India America defence deal: पीएम मोदी (PM Modi) अमेरिका (America) जाने वाले हैं. उनके दौरे से पहले भारत ने अमेरिका के साथ एक बड़ी डिफेंस डील की है. भारतीय रक्षा मंत्रालय ने अमेरिका (US) से एमक्यू-9बी प्रीडेटर ड्रोन खरीदने के सौदे (India-US Armed Drones deal sealed) को मंजूरी दी है. करीब तीन अरब डॉलर यानी लगभग 24 हजार करोड़ रुपये के इस सौदे में अमेरिका से 31 सबसे घातक और आधुनिक प्रीडेटर ड्रोन भारतीय सेना के बेड़े में शामिल होंगे. रक्षा सौदों की इन खबरों के बीच वरिष्ठ अमेरिकी पत्रकार और जियोपॉलिटिकल एक्सपर्ट फरीद रफीक जकारिया का मानना है कि पड़ोसी देशों की चुनौतियों और बदली वर्तमान परिस्थितियों में भारत को मिलिट्री टेक्नोलॉजी में सबसे आगे होने की जरूरत है.
जियोपॉलिटिकल एक्सपर्ट फरीद रफीक जकारिया का दावा
एक इंटरव्यू में इंडो अमेरिकी पत्रकार और जियोपॉलिटिकल एक्सपर्ट फरीद रफीक जकारिया से जब ये पूछा गया कि से पूछा गया कि क्या भारत हथियार आपूर्तिकर्ता के तौर पर अमेरिका पर भरोसा कर सकता है? इस सवाल के जवाब में उन्होंने कहा, ‘भारत के पास अत्याधुनिक हथियार होने के साथ ही उसे सैन्य तकनीक में सबसे आगे होने की सख्त जरूरत है. लेकिन फिलहाल वो दूसरे दर्जे के रूसी हथियारों का इस्तेमाल कर रहा है. इसलिए भविष्य में रूस की तुलना में अमेरिका भारत के लिए ज्यादा भरोसेमंद साथी साबित हो सकता है.’
रूसी हथियार Vs अमेरिकी हथियार
जकारिया ने मेड इन रसिया हथियारों की तुलना अमेरिकी वेपंस से करते हुए कहा कि खाड़ी युद्ध के दौरान भी अमेरिकी हथियारों का किसी से कोई मुकाबला नहीं था. वो तब भी सर्वश्रेष्ठ थे और आज भी हैं. उन्होंने कहा, ‘जब आप अमेरिकी उपकरणों को रूसी उपकरणों के बराबर रखते हैं तो यह दूसरे नंबर पर भी नहीं आते, बल्कि इनका स्तर चौथे स्थान का होता है.’
यूक्रेन हमले से एक्सपोज हुआ रूस: जकारिया
भारत में वर्तमान में इस्तेमाल हो रहे रूस के हथियारों, एयरक्राफ्ट्स और उपकरणों का जिक्र करते हुए जकारिया ने कहा, ‘अगर आपको रूसी हथियारों और उपकरणों की क्वालिटी और क्षमता के बारे में जानना है तो आपको समझना होगा कि यूक्रेन में क्या कुछ चल रहा है. रूसी बेड़े में मौजूद हर हथियार की क्वालिटी घटने की संभावना है क्योंकि रूस पर लगे कड़े प्रतिबंधों के कारण मास्को जरूरी तकनीक से वंचित है वो कुछ नया नहीं कर पा रहे हैं.’




