पाकिस्तान में एक बार फिर से राजनीतिक उथल-पुथल मचने की संभावना है। इमरान खान की पार्टी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) ने शहबाज शरीफ के नेतृत्व वाले सत्तारूढ़ गठबंधन और सेना के खिलाफ इस्लामाबाद तक एक लंबी मेगा रैली की घोषणा की है। पीटीआई प्रमुख इमरान खान और उनकी पार्टी ने अप्रैल में सत्ता से बेदखल होने के बाद से देश में सैन्य नेतृत्व को खुलेआम लताड़ लगाई है। इसलिए सेना और इमरान खान के बीच अब किसी भी तरह की बातचीत का कोई मौका नहीं बचा है। यही वजह है कि पाकिस्तान के सेना प्रमुख जनरल कमर जावेद ने कई मौकों पर सफाई दी है कि उन्होंने सेना को देश की राजनीति से दूर कर दिया है।इस साल अप्रैल में सत्ता से विवादास्पद बेदखली के बावजूद, इमरान खान पाकिस्तान में सबसे लोकप्रिय राजनेता बने हुए हैं। इसके अलावा, पीटीआई ने हाल ही में देश के विभिन्न हिस्सों में हुए उपचुनावों में जीत हासिल की है, खासकर पंजाब प्रांत में। हालांकि, इमरान खान के लिए पाकिस्तानी सेना पर तीखा हमला करने का एक और बड़ा मुद्दा आजम खान स्वाति की गिरफ्तारी है। आजम खान स्वाति इमरान खान की पार्टी के सांसद हैं। इसके अलावा, इस साल अगस्त में, पीटीआई के वरिष्ठ नेता और इमरान खान के करीबी शाहबाज गिल को एक टीवी शो के दौरान की गई टिप्पणी के लिए देशद्रोह और अन्य आरोपों में गिरफ्तार किया गया था। जनरल बाजवा और अन्य सेना अधिकारियों के लिए इमरान खान बड़ी मुसीबत बने हैं जो अपनी रैलियों में खुलकर उन्हें लताड़ लगा रहे हैं। हालांकि सेना चाहकर भी इमरान खान पर शिकंजा नहीं कस पा रही है। क्योंकि स्थानीय और विदेशी पाकिस्तानियों के बीच इमरान खान की व्यापक लोकप्रियता को देखते हुए खान को निशाना बनाना आसान नहीं है। इमरान खान के समर्थक हर जगह “आजादी मार्च” निकाल रहे हैं। यही नहीं, शहबाज शरीफ सरकार के अधिकारियों और मंत्रियों को विदेश में जाना भी मुश्किल हो रहा है क्योंकि आक्रामक पीटीआई समर्थक उनका हर देश में विरोध कर रहे हैं। पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान ने सोमवार को कहा कि वह संघीय राजधानी में प्रस्तावित अपनी मेगा रैली की तारीख की घोषणा अभी नहीं कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि वह शहबाज शरीफ के नेतृत्व वाली सरकार को मध्यावधि चुनाव कराने तथा नेशनल असेंबली को भंग करने के लिए कुछ और समय दे रहे हैं। पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) के अध्यक्ष खान ने इस महीने की शुरुआत में ‘हकीकी आजादी मार्च’ का आह्वान किया था। उन्होंने रविवार को हुए उपचुनाव में अपनी पार्टी की शानदार जीत के बाद कहा कि वह संघीय सरकार को मध्यावधि चुनाव कराने तथा नेशनल असेंबली को भंग करने के लिए कुछ और समय दे रहे हैं। खान ने कहा, “मैं उन्हें (सरकार) समय दे रहा हूं … और किसी भी समय एक लंबे मार्च की घोषणा करूंगा, जो निश्चित रूप से अक्टूबर में आयोजित किया जाएगा। यह विरोध बहुत अलग होगा और सड़कों पर जनता को नियंत्रित करने में कोई भी सक्षम नहीं होगा।’’ अगर इमरान खान अपनी मेगा रैली निकालते हैं तो संभावना जताई जा रही है कि सेना को उतारा जा सकता है। खान और सुरक्षा प्रतिष्ठान के बीच सीधी झड़प पाकिस्तान में और अधिक राजनीतिक अराजकता पैदा करेगी, जिससे देश की लड़खड़ाती अर्थव्यवस्था पर और बोझ पड़ेगा।




