Wednesday, April 29, 2026
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राजस्थान में बीजेपी-कांग्रेस की टेंशन बढ़ाएगी ये नई पार्टी, कई राज्यों से आए हजारों समर्थक

Rajasthan Assembly Election 2023: राजस्थान में विधानसभा चुनाव में अब कुछ ही समय रह गया है. बीजेपी और कांग्रेस अपनी सरकार बनाने के लिए वोटर्स को हर तरह से रिझाने का प्रयास कर रहे हैं. इस बीच एक नई पार्टी ने इन दोनों प्रमुख दलों की चिंता बढ़ा दी है. दरअसल, यहां हजारों लोगों की भीड़ के बीच एक नई पार्टी घोषणा हो गई है. इसके लॉन्चिंग डे पर बड़ी सभा का आयोजन किया गया, जिसमें राजस्थान ही नहीं, मध्य प्रदेश और गुजरात से भी लोग आए. क्योंकि इस पार्टी का असर इन राज्यों में भी होगा.

बीजेपी और कांग्रेस के लिए क्यों चुनौती
उदयपुर संभाग के आदिवासी क्षेत्र में बनी इस नई पार्टी का नाम भारतीय आदिवासी पार्टी है. वहीं बीजेपी और कांग्रेस, दोनों ही पिछले कई माह से उदयपुर संभाग के आदिवासी क्षेत्र में दौरे कर रही थी. पीएम नरेंद्र मोदी, गृहमंत्री अमित शाह, कांग्रेस नेता राहुल गांधी यहां बड़ी सभा कर चुके हैं. यही नहीं राजस्थान में दोनो पार्टियों के शीर्ष नेता सीएम अशोक गहलोत, पूर्व सीएम वसुंधरा राजे भी लगातार दौरे का रहे हैं. क्योंकि यहां मेवाड़-वागड़ में 16 एसटी आरक्षित विधानसभा सीटें हैं. इन सीटों पर आदिवासियों का बड़ा वर्चस्व है. अब जो पार्टी बनी है यह उन्हीं में से कुछ नेताओं ने बनाई है. ऐसे में बीजेपी और कांग्रेस के लिए यह चुनौती भी है और चिंता का विषय भी.

ये है पार्टी का नाम
राजस्थान का एक मात्र सबसे बड़ा आदिवासी क्षेत्र ने उदयपुर संभाग में. इसमें पिछले विधानसभा चुनाव में गुजरता के भारतीय ट्राइबल पार्टी (बीटीपी) के दो विधायक यहां से जीते हैं. आदिवासी क्षेत्र में आदिवासी समाज संगठन बना है. इसके बैनर तले एक पार्टी बनाई गई है.इस पार्टी का नेतृत्व मुख्य रूप से राजकुमार रोत कर रहे हैं, जो बीटीपी से विधायक हैं. चौरासी विधानसभा से राजकुमार विधायक है और यहीं से इस पार्टी की शुरुआत हुई है. साथ ही सागवाड़ा विधानसभा से विधायक रामप्रसाद डिंडोर ने नेतृत्व कर रहे हैं. इसको लेकर सभा भी हुई जिसमें हजारों की संख्या में लोग पहुंचे.

‘बीटीपी दूसरी बार टिकट नहीं देती, इसलिए दोनों ने बनाई पार्टी’
इधर, बीटीपी के प्रदेशाध्यक्ष वेलेराम घोघरा ने मीडिया से बातचीत करते हुए बताया कि सोशल निर्णय था कि एक व्यक्ति को एक बार ही टिकट दिया जाएगा. दोनो विधायकों को लगा कि इस बारे टिकता नहीं मिलने वाला है, इसलिए नई पार्टी बना ली. इसका जवाब क्षेत्र की जनता जरूर देगी. बीटीपी इस बारे फिर से चुनावी मैदान ने उतरेगी. टिकट का वितरण आगले माह से शुरू हो जाएगा. इधर बीएपी भी द्वारा कर चुकी है कि सभी आरक्षित सीटों पर उम्मीदवार उतारेगी

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