मध्य प्रदेश महिला एवं बाल विकास विभाग के प्रमुख सचिव अशोक शाह के स्तनपान वाले बयान पर काफी बवाल मचा था। लेकिन फिर भी एसीएस अशोक शाह अपने बयान पर कायम है। उन्होंने कहा कि आंकड़ों के आधार पर मैंने अपनी बात रखी। उसको एक्सप्लेनेशन की ज़रूरत नहीं है। सर्वे होते हैं, जिन पर ये आंकड़ा होता है। उसको बिना समझे कुछ कहना नहीं चाहिए।
भोपाल में महिला एवं बाल विकास विभाग के प्रोत्साहन एवं उत्प्रेरण कार्यक्रम हुआ। जिसमें अशोक शाह को बोलने का मौका नहीं दिया गया। ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि पिछले बार दिए स्तनपान पर विवादित बयान दे दिया था।
लाड़ली लक्ष्मी योजना 2.0 के शुभारंभ पर शाह ने कहा था कि 2007 में मुख्यमंत्री ने सामाजिक क्रांति का सूत्रपात किया। आज लाड़ली लक्ष्मी के रूप में सामाजिक क्रांति शुरू चुकी है। उन्होंने सवाल करते हुए पूछा कि लेकिन हमारी बालिकाएं पीछे क्यों रह जाती है ? जिसका उत्तर भी उन्होंने ही दिया और बताया कि इसका कारण बालिकाओं को मां का दूध नहीं पिलाया है।
वहीं अगर हम आंकड़ों की बात करें तो स्तनपान करने वाले बच्चों की संख्या में इजाफा हुआ है। 2015-16 में 6 महीने कम के बच्चों के स्तनपान का आंकड़ा 58.2 फीसदी था जो अब 74 फीसदी है। वहीं 3 साल से कम के बच्चों की 34.4 परसेंट थी, अब 41.3 परसेंट है।
इसी कड़ी में अशोक शाह के इस बयान पर पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती ने अपनी नाराजगी जताई थी। उन्होंने लिखा था अगर यह कथन सही छपा है तो यह बेटी विरोधी, माता विरोधी एवं मध्य प्रदेश की मातृशक्ति की छवि खराब करने वाला है। अधिकारियों को अपने बयान के प्रति सचेत एवं जिम्मेवार रहना चाहिए।
उन्होंने आगे लिखा कि अमीर हो या गरीब, बेटा हो या बेटी, बच्चे के जन्मते ही हर माँ अपने बच्चे को दूध पिलाती ही है। लाखों में एक केस में कई कारणों से ऐसा नहीं होता होगा। आखिर सारी महिलाएँ बेटियाँ ही हैं वो ज़िंदा कैसे रह गई।




