Thursday, May 7, 2026
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SC का बड़ा फैसला, ‘चुनावी बांड योजना असंवैधानिक, तत्काल प्रभाव से रोक

नई दिल्ली। चुनावी बांड (Electoral bond) की संवैधानिक वैधता पर सुप्रीम कोर्ट ने अपना बड़ा फैसला सुना दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने सरकार की तमाम दलीलें खारिज करते हुए चुनावी बांड को असंवैधानिक करार दिया और तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी। अब एसबीआई (जिसके जरिए चुनावी बांड जारी होते थे) को 6 मार्च तक चुनाव आयोग को बताना है कि किस पार्टी को चुनावी बांड से कितना चंदा मिला। और चुनाव आयोग 13 मार्च तक अपनी वेबसाइट पर इसे प्रकाशित करना होगा।

सुप्रीम कोर्ट के फैसले की बड़ी बातें

अपने फैसले में सर्वोच्च अदालत ने कहा कि बड़े चंदे को गोपनीय रखना असंवैधानिक है। यह सूचना के अधिकार का हनन है। इसके लिए कंपनी एक्ट और आईटी एक्ट में किए गए बदलाव भी असंवैधानिक हैं।

छोटे चंदे की बात करना उचित नहीं है, लेकिन बड़ी राजनीतिक फंडिंग की जानकारी होना जरूरी है। हर चंदा हित साधने के लिए नहीं है।

किसी व्यक्ति का राजनीतिक झुकाव उनकी निजता का अधिकार है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि बड़े चंदे की जानकारी को छुपाया जा सके।

राजनीतिक दलों पर ऐसे होगा असर

अब पार्टियों को बेनामी चंदा नहीं मिल सकेगा। उन्हें बताना होगा कि किस शख्स या कंपनी ने कितना चंदा दिया।

अब सत्ता पक्ष गोपनीय रूप से चंदा लेकर किसी व्यक्ति या कंपनी विशेष को फायदा नहीं पहुंचा सकेगी।

इससे पहले तीन दिनों तक मामले की सुनवाई के बाद पिछले साल 2 नवंबर को सुप्रीम कोर्ट की संविधान पीठ ने फैसला सुरक्षित रख लिया था। लोकसभा चुनाव से ठीक पहले सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला अहम है।

Electoral Bond: याचिकाकर्ता की दलील

चुनावी बांड से जुड़ी राजनीतिक फंडिग पारदर्शिता को प्रभावित करती है और मतदाताओं के सूचना के अधिकार का उल्लंघन करती है।

इस योजना में शेल कंपनियों के माध्यम से योगदान करने की अनुमति दी गई है।

Electoral Bond: सरकार का पक्ष

धन का उपयोग उचित बैंकिंग चैनलों के माध्यम से राजनीतिक वित्तपोषण के लिए किया जा रहा है।

दानदाताओं की पहचान गोपनीय रखना जरूरी है, ताकि उन्हें राजनीतिक दलों से किसी प्रतिशोध का सामना न करना पड़े।

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