Tuesday, March 31, 2026
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टैक्स सिस्टम को सरल और पारदर्शी बनाने पर जोर

नई दिल्ली। नए वित्त वर्ष 2027 की शुरुआत के साथ ही 1 अप्रैल 2026 से देश का आयकर ढांचा बड़े बदलावों के दौर में प्रवेश करने जा रहा है। नया आयकर अधिनियम, 2025 लागू होगा, जो करीब छह दशक पुराने 1961 के कानून की जगह लेगा। इस नए कानून के तहत टैक्स सिस्टम, प्रक्रियाओं और नियमों में कई अहम बदलाव किए गए हैं। सबसे बड़ा बदलाव फाइनेंशियल ईयर (FY) और असेसमेंट ईयर (AY) की जगह एकल टैक्स ईयर की शुरुआत है, जिससे टैक्स फाइलिंग प्रक्रिया को सरल बनाने की कोशिश की गई है।

रिटर्न फाइन करने की समयसीमा में हुआ बदलाव

रिटर्न फाइल करने की समयसीमा में भी बदलाव किया गया है। जहां सैलरीड वर्ग के लिए 31 जुलाई की डेडलाइन बरकरार है, वहीं गैर-ऑडिट मामलों जैसे स्वरोजगार और प्रोफेशनल्स के लिए अब 31 अगस्त तक का समय मिलेगा।

डेरिवेटिव्स ट्रेडिंग पर एसटीटी को बढ़ाया गया

सरकार ने डेरिवेटिव्स ट्रेडिंग पर सिक्योरिटीज ट्रांजैक्शन टैक्स (STT) बढ़ा दिया है, जिससे फ्यूचर्स और ऑप्शंस में ट्रेडिंग महंगी हो जाएगी। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने इसकी घोषणा की थी। डेरिवेटिव्स ट्रेडिंग वह प्रक्रिया है, जिसमें लोग ऐसे वित्तीय कॉन्ट्रैक्ट्स खरीदते-बेचते हैं, जिनकी कीमत किसी मूल संपत्ति पर आधारित होती है जैसे शेयर, सोना, तेल, इंडेक्स आदि।

हाउस रेंट के नियम किए गए सख्त

हाउस रेंट अलाउंस (HRA) के नियमों को भी सख्त किया गया है। अब कुछ मामलों में मकान मालिक का PAN और अन्य विवरण देना अनिवार्य होगा। साथ ही, ज्यादा छूट वाले शहरों की सूची में बंगलूरू, हैदराबाद, पुणे और अहमदाबाद को भी शामिल किया गया है।

कर्मचारियों से संबंधित कर लाभों को बढ़ाया गया

इसके अतिरिक्त, कर्मचारियों से संबंधित कर लाभों को बढ़ाया गया है, जिसमें भोजन भत्ते पर छूट को बढ़ाया गया है और कर-मुक्त उपहारों पर वार्षिक सीमा को बढ़ाया गया है। इसी बीच, पुरानी कर व्यवस्था के तहत बच्चों के लिए भत्ते, जिनमें शिक्षा और छात्रावास खर्च शामिल हैं, में भी वृद्धि की गई है।

शेयर मार्केट से जुड़े नियमों में क्या बदलाव किए गए?

एक महत्वपूर्ण बदलाव के तहत, स्टॉक बायबैक पर अब अनुमानित लाभांश के बजाय पूंजीगत लाभ के रूप में कर लगाया जाएगा, जिससे प्रमोटरों और खुदरा निवेशकों दोनों पर असर पड़ेगा। सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड्स (SGB) के टैक्स नियमों में भी बदलाव किया गया है। अब केवल मूल जारी के दौरान खरीदे गए बॉन्ड्स के रिडेम्प्शन पर ही टैक्स छूट मिलेगी। नए नियमों के तहत अब डिविडेंड और म्यूचुअल फंड आय पर ब्याज खर्च की कटौती की अनुमति नहीं होगी, भले ही निवेश उधार लेकर किया गया हो।

टैक्सपेयर्स के लिए प्रक्रियाओं को बनाया गया आसान

प्रक्रियाओं को आसान बनाने के लिए टैक्सपेयर्स अब एक ही घोषणा के जरिए कई स्रोतों पर टीडीएस से बच सकेंगे। साथ ही, एनआरआई से प्रॉपर्टी खरीदने पर अब खरीदार PAN के जरिए ही टीडीएस काट सकेंगे, टीएएन लेने की जरूरत नहीं होगी।

विदेशों में होने वाले खर्च पर राहत

विदेश में होने वाले खर्च पर राहत दी गई है, जिसके तहत विदेशी यात्राओं पर लगने वाला स्रोत-आधारित कर (TCS) घटाकर 2 प्रतिशत कर दिया गया है। विदेश में शिक्षा और चिकित्सा उद्देश्यों के लिए भेजे गए धन पर भी TCS कम कर दिया गया है।

सरकार इन क्षेत्रों में किए अहम बदलाव

  • टैक्स रिटर्न संशोधित करने की समयसीमा बढ़ाकर 31 मार्च कर दी गई है, हालांकि दिसंबर के बाद देरी से फाइल करने पर अतिरिक्त शुल्क लगेगा।
  • इसके अलावा, मोटर एक्सीडेंट क्लेम ट्रिब्यूनल से मिलने वाले मुआवजे पर मिलने वाला ब्याज पूरी तरह टैक्स-फ्री कर दिया गया है।
  • सरकार ने असेसमेंट ईयर 2026-27 के लिए ITR-1 से ITR-7 तक के फॉर्म भी जारी कर दिए हैं, जिससे टैक्सपेयर्स समय पर रिटर्न दाखिल कर सकेंगे।
  • खास बात यह है कि ITR-1 (सहज) में अब एक की बजाय दो घरों से होने वाली आय भी दिखाने की अनुमति दी गई है, जिससे फाइलिंग और आसान होगी।
  • विशेषज्ञों का मानना है कि ये बदलाव टैक्स सिस्टम को अधिक सरल, पारदर्शी और आधुनिक बनाने की दिशा में बड़ा कदम हैं।
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