इंदौर(Indore News)। इंदौर शहर के न्याय नगर की कृष्णबाग कॉलोनी में बरसते पानी में 0.72 हेक्टेयर भूमि पर बने 71 मकान हटाने पहुंचे अमले को भारी विरोध का सामना करना पड़ा। अमले के पहुंचने से पहले सैकड़ों महिलाएं और बच्चे गली के मुहानों पर खड़े हो गए और कार्रवाई का विरोध करने लगे।आंखों में आंसू लिए महिलाएं बारिश के चलते आशियाना नहीं तोड़ने की गुहार लगाती रहीं, लेकिन प्रशासन के अधिकारी न्यायालय का हवाला देकर कार्रवाई पर अड़े रहे। भारी मशक्कत के बाद महिलाओं को हटाकर गलियों में जेसीबी पहुंची और अतिक्रमण की कार्रवाई शुरू हुई। लोग बिलखते रहे, कई जेसीबी के सामने लेट गए, तो ऊपर भी चढ़ गए।पुलिस ने उन्हें हटाकर कार्रवाई शुरू की। इस दौरान कई लोगों की तबीयत भी बिगड़ी, जिन्हें अस्पताल पहुंचाया गया। मकान टूटते देख लोगों ने पथराव भी किया। 15 मकान तोड़ने के बाद विरोध को देखते हुए कार्रवाई को रोक दिया गया।
टैक्स भी दे रहे थे रहवासी
करीब 17 साल पहले लोगों ने कॉलोनी में भूखंड खरीदकर मकान बनाए। रजिस्ट्री के बाद सभी तरह के टैक्स भी दे रहे हैं। खजराना ग्राम में आने वाली इस जमीन का फैसला न्यायालय ने श्रीराम बिल्डर के पक्ष में दिया है। इसके बाद शुक्रवार को प्रशासन यहां अतिक्रमण हटाने पहुंचा था।
रहवासी अपने घरों को टूटते देख आपा खो बैठे, आंखों में आंसू लिए अधिकारियों से मिन्नतें करते रहे। मकान से सामान निकालने की मोहलत मांगते रहे। भारी विरोध और मिन्नतें देखकर निर्माणाधीन मकानों को हटाने पर सहमति बनी।
रहवासियों ने छह अगस्त तक की मोहलत मांगी है। जूनी इंदौर एसडीएम घनश्याम धनगर का कहना है कि 15 मकानों पर कार्रवाई की गई है। वर्षा के चलते कार्रवाई रोकी है। आगे की कार्रवाई की तारीख जल्द तय होगी।
रिमूवल कर्मचारियों ने चलाए लठ्ठ
कार्रवाई के दौरान रहवासियों ने जेसीबी पर पत्थर बरसा दिए। निगम सुपरवाइजर सन्नी पांडे के सिर पर एक पत्थर लग गया। रिमूवल कर्मचारियों ने उक्त युवक को पकड़ लिया और लट्ठ बरसाने लगे। पुलिस की अपेक्षा निगम के कर्मचारियों द्वारा लट्ठ चलाने से महिलाएं और लोग उत्तेजित हो गए। युवक को थाने ले जाने के दौरान महिलाएं एकत्र हो गईं और हंगामा कर विरोध किया। पुलिस ने पत्थर चलाने वाले रवि सालवे और अन्य पर बलवे की कार्रवाई की है।
स्टे वाले मकान भी तोड़े
प्रशासनिक अधिकारियों ने कार्रवाई से पहले स्टे वाले मकानों पर एस निशान लगा दिए थे। ताकि कार्रवाई के दौरान इन पर बुलडोजर न चले। सर्तकता भी बरती गई, बावजूद कुछ मकान स्टे वाले तोड़ दिए। अधिकारियों का कहना था कि सुप्रीम कोर्ट की डबल बैच ने मकान तोड़ने का निर्णय दिया है। जबकि सिंगल बैच से स्टे है। ऐसे में स्टे का औचित्य खत्म हो जाता है। रहवासी भी एस वाले मकानों में सामान रखते रहे।
कर्ज लेकर मकान बनाए, अब कहां जाएंगे
भारी-भरकम अमले के साथ पहुंचे अधिकारियों को गली के मुहाने पर ही महिलाओं के विरोध का सामना करना पड़ा। महिलाएं सभी दस्तावेज होने का हवाला देकर विरोध करती रहीं। रोते हुए अधिकारियों से गुहार लगा रही थीं कि कर्ज लेकर मकान बनाए हैं।
वर्षों पहले मकान बनाने के दौरान कोई अधिकारी और जमीन मालिक काम रोकने नहीं आया। कर्ज लेकर मकान बनाने के बाद कार्रवाई की जा रही है। मध्यमवर्गीय परिवार कहां जाएंगे।
कार्रवाई के डर से रातभर नहीं सोए
रहवासियों को गुरुवार रात में ही जानकारी मिल गई थी कि शुक्रवार सुबह कार्रवाई होगी। आशियाना टूटने के भय से रहवासी पूरी रात नहीं सो पाए। पुरुषों के साथ ही महिलाओं और बच्चों ने भी रतजगा किया। कई ने खाना तक नहीं खाया। कई घरों में रात का चूल्हा भी नहीं जला। रहवासी नवल चौहान और गौरी कुशवाह का कहना था कि जमीन-जायदाद बेचकर शहर में जमीन खरीदी थी। पता नहीं था कि ऐसा होगा।




