ऑनलाइन पोर्टल पर उपलब्ध होंगे छतवई के कालीन और गोंडी पेंटिंग
भोपाल : बुधवार, मई 20, 2026,
कुटीर एवं ग्रामोद्योग राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री दिलीप जायसवाल ने कहा है कि शहडोल जिले के छतवई स्थित संत रविदास हस्तशिल्प एवं हथकरघा विकास निगम केंद्र को पुनः सक्रिय कर स्थानीय कारीगरों और महिलाओं को रोजगार से जोड़ा जा रहा है।
राज्यमंत्री श्री जायसवाल ने कहा कि मार्च 2026 में छतवई में प्रशिक्षण केंद्र का शुभारंभ हुआ था। अब यहां कालीन बुनाई, गोंडी पेंटिंग और मूर्तिकला की ट्रेनिंग नियमित रूप से चल रही है। शहडोल के पारंपरिक शिल्प को संरक्षित कर उसे बाजार और तकनीक से जोड़ा जा रहा है।
ट्रेनिंग और उत्पादन शुरू
डीएमएफ मद 2024-25 के तहत फंड मिलने के बाद छतवई केंद्र में ट्रेनिंग बैच शुरू हो चुके हैं। आसपास के 2-3 गांवों की महिलाएं और बुनकर नियमित रूप से कालीन और गोंडी पेंटिंग का काम कर रही हैं। तैयार उत्पाद बांधवगढ़ स्थित सेल काउंटर पर बिक्री के लिए उपलब्ध हैं।
ऑनलाइन बिक्री के लिए पोर्टल की घोषणा
कुटीर एवं ग्रामोद्योग विभाग शहडोल के हस्तशिल्प और हथकरघा उत्पादों की बिक्री के लिए ऑनलाइन पोर्टल तैयार करेगा। इस पर छतवई में बने कालीन, गोंडी पेंटिंग, मूर्तियां और अन्य उत्पादों की जानकारी और मूल्य प्रदर्शित होंगे, ताकि उत्पाद देश-विदेश तक पहुंच सकें। साथ ही राज्य स्तर पर मुख्यमंत्री द्वारा लॉन्च किया गया “मृगनयनी” ई-कॉमर्स पोर्टल भी मध्यप्रदेश के शिल्पियों को ग्लोबल बाजार से जोड़ेगा।
शिल्पकारों को मिलेगा स्थायी रोजगार
छतवई का केंद्र 1989 में स्थापित हुआ था और 2006 तक सक्रिय रूप से काम करता रहा। 2006 के बाद कुछ समय तक गतिविधियों की गति धीमी रही, लेकिन अब डीएमएफ योजना 2024-25 के तहत पुनः फंड मिलने से केंद्र ने नई गति पकड़ी है। यहां तैयार कालीन पहले मलेशिया तक भेजी जा चुकी है और मध्यप्रदेश विधानसभा में भी लगाई गई हैं।
राज्यमंत्री श्री जायसवाल ने कहा कि “महिलाओं का हुनर ही आत्मनिर्भर मध्यप्रदेश की नींव है। ऑनलाइन प्लेटफॉर्म शुरू होने के बाद हमारे कारीगरों को निरंतर काम मिलेगा, आय बढ़ेगी और शहडोल की पहचान देशभर में बनेगी। उन्होंने विभाग को निर्देश दिए हैं कि पोर्टल का काम शीघ्रता से पूरा किया जाए।




