Wednesday, April 22, 2026
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एनसीपी के किन-किन लोगों ने ली शपथ अजित पवार – अजित पवार ने उपमुख्यमंत्री पद की शपथ ली है. वह बारामती सीट से विधायक हैं. छगन भुजबल – छगन भुजबल ने मंत्री पद की शपथ ली है. वह नासिक के येवला सीट से विधायक हैं. दिलिप राव वलसेपाटिल – मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की सरकार में कैबिनेट मंत्री बने दिलिप राव वलसेपाटिल पुणे की अंबेगांव से विधायक हैं. हसन मियांलाल मुशरिफ – कैबिनेट मंत्री बने हसन मियांलाल मुशरिफ कोल्हापुर की कागल सीट से विधायक हैं. धनंजय पंडितराव मुंडे – कैबिनेट मंत्री बने धनंजय पंडितराव मुंडे बीड की परळी सीट से विधायक हैं. धर्माराव बाबा भगवंतरंव आत्राम – गड़चिरौली की अहेरी सीट से विधायक हैं. अदिति वरदा सुनीत तटकरे – श्रीवर्धन सीट से विधायक हैं. संजय शंकुलता बाबूराव बनसोड़े- लातूर की उदगीर सीट से विधायक हैं. अनिल भाईदास पाटिल – जलगांव की अमलनेर सीट से विधायक हैं. आइये जानते हैं किस नेता के खिलाफ कौन से मामले हैं… 1. अजीत पवार अजित पवार के खिलाफ प्रवर्तन निदेशालय के जांच की लंबी सूची है. इसमें सहकारी बैंक घोटाला और सिंचाई घोटाला मामला प्रमुख हैं. यहां तक की उनकी अपनी कंपनी पर भी भ्रष्टाचार का मामला चल रहा है. प्रवर्तन निदेशालय ने साल 2021 में स्पार्कलिंग सॉइल प्रा.लि. के खिलाफ एक आरोप पत्र दायर कर किया था. हालांकि दायर चार्जशीट पर अजित पवार और उनकी पत्नी का नाम शामिल नहीं है लेकिन जिस कंपनी के खिलाफ शिकंजा कसा गया है वह अजित पवार और उनकी पत्नी की है. सहकारी बैंक घोटाला: मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की सरकार में डिप्टी सीएम बने अजित पवार के खिलाफ महाराष्ट्र राज्य सहकारी बैंक से दिए गए लोन में अनियमितताओं के आरोप हैं. इसी आरोप पर दायर एक जनहित याचिका (पीआईएल) के आधार पर वह आर्थिक अपराध शाखा द्वारा जांच का सामना कर रहे थे. ईडी ने भी इसी संबंध में उनपर मनी लॉन्ड्रिंग की जांच के लिए मामला दर्ज किया था. इसके बाद साल नवंबर 2019 में, महा विकास अघाड़ी – कांग्रेस, राकांपा और अविभाजित शिवसेना का तीन-पक्षीय गठबंधन सत्ता में आया. उस दौरान अजित पवार को उपमुख्यमंत्री बनाया गया. डिप्टी सीएम बनने के एक साल के भीतर, सितंबर 2020 में, ईओडब्ल्यू ने कहा कि अजित पवार के खिलाफ किसी भी आपराधिक गलत काम का कोई सबूत नहीं मिला है और विशेष अदालत के समक्ष एक क्लोजर रिपोर्ट दायर की. ईडी ने साल 2020 में ईओडब्ल्यू के रुख का विरोध किया था लेकिन उसके हस्तक्षेप को विशेष अदालत ने खारिज कर दिया था. सुप्रीम कोर्ट के फैसले के मुताबिक, अगर ईओडब्ल्यू केस बंद हो जाता तो ईडी भी जांच जारी नहीं रख सकती थी. इससे पहले कि विशेष अदालत ईओडब्ल्यू की क्लोजर रिपोर्ट पर फैसला कर पाती, पिछले साल जून महीने में राज्य सरकार बदल गई. इस बीच, ईडी ने अप्रैल में अपनी जांच में आरोप पत्र दायर किया. इस आरोप पत्र में बैंक और बैंक से लोन लेने वाली चीनी सहकारी समितियों को खरीदने वाली कुछ कंपनियों में अजित की भूमिका का जिक्र किया गया है. लेकिन उन्हें इन मामले में आरोपी नहीं बनाया गया है. 2. छगन भुजबल महाराष्ट्र के गवर्नर रमेश बैस ने बीते रविवार जिन 9 एनसीपी विधायकों को शपथ दिलाई है उनमें विधायकों में कईयों के खिलाफ ईडी की कार्रवाई चल रही है. छगन भुजबल भी उन्हीं विधायकों में शामिल हैं. छगन दो बार मुंबई के मेयर रह चुके हैं और उन्हें पवार के करीबी नेताओं में गिना जाता रहा है. फिलहाल छगन पर साल 2006 में पीडब्ल्यूडी मंत्री रहते हुए 100 करोड़ की परियोजनाओं का कॉन्ट्रैक्ट देने में अनियमितता का मामला दर्ज है. छगन पर एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) की रिपोर्ट के आधार पर प्रवर्तन निदेशालय ने अलग से भी मनी लॉन्ड्रिंग का मामला दर्ज किया था जिसमें साल 2016 में उनकी गिरफ्तारी हुई थी और साल 2018 में उन्हें हाईकोर्ट के आदेश पर जमानत भी मिल गई थी. इसके अलावा छगन भुजबल पर मुंबई विश्वविद्यालय भ्रष्टाचार मामले में एसीबी ने एक केस दर्ज किया था. जो अब तक विशेष अदालत में लंबित है. 3. हसन मुश्रीफ मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की सरकार में कैबिनेट मंत्री बने एनसीपी नेता हसन मुश्रीफ भी ईडी की जांच का सामना कर रहे हैं. दरअसल उनपर सर सेनापति संताजी घोरपडे शुगर फैक्ट्री में अनियमितताओं का मामला दर्ज है. जिसकी जांच ईडी कर रही है. 4. धनंजय पंडितराव मुंडे साल 2021 में एकनाथ शिंदे की सरकार में कैबिनेट मंत्री बने धनंजय पंडितराव मुंडे के खिलाफ रेप की शिकायत दर्ज की गई थी. हालांकि मुंडे ने बलात्कार के आरोपों का खंडन किया था. कुछ दिन बाद महिला ने भी शिकायत वापस ले ली थी. शपथ समारोह के बाद अजित पवार ने क्या कहा अजित पवार और छगन भुजबल ने एनडीए में शामिल होने के बाद एक प्रेस कॉन्फ्रेंस की. जिसमें प्रफुल्ल पटेल भी साथ बैठे नजर आए. इस प्रेस कॉन्फ्रेंस में अजीत पवार ने अपने फैसले पर बात करते हुए कहा, “हमने एनसीपी पार्टी के नाते शिंदे-फडनवीस सरकार में शामिल होने का फैसला लिया है.” उन्होंने आगे कहा, “हम देश का विकास चाहते हैं इसलिए एनडीए में शामिल हो रहे हैं. एनसीपी के सभी विधायक हमारे साथ हैं. हम अगले चुनाव में एनसीपी पार्टी के नाम और चुनाव चिन्ह के साथ मैदान में उतरेंगे. ” वहीं दूसरी तरफ प्रेस कॉन्फ्रेंस में मौजूद छगन भुजबल ने कहा “हमें कुछ दिन पहले शरद पवार साहब ने कहा था कि मोदी प्रधानमंत्री के तौर पर वापस आने वाले हैं. अगर ऐसा है तो एक सकारात्मक कदम लेते हुए हमने विकास के उद्देश्य से उनकी सरकार में शामिल होने का फ़ैसला लिया है.” उन्होने आगे कहा, “कई लोगों का कहना है कि हमारे नेताओं मे से कई लोगों के खिलाफ ईडी के केस चल रहे हैं लेकिन ऐसा नहीं है. शपथ लेने वाले नेताओं के नाम आप देख सकते हैं. हम सभी लोग मोदी के साथ जाना चाहते हैं.” शरद पवार ने क्या कहा महाराष्ट्र की राजनीति में आए सियासी भूचाल पर एनसीपी चीफ शरद पवार ने भी बयान दिया. उन्होंने अजित पवार पर निशाना साधते हुए कहा, “एनसीपी किसकी है, ये लोग तय करेंगे.” इसके अलावा शरद पवार ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और बीजेपी पर भी तंज कसते हुए कहा कि पार्टी ने जिन लोगों पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाए थे, उन्हें ही अब अपने साथ ले लिया है. शरद आगे कहते हैं, ‘मुझे खुशी है कि मेरे कुछ साथियों ने आज शपथ ली है. उनका सरकार (महाराष्ट्र) में शामिल होने से यह स्पष्ट है कि वे सभी आरोप मुक्त हो गए हैं.’ एकनाथ शिंदे ने क्या कहा? महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने शपथ ग्रहण समारोह के बाद कहा, “अब एक मुख्यंमत्री और दो उपमुख्यमंत्री वाली सरकार तेज़ गति से काम करेगी. ये डबल इंजन वाली सरकार मोदी जी के नेतृत्व में चल रहा था. अब इसे ट्रिपल इंजन मिल गया है. अजीत पवार और उनके सभी सहयोगी का स्वागत करता हूं.” उन्होंने महाराष्ट्र की महाविकास अघाड़ी गठबंधन पर तंज कसते हुए कहा, “लोकसभा चुनाव में चार-पांच सीटें उन्हें मिली थीं. इस बार उतनी भी रख पाएं तो बड़ी बात है.”

Modi Govt Cabinet Expansion: लोकसभा चुनाव से पहले केंद्रीय मंत्रिमंडल में कई बदलावों की तैयारी चल रही है. बताया जा रहा है कि अगले कुछ ही दिनों में मोदी सरकार के मंत्रिमंडल में कई और मंत्रियों का नाम जुड़ सकता है. कैबिनेट विस्तार की तैयारियों को लेकर दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने मंत्रियों के साथ मीटिंग की. कहा जा रहा है कि पीएम मोदी ने कैबिनेट एक्सपेंशन की तैयारियों का रोडमैप तैयार कर लिया है. इस बदलाव में कुछ ऐसे मंत्रियों की छुट्टी तय मानी जा रही है, वहीं कैबिनेट में कई नए चेहरे देखने को मिल सकते हैं.

कई मंत्रियों की कुर्सी पर खतरा
सूत्रों के मुताबिक प्रधानमंत्री ने कई मंत्रियों को पिंक स्लिप पकड़ा दी है और कई नए सहयोगियों को जोड़ने की कवायद शुरू कर दी है. गुजरात के तीन मंत्री डेंजर जोन में आ चुके हैं. मनसुख मांडविया, पुरुषोत्तम रुपाला और दर्शना जरदोश की कुर्सी पर खतरा मंडरा रहा है. यूपी से भी कुछ मंत्रियों की छुट्टी हो सकती है, क्योंकि अभी यूपी से मोदी कैबिनेट में 16 मंत्री हैं. जुलाई 2022 में मुख्तार अब्बास नकवी और आरसीपी सिंह दोनों का राज्यसभा टर्म खत्म हो गया था. जिसके बाद दोनों ने मंत्रीपद से इस्तीफा दिया था. मोदी सरकार में फिलहाल 75 मंत्री हैं, विस्तार के बाद मोदी समेत कुल 81 मंत्री हो सकते हैं.

चुनावी राज्यों पर फोकस
प्रधानमंत्री मोदी का फोकस 2024 के साथ उन राज्यों पर भी है, जहां विधानसभा चुनाव होने हैं. ऐसे में मोदी कैबिनेट में इन राज्यों से प्रतिनिधित्व बढ़ सकता है. खबर है कि मध्य प्रदेश से कुछ नेताओं को मंत्रिमंडल में एडजस्ट किया जा सकता है. तेलंगाना से भी मोदी के मंत्रिमंडल में कोई नया चेहरा दिख सकता है. वहीं राजस्थान से गजेंद्र सिंह शेखावत, अर्जुन मेघवाल का रिप्रेजेंटेशन है. इसलिए कम चांस है कि यहां से किसी नए चेहरे को एडजस्ट किया जाए. चुनावी राज्य छत्तीसगढ़ से भी बीजेपी के किसी बड़े नेता को केंद्र में भेजा जा सकता है.

कब तक होगा कैबिनेट विस्तार?
अब सवाल कैबिनेट एक्सपेंशन की औपचारिकताओं का है. नए मंत्रियों को शपथ राष्ट्रपति दिलाते हैं, चूंकि राष्ट्रपति 7 जुलाई तक दिल्ली में मौजूद नहीं रहेंगी इसलिए कहा जा रहा है कि कैबिनेट विस्तार 7 जुलाई के बाद संभव हो सकता है. 7 जुलाई को पीएम गीता प्रेस के कार्यक्रम के लिए गोरखपुर में रहेंगे, 8 जुलाई को भी पीएम मोदी दिल्ली से बाहर हैं. इसके बाद पीएम 13 जुलाई को फ्रांस जा रहे हैं. ऐसे में 9 से 12 जुलाई की विंडो दिखाई दे रही है. यानी इन तीन दिनों में कैबिनेट एक्सपेंशन वाली प्रक्रिया पूरी हो सकती है.

साउथ पर हो सकता है फोकस
पॉलिटिकल एक्सपर्ट्स भी कैबिनेट विस्तार को लेकर अपना विश्लेषण कर रहे हैं. एबीपी न्यूज़ से बात करते हुए सीनियर जर्नलिस्ट समीर चौगनकर ने कहा, “मुझे ऐसा लग रहा है कि एनडीए के जो घटक दल छोड़कर चले गए थे, उन्हें फिर से जोड़ने की कोशिश की जाएगी. इसके अलावा दक्षिण से भी प्रतिनिधित्व बढ़ाया जा सकता है, क्योंकि हाल ही में कर्नाटक में बीजेपी की हार हुई थी. पीएम मोदी का भी साउथ पर फोकस है. हो सकता है कि तेलंगाना से कुछ नए मंत्री बनाए जाएं, हो सकता है कि तमिलनाडु से भी किसी को राज्यसभा भेजा जाए. मंत्रिमंडल का विस्तार आने वाले विधानसभा और लोकसभा चुनाव को देखते हुए ही किया जाएगा. ”

कौन बन सकता है मंत्री
अब मंत्रिमंडल विस्तार से पहले कुछ नाम सामने आ रहे हैं. जिनमें महाराष्ट्र से देवेंद्र फडणवीस भी शामिल हैं. फडणवीस के दिल्ली जाने की अटकलें तेज हैं. वहीं शिंदे गुट से प्रताप राव जाधव/भावना गवली को मौका मिल सकता है. उधर हाल ही में बीजेपी के साथ हाथ मिलाने वाले एनसीपी नेताओं को इनाम मिल सकता है. कहा जा रहा है कि एनसीपी नेता प्रफुल्ल पटेल मंत्री बन सकते हैं, जो अभी राज्यसभा सांसद हैं. वो UPA सरकार में नागरिक उड्डयन मंत्री रह चुके हैं

बिहार और पंजाब से ये नाम 
बिहार में 40 लोकसभा सीटें हैं यहां से LJP(आर) के चिराग पासवान मंत्री बनाए जा सकते हैं, जिनके NDA में शामिल होने की बातचीत जारी है. वहीं पंजाब में अगर NDA में अकाली दल शामिल होता है तो हरसिमरत कौर को मंत्री पद दिया जा सकता है. वो मोदी सरकार में मंत्री रह चुकी हैं. उन्होंने किसान आंदोलन के मुद्दे पर इस्तीफा दिया था. अकाली दल ने NDA में दोबारा शामिल होने के संकेत दिए हैं.

 

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