Thursday, April 23, 2026
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क्षीर धारा अभियान का मुख्य उद्देश्य पशुपालकों की आय में वृद्धि और गोवंश का स्वास्थ्य सुरक्षित रखना है : मंत्री श्री पटेल

नरसिंहपुर के ग्राम बरमान कला, गुटोरी का किया भ्रमण
ग्राम ब्रम्हनी में श्री मां मैकलसुता गो सेवा संस्था द्वारा संचालित गोशाला किया निरीक्षण
अधिकारियों को दिए आवश्यक दिशा निर्देश

पशुपालन एवं डेयरी विभाग राज्यमंत्री स्वतंत्र प्रभार श्री लखन पटेल ने नरसिंहपुर जिले की तहसील तेंदूखेड़ा अंतर्गत ग्राम ब्रम्हनी में श्री मां मैकलसुता गौ सेवा संस्था द्वारा संचालित गोशाला का निरीक्षण एवं ग्राम बरमान कला और गुटोरी का भ्रमण किया। उन्होंने दोनों गांवों में विभाग द्वारा चलाए जा रहे क्षीर धारा अभियान का जायजा लिया और आवश्यक दिशा निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि क्षीर धारा अभियान का मुख्य उद्देश्य पशुपालकों की आय में वृद्धि करना और गोवंश का स्वास्थ्य सुरक्षित रखना है।

राज्यमंत्री श्री पटेल ने भ्रमण के दौरान नरसिंहपुर जिले के विकासखंड करेली के ग्राम बरमान कला और गुटोरी पहुंचे। बरमान कला में वर्तमान में लगभग 1500 गोवंश एवं भैंसवंश का एफएमडी (खुरपका-मुंहपका) टीकाकरण और शत-प्रतिशत टैगिंग कार्य किया जा रहा है, जिसके बारे में जानकारी प्राप्त की। ग्राम गुटोरी में आयोजित विशेष शिविर में अंतर्विभागीय समन्वय के माध्यम से योजना को सफल बनाने के निर्देश दिए। विशेष शिविर के दौरान अब तक 15 पशुओं का टीकाकरण, 2 पशुओं का सफल बधियाकरण, आचार्य विद्यासागर गौ संवर्धन योजना के तहत 1 डेयरी इकाई की स्थापना के साथ ही 22 पशुपालकों को नि:शुल्क दवाओं का वितरण किया गया। इस तरह से शिविर के माध्यम से 40 से अधिक हितग्राहियों लाभ उठाया।

राज्यमंत्री श्री पटेल ने तहसील तेंदूखेड़ा के ग्राम ब्रम्हनी में श्री मां मैकलसुता गो सेवा संस्था द्वारा संचालित गोशाला पहुंचे। यहाँ पर गोशाला की व्यवस्था देख प्रशंन्नता जाहिर की। वर्तमान में गोशाला में 340 गो-माताओं का संरक्षण किया जा रहा है। नस्ल सुधार कार्यक्रम अंतर्गत गिर नस्ल के सांड से प्राकृतिक गर्भाधान के साथ कृत्रिम गर्भाधान कार्य एवं टीकाकरण कार्यक्रम गोशाला में चलाया जा रहा।

गोशालाओं को स्वावलंबी बनाने की दिशा में करें कार्य

राज्यमंत्री श्री पटेल ने भ्रमण के दौरान गोशालाओं में गोवंश को श्रेणीवार रखने, नस्ल सुधार पर विशेष ध्यान देने, गोशालाओं को आत्मनिर्भर बनाने, गोशालाओं को केवल सरकारी अनुदान पर निर्भर न रहकर आय के नए स्रोत (जैसे गो-उत्पाद) विकसित करने के लिए प्रेरित करने, शासन द्वारा प्रति गौमाता ₹40 की राशि पोषण के लिए प्रदान की जा रही है, जिसका सदुपयोग सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। इस दौरान स्थानीय जनप्रतिनिधि और विभागीय अधिकारी उपस्थित रहे।

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