ज्येष्ठ पूर्णिमा पर रविवार को इस्कान मंदिर में मनाए गए स्नान यात्रा महोत्सव में दस हजार से अधिक श्रद्धालुओं ने भगवान जगन्नाथ को स्नान कराया। उच्च शिक्षा मंत्री डा.मोहन यादव, महामंडलेश्वर सुमनानंद गिरि, संत डा. अवधेशपुरीजी तथा कलेक्टर कुमार पुरुषोत्तम सपत्नीक भगवान का अभिषेक करने पहुंचे।
स्नान यात्रा महोत्सव को लेकर भक्तों में अपार उत्साह नजर आ रहा था। स्थानीय के साथ ही आसपास के शहरों से भक्त सुबह छह बजे से मंदिर पहुंचने लगे थे। सुबह 7:25 बजे दर्शन आरती व गुरु पूजा हुई। इसके बाद सुबह आठ बजे पूज्य भक्ति प्रेम स्वामीजी महाराज ने भक्तों को जगन्नाथ कथा सुनाई।
इसके बाद सुबह 8:50 बजे भगवान को स्नान कराने की मंगलवेला आई। हर्षित भक्त मंदिर से भगवान की काष्ठ प्रतिमा को हाथों में झुलाते हुए परिसर में बनाए गए विशेष मंच तक लेकर आए और प्रतिष्ठा की। मंदिर की पूजन परंपरा में इस धर्मविधि को पांडू विजय कहा जाता है।
भगवान जगन्नाथ, सुभद्रा व बलदेवजी की मूर्ति प्रतिष्ठा के बाद स्नान का सिलसिला शुरू हुआ। भगवान को फलों के रस तथा विभिन्न तीर्थों से मंगवाए गए जल से स्नान कराया गया। पीआरओ राघव पंडित दास ने बताया कि इस्कान की स्नान यात्रा सामाजिक समरसता का अनुपम उदाहरण है। यहां भक्त बिना किसी भेदभाव, ऊंच-नीच, जात पात के भगवान को अपने हाथ से स्नान कराते हैं।
भगवान को सर्दी लगी, एक सप्ताह एकांतवास करेंगे
शीतल जल से स्नान कराने के कारण भगवान जगन्नाथ बीमार हो गए हैं। अगले एक पखवाड़े तक पुजारी आयुर्वेदिक औषधियों से भगवान का एकांत में उपचार करेंगे। इस दौरान नियमित पूजा-अर्चना व आरती होगी, लेकिन भक्तों को भगवान के दर्शन नहीं होंगे। 20 जून को जगन्नाथ रथ यात्रा के दिन भगवान स्वस्थ होकर भक्तों को दर्शन देने निकलेंगे।
साल में एक बार गजवेश रूप में दिए दर्शनज्येष्ठ पूर्णिमा पर भक्तों को भगवान जगन्नाथ के गजवेष रूप में दर्शन हुए। साल में एक बार इसी दिन जगन्नाथ का भगवान गणेश के रूप में शृंगार किया जाता है।