राजस्थान के सियासी संकट का पटाक्षेप हो गया है। सीएम अशोक गहलोत राजस्थान के मुख्यमंत्री बने रहेंगे। गहलोत कांग्रेस अध्यक्ष पद के लिए नामांकन दाखिल नहीं करेंगे। गहलोत ने अपने निर्णय से सोनिया गांधी को अवगत करा दिया है। ऐसे में गहलोत दिल्ली नहीं जाएंगे। गहलोत के आज दिल्ली जाने की चर्चा थी। लेकिन गहलोत के नामांकन दाखिल करने से इंकार के बाद दिल्ली दौरा टल गया है। अभी तक यही संकेत है कि गहलोत कांग्रेस अध्यक्ष नहीं बनना चाहते हैं। चर्चा है कि विधायक दल की बैठक के बहिष्कार के बाद गहलोत के आलाकमान के रिश्तों को लेकर पहले जैसी बात नहीं रही। इसलिए गहलोत ने अध्यक्ष बनने से इंकार कर दिया है। बताया जा रहा है कि कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं ने सोनिया गांधी को समझाया कि राजस्थान को लेकर ऐसा कुछ नहीं होना चाहिए था। बहुमत की अनदेखी नहीं होनी चाहिए। कुछ नेताओं ने सीएम गहलोत की कल सोनिया गांधी से बात कराई। दोनों नेता जल्द मिल भी सकते हैं, लेकिन कब कोई कुछ नहीं बोल रहा है। अब माना जा रहा है कि राजस्थान कांग्रेस का संकट टल गया है। सोनिया गांधी कांग्रेस पर्यवेक्षकों की रिपोर्ट से संतुष्ट है। अजय माकन और मल्लिकार्जुन द्वारा सौंपी रिपोर्ट से यह साफ हो गया है कि पूरे घटनाक्रम में सीएम गहलोत का कोई हाथ नहीं है। इसलिए राजस्थान से कोई छेड़छाड़ नहीं की जाएगी। गहलोत के करीबी नेताओं का कहना है कि गहलोत का 30 सितंबर तक दिल्ली जाने का कोई कार्यक्रम नहीं है। दो दिन में तय होगा कि कांग्रेस अध्यक्ष पद के लिए कौन नामांकन दाखिल करेगा। कांग्रेस आलाकमान ने गहलोत के करीबी मंत्रियों को नोटिस जारी कर 10 दिन में जवाब मांगा है। संकेत यही बता रहे हैं कि गहलोत ने कांग्रेस अध्यक्ष बनने से इंकार कर दिया है। चर्चा है कि कांग्रेस अध्यक्ष पद के लिए गहलोत का नाम चर्चा में आने के बाद से ही पायलट गुट ने माहौल बिगाड़ना शुरू कर दिया। जबकि ऐसा कुछ नहीं था। एक तरह से गहलोत की पार्टी में दूसरी हैसियत देखने लगी थी। संकेत थे कि अध्यक्ष के साथ वह सीएम भी बने रह सकते हैं या उनका कोई करीबी सीएम बनेगा। गांधी परिवार के भरोसेमंद होने के चलते यह सब ठीक था। अचानक सचिन पायलट का सीएम पद का नाम सामने आने के बाद संकट के समय गहलोत का साथ देने वाले विधायक भड़क गए।




