लोग तय करेंगे.” इसके अलावा शरद पवार ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और बीजेपी पर भी तंज कसते हुए कहा कि पार्टी ने जिन लोगों पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाए थे, उन्हें ही अब अपने साथ ले लिया है. शरद आगे कहते हैं, ‘मुझे खुशी है कि मेरे कुछ साथियों ने आज शपथ ली है. उनका सरकार (महाराष्ट्र) में शामिल होने से यह स्पष्ट है कि वे सभी आरोप मुक्त हो गए हैं.’ एकनाथ शिंदे ने क्या कहा? महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने शपथ ग्रहण समारोह के बाद कहा, “अब एक मुख्यंमत्री और दो उपमुख्यमंत्री वाली सरकार तेज़ गति से काम करेगी. ये डबल इंजन वाली सरकार मोदी जी के नेतृत्व में चल रहा था. अब इसे ट्रिपल इंजन मिल गया है. अजीत पवार और उनके सभी सहयोगी का स्वागत करता हूं.” उन्होंने महाराष्ट्र की महाविकास अघाड़ी गठबंधन पर तंज कसते हुए कहा, “लोकसभा चुनाव में चार-पांच सीटें उन्हें मिली थीं. इस बार उतनी भी रख पाएं तो बड़ी बात है.”
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