Monday, April 27, 2026
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यूनिपोल घोटाले में बोले मेयर- साइज बढ़ाने वाले एजेंसियों पर एमआइसी का शिंकजा, वसूलेंगे पेनाल्टी

रायपुर। रायपुर नगर निगम में हुए 50 करोड़ के यूनिपोल घोटाला उजागर करने वाले महापौर एजाज ढेबर ने कहा है कि एमआइसी ने विज्ञापन की नई पालिसी बनाने का फैसला लिया है। जिन एड एजेंसियों ने साइज से अधिक होर्डिंग, यूनिपोल लगाकर निगम के राजस्व को नुकसान पहुंचाया है, उसे पहले तो निर्धारित साइज में कराया जायेगा। उसके बाद नुकसान हुए राजस्व की गणना कर पेनाल्टी ठोंककर सख्ती से राशि की वसूली की जायेगी।शहर के विभिन्न चौक-चौराहे, मार्गों पर बेतरतीत ढंग से लगे दैत्यकार यूनिपोल, होर्डिंग के कारण हमेशा हादसे का खतरा बना रहता है। किसी की जान खतरे में न रहे इसे ध्यान में रखकर जल्द ही ऐसे यूनिपोल, होर्डिंग बो

हटाए जाएंगे जानलेवा दैत्यकार यूनिपोल, विज्ञापन की नई पालिसी होगी तैयार-महापौर ढेबर

दरअसल, महापौर एजाज ढेबर पत्रकारों से चर्चा कर रहे थे। उन्होंने बताया कि एमआइसी की बैठक में एक घंटे तक विज्ञापन की नई पालिसी पर सदस्यों के साथ चर्चा की गई हैं। देखने में आया है कि मुख्य बाजार, सड़क की दुकानों पर विभिन्न कंपनियों के होर्डिंग, ग्लो साइन बोर्ड लगे हुए है। ऐसे बोर्ड को नई विज्ञापन पालिसी के दायरे में लिया जाएगा। शहर में लगे कई यूनिपोल की निर्धारित साइज 15 बाई नौ की अनुमति निगम से ली गई लेकिन एड एजेंसियों ने मनमाने तरीके से साइज को 15 बाई 18 कर लिया। बढ़ाए गए साइज को हमने यथावत करने के निर्देश अधिकारियों को दिए है।एमआइसी सदस्य श्रीकुमार मेनन और सहायक अभियंता निशिकांत वर्मा इसकी मानिटरिंग करेंगे।

र्ड को चिंहाकिंत कर हटाने की कार्रवाई शुरू करेंगे। यहीं नहीं चौक-चौराहे पर लगे मोबाइल यूनिट को भी हटाएंगे।

चिट्ठी से फूटा घोटाला

महापौर एजाज ढेबर ने बताया कि एक चिट्ठी से यूनिपोल घोटाला उजागर हुआ।यह चिट्ठी लाभचंद जैन ने 23 जनवरी 2023 को मुझे लिखी थी।इस चिट्ठी को महापौर ने मीडिया के सामने सार्वजिनक किया।चिट्ठी में लिखा है कि मै अापका ध्यान निगम के अधिकारियों द्वारा किए जा रहे बहुत बड़े होर्डिंग विज्ञापन घपले पर दिलाना चाहता हूं।मैं पिछले 15 वर्षों से नगर निगम में विज्ञापन के कार्य से जुड़ा हूं। हम लोगों को हमेशा कार्य मिलता रहता था लेकिन पिछले चार-पांच साल से केवल पांच से सात एड एजेंसियों के दवाब में नगर निगम कार्य दे रहा है।यहां के कुछ अधिकारी इन बड़ी एजेंसियों की मदद करते है।आज केवल एएसएस,राघव,व्यापक,ग्रेसफुल,देशकर इन्ही एजेंसियों को अधिकारी मिलीभगत कर टेंडर दे रहे है और हमसे राय भी नहीं ली जाती।पत्र में आगे बताया गया कि वर्ष 2017 से 2018 के बीच जब प्रमोद दुबे महापौर थे,तब से यह खेल शुरू हुआ है।

रेट बढ़ाकर बड़े एजेंसियों को दिलाया काम

पत्र में लाभचंद जैन मे आगे लिखा है कि निगम के अधिकारी टेेंडर का रेट बढ़ाकर छोटे एड एजेंसियों को बाहर कर देते थे।बस स्टाप वाले टेंडर में एएसए को मनमुताबिक रेट और कम पैसे में करोड़ों का काम दे दिया गया जबकि कई एजेंसियां वहीं काम कर सकते थे।मेंट्री पोल में कोर्ट से स्टे लेकर भी एएसए को भाजपा नेता विनोद अग्रवाल अभी तक टेंडर लेते आ रहे है।यह सब अधिकारियों की मिलीभगत से हो रहा है।कोई कोर्ट से स्टे लेकर कैसे करोड़ों का काम ले सकता है? यहीं नही विनोद अग्रवाल के कई टेंडर फर्जी कंपनियों के नाम से मिले है।इसकी जांच कराकर टेंडर रद करे ताकि नए टेंडर में सभी को काम करने का मौका मिल सके।

बिना टेंडर दे दिया काम

पत्र में आरोप लगाया गया है कि यूनिपोल लगाने का टेंडर ग्रेसफुल एजेंसी को बिना टेंडर दे दिया जाता है।इससे निगम को 25 करोड़ का नुकसान हुआ है।ये लोग विपक्ष से जुड़े है।उसके बाद भी उन्हें यूनिपोल और सुलभ शौचालय के उपर होर्डिंग लगाने का काम दिया जा रहा है।वर्तमान में एएसए,राघव, ग्रेसफुल आदि बड़़ी एड कंपनियों पर निगम का करोड़ों रूपये बकाया है,फिर भी उन्हीं को काम दिया जा रहा है।जबकि कोरोना काल में छोटी एजेंसियों ने अपने शुल्क माफ करने के लिए पत्र लिखा था जिस पर ध्यान नहीं दिया गया उल्टे काम देना बंद कर दिया गया।यूनिपोल के काम,बस स्टापेज और स्मार्ट टायलेट का टेंडर पुन: करने से निगम को 25 से 50 करोड़ की अतिरिक्त आमदनी होगी।

शहर में कितने होर्डिंग? निगम के पास संख्यां नहीं

नगर निगम क्षेत्र की सड़कों के अलावा छोटी-बड़ी बिल्डिंगों की छतों पर कितने विज्ञापन होर्डिंग लगे है,इसकी संख्यां नगर निगम के जिम्मेदार अधिकारियों के पास नहीं है।जबकि जानकारों का कहना है कि दस हजार से अधिक विज्ञापन होर्डिंग छतों पर लगे हुए है।इनमें से अधिकांश 15 साल पुराने हो चुके है। इनमें अधिकांश के स्ट्रक्चर में जंग तक लग चुके है और एंगल टूटे-फूटे है।तेज हवा या आंधी चलने से ये कभी भी जमीन पर धराशाही होकर बड़े हादसे को जन्म दे सकते है।

यहां लगे है बेतरतीत यूनिपोल, होर्डिंग

शहर के शास्त्री चौक, कलेक्टोरेट चौक, रेरा आफिस से लगे स्थान, आंबेडकर अस्पताल चौक, शारदा चौक, देवेंद्रनगर चौक, रेलवे स्टेशन रोड, एसआरपी चौक, गांधी उद्यान, एनआइटी के सामने, तेलीबांधा तालाब मरीन ड्राइव के सामने आदि स्थानों पर बेतरतीत ढंग से एड एजेंसियों ने नियमों के विपरित साइज बढ़ाकर यूनिपोल और होर्डिंग तानकर खड़ा कर दिया है।

नईदुनिया ने किया था राजफाश

नईदुनिया ने जून 2022 में अभियान चलाकर शहर में लगे यूनिपोल की पोल खोल की थी। लगातार खबरे प्रकाशित कर नियमों के विपरीत सड़कों पर मनमाने तरीके से लगाए गए यूनिपोल को लेकर निगम प्रशासन को सर्तक किया था लेकिन अधिकारियों के साथ जनप्रतिनिधियों ने ध्यान नहीं दिया। उनकी अनदेखी से एड एजेंसियों की मनमानी जारी रही। इससे निगम को करोड़ों का राजस्व नुकसान हुआ है।

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