Tuesday, May 12, 2026
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14 उत्पादन, 18 विक्रय केन्द्रों के सशक्त नेटवर्क से ग्राम स्वराज का स्वप्न हो रहा साकार : राज्यमंत्री श्री जायसवाल

ग्वालियर में कंबल-खादी-तेलघानी, महेश्वर में रेशम केन्द्र बने पहचान

कुटीर एवं ग्रामोद्योग राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री दिलीप जायसवाल ने कहा है कि म.प्र. खादी तथा ग्रामोद्योग बोर्ड ने प्रदेशभर में खादी एवं ग्रामोद्योग का मजबूत नेटवर्क खड़ा किया है। महात्मा गाँधी के ग्राम स्वराज के विचार से प्रेरित होकर, मंडल खादी को सतत आजीविका और ग्रामीण सशक्तिकरण का माध्यम बना रहा है।

भोपाल से देश-दुनिया तक पहुंच रही म.प्र. की खादी

राज्यमंत्री श्री जायसवाल ने बताया कि प्रदेश में 14 उत्पादन केन्द्र और 18 विक्रय केन्द्र संचालित हैं। पिछले कई दशकों में बोर्ड ने अनेक योजनाओं और कार्यक्रमों के माध्यम से रोज़गार सृजन, ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मज़बूती देने तथा भारतीय परंपरागत शिल्प और कारीगरी को संरक्षित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

उत्पादन केन्द्रों से जिलों को मिली विशेष पहचान

राज्यमंत्री श्री जायसवाल ने कहा कि बोर्ड ने हर जिले को उसकी विशेषता के अनुसार उत्पादन केन्द्र दिए हैं। ग्वालियर में कंबल, खादी और तेलघानी के तीन अलग केन्द्र हैं। मंदसौर, छिंदवाड़ा, टीकमगढ़ में कंबल उत्पादन केन्द्र हैं। बैतूल, खरगौन, इंदौर में खादी उत्पादन केन्द्र कार्यरत हैं। महेश्वर अपने रेशम केन्द्र के लिए जाना जा रहा है। टीकमगढ़, उज्जैन, देवास में पॉलिवस्त्र उत्पादन केन्द्र तथा इंदौर में चर्म शिवण केन्द्र संचालित है।

18 एम्पोरियम से आमजन तक पहुंच रहे उत्पाद

राज्यमंत्री श्री जायसवाल ने बताया कि उत्पादों के विक्रय के लिए इंदौर, खरगौन, उज्जैन, देवास, नीमच, जबलपुर, ग्वालियर, रीवा, सागर, मुरैना, शहडोल और पचमढ़ी में खादी ग्रामोद्योग एम्पोरियम हैं।

राजधानी में 6 स्थानों पर मिल रहे खादी उत्पाद

राज्यमंत्री श्री जायसवाल ने कहा कि राजधानी भोपाल में खादी प्रेमियों के लिए 6 स्थानों पर खादी उत्पाद उपलब्ध हैं। एम.पी. नगर, मालवीय नगर और जवाहर चौक में खादी ग्रामोद्योग एम्पोरियम, गोविंदपुरा में केन्द्रीय खादी वस्त्रागार तथा सतपुड़ा भवन और विंध्याचल भवन में खादी/विन्ध्यावैली काउंटर संचालित हैं।

राज्यमंत्री श्री जायसवाल ने कहा कि ग्रामीण कारीगरों को आधुनिक बाज़ार और अन्तर्राज्यीय मंच से जोड़कर यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि खादी और ग्रामोद्योग परंपरा के साथ-साथ प्रगतिशील भी बने रहें। “अपना हाथ – अपना साथ” और “स्थानीय से वैश्विक” मंत्र के साथ “विन्ध्या वैली” और “कबीरा” नाम से खादी, मसाले, साबुन, जड़ी-बूटी उत्पाद एवं हस्त निर्मित वस्तुएं वैश्विक बाजार तक पहुंच रही हैं। म.प्र. खादी तथा ग्रामोद्योग मंडल आत्मनिर्भर मध्यप्रदेश और आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य की दिशा में परंपरा और आधुनिकता के बीच सेतु का कार्य कर रहा है।

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