मध्य प्रदेश में बच्चों के खिलाफ सबसे ज्यादा अपराध दर्ज हो रहें हैं। लगातार दूसरे साल एमपी बच्चों के खिलाफ होने वाले अपराध में पहले स्थान पर है। राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो की रिपोर्ट के अनुसार 2021 में प्रदेश में बच्चों के खिलाफ सबसे अधिक अपराध दर्ज किए गए है। 2021 में बच्चों के खिलाफ अपराध के 19,173 केस दर्ज किए गए है जो कि देश में सबसे अधिक है।
जानकारी के अनुसार यहां साल दर साल बच्चों के खिलाफ अपराधों में लगातार वृद्धि दर्ज की है और पिछले एक दशक (2011-2021) में बच्चों के खिलाफ अपराध में 337% फीसदी की वृद्धि दर्ज की गई है। मध्य प्रदेश में 2011 में कुल मामलों की संख्या 4,383 थी जो 2021 में 19,173 हो गई है।
बता दें कि 2021 में बच्चों के खिलाफ अपराध के 19,173 केस दर्ज किए गए है जो कि देश में सबसे अधिक है। रिपोर्ट के अनुसार प्रदेश में बच्चों के खिलाफ अपराध के हर दिन 52 से अधिक मामले दर्ज होते है जोकि देश में सबसे अधिक है। इतना ही नहीं राज्य में पिछले वर्ष की तुलना में बच्चों के खिलाफ अपराधों की संख्या में 11.3% की वृद्धि देखी गई।
2021 में बच्चों के अपहरण के मामले में 9,137 के दर्ज किए गए है जोकि देश में दूसरी सबसे अधिक संख्या है। बच्चों के अपहरण के मामले में एमपी का औसत राष्ट्रीय औसत से दोगुना है। वहीं 2020 के तुलना में 6.2 फीसदी वृद्धि दर्ज की गई है। वहीं राज्य में बच्चों के खिलाफ कुल अपराध के मामले में 31.7 फीसदी मामले पॉक्सो एक्ट के तहत दर्ज किए गए है।
एनसीआरबी की रिपोर्ट के अनुसार मध्य प्रदेश में औसतन हर तीन घंटे में एक मासूम बच्ची के साथ दुष्कर्म की घटना हो रही है। 2021 में प्रदेश में बच्चियों के साथ रेप के 3515 मामले दर्ज हुए। जबकि देश में यह आंकड़ा 33036 हैं।
वहीं बच्चियों से रेप के मामले सबसे अधिक होने पर महिला अपराध शाखा की एक अधिकारी ने बताया कि 2021 में 3512 केस में से 2499 लापता से जुड़े केस थे जिनमें रेप की धारा बढ़ाई गई। और प्रदेश में ऑपरेशन मुस्कान चलाकर लापता बच्चियों की खोज की गई। जिसके बाद खुलासा हुआ कि आपसी सहमति, प्रेम प्रसंग, घर से नाराज होकर जाने की बात सामने आई। अधिकांश मामलों में पीड़िता अपने बयान से मुकर चुकी है और कोर्ट में सहमति से संबंध बनाने की बात को स्वीकार किया है।




