राष्ट्रीय पाठ्यचर्या रूपरेखा (NCF) मध्यप्रदेश के अनुकूल हो। प्रदेश की विविधता, भौगोलिक स्थिति, कृषि विशेषता, संस्कृति, इतिहास एवं जनजातीय विरासत आदि का शिक्षा की आवश्यकताओं के अनुरूप एनसीएफ में समावेश हो। यह बात स्कूल शिक्षा (स्वतंत्र प्रभार) एवं सामान्य प्रशासन राज्य मंत्री श्री इन्दर सिंह परमार ने आज माध्यमिक शिक्षा मंडल द्वारा आरसीवीपी नरोन्हा प्रशासन अकादमी भोपाल में आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय पाठ्यचर्या कार्यशाला के शुभारंभ अवसर में कही। श्री परमार ने कहा कि प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था में संस्कार देने की पद्धति विकसित करने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अनुरूप मप्र का दर्शन कराते हुए समृद्ध एनसीएफ निर्धारण करें। श्री परमार ने कहा कि भारतीय शिक्षा दर्शन, भाषा, संस्कृति, विरासत, इतिहास एवं सभ्यता आदि को पुनः स्थापित करना हमारा लक्ष्य हैं। इस लक्ष्य को प्राप्त करने हेतु समग्र परिवर्तन की दृष्टि से समयावधि में एनसीएफ निर्धारण करें। श्री परमार ने राष्ट्रीय पाठ्यचर्या रूपरेखा में अपनी भूमिका देने के लिए सभी शिक्षाविदों को शुभकामनाएँ दी।
उपाध्यक्ष माध्यमिक शिक्षा मंडल डॉ. रमा मिश्रा, सचिव माध्यमिक शिक्षा मंडल श्री श्रीकांत बनोठ, मुख्य वक्ता पंजाब के शिक्षाविद श्री देशराज शर्मा एवं विभिन शिक्षा क्षेत्रों से आए शिक्षाविद् उपस्थित थे। अतिरिक्त सचिव माध्यमिक शिक्षा मंडल सुश्री शीला दाहिमा ने आभार माना।




