माननीय उच्च न्यायालय द्वारा स्टे हटने के उपरांत आदेशानुसार NHAI करेगा 20.9 किमी सेक्शन का निर्माण कार्य करेगा प्रारंभ
भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण द्वारा विकसित किया जा रहा राष्ट्रीय राजमार्ग-46 ( NH-46 ) मध्यप्रदेश का एक प्रमुख उत्तर–दक्षिण परिवहन कॉरिडोर है, जो ग्वालियर से बैतूल तक लगभग 634 किलोमीटर की लंबाई में विस्तृत है। यह राजमार्ग पूरी तरह मध्यप्रदेश के भीतर स्थित सबसे लंबा राष्ट्रीय राजमार्ग है और राज्य की आंतरिक कनेक्टिविटी, लॉजिस्टिक्स दक्षता तथा समग्र आर्थिक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। साथ ही, यह भोपाल–नागपुर कॉरिडोर का एक अत्यंत महत्वपूर्ण हिस्सा है, जो बैतूल होते हुए गुजरता है। परियोजना के अंतर्गत बैतूल तक के अधिकांश खंडों में निर्माण कार्य सफलतापूर्वक पूर्ण किया जा चुका है। लगभग 21 किलोमीटर का एक महत्वपूर्ण भाग शेष रह गया था, जिसमें केसला रेंज, भौंरा रेंज तथा बरेठा घाट के तीन खंड (कुल 20.91 किमी) सम्मिलित हैं। ये सभी खंड वन्यजीव, विशेषकर टाइगर मूवमेंट कॉरिडोर के दृष्टिकोण से अत्यंत संवेदनशील क्षेत्र में आते हैं।
इन खंडों में निर्माण कार्य दिनांक 01 अप्रैल 2022 को मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय द्वारा जारी स्टे आदेश के पश्चात स्थगित कर दिया गया था। चूंकि यह क्षेत्र वन्यजीवों की निर्बाध आवाजाही के लिए महत्वपूर्ण है, अतः परियोजना के लिए विभिन्न वैधानिक एवं पर्यावरणीय, विशेष रूप से वन्यजीव संबंधी मंजूरियों की आवश्यकता थी। माननीय उच्च न्यायालय के निर्देशों का पूर्णतः अनुपालन करते हुए NHAI द्वारा सभी आवश्यक प्रक्रियाएं निर्धारित दिशा-निर्देशों के अनुरूप पूरी की गई हैं। इस क्रम में, परियोजना हेतु वाइल्डलाइफ बोर्ड एवं केंद्र सरकार से अपेक्षित सभी आवश्यक मंजूरियां अब प्राप्त हो चुकी हैं। वर्तमान में माननीय उच्च न्यायालय द्वारा स्टे के औपचारिक रूप से हटने के संबंध में आदेश की प्रतीक्षा की जा रही है। जैसे ही न्यायालय से इस संबंध में निर्देश प्राप्त होंगे, NHAI पूरी तत्परता के साथ शेष खंड में निर्माण कार्य प्रारंभ करेगा।
क्यों चुनौतीपूर्ण है बरेठा घाट का रास्ता, क्या है परेशानी: ब्लैक स्पॉट होने के कारण जरूरी हुआ सुरक्षा सुधार
बरेठा घाट का यह खंड सड़क सुरक्षा की दृष्टि से अत्यंत संवेदनशील और चुनौतीपूर्ण माना जाता है। वर्तमान में यह मार्ग केवल दो लेन का है, जिसके कारण यहां घुमावदार (कर्व) रास्ते और सीमित चौड़ाई के चलते यातायात संचालन में कठिनाई होती है। भारी वाहनों और बढ़ते ट्रैफिक दबाव के कारण इस क्षेत्र में अक्सर लंबा जाम लग जाता है, जिससे यात्रियों को असुविधा का सामना करना पड़ता है और दुर्घटनाओं की आशंका भी बढ़ जाती है। इस मार्ग पर दो प्रमुख ब्लैक स्पॉट चिन्हित किए गए हैं, जहां बार-बार दुर्घटनाएं होने की स्थिति बनी रहती है। घुमावदार रास्ता, ढलान, सीमित विजिबिलिटी और ट्रैफिक मूवमेंट जैसे कारक इस क्षेत्र को और अधिक जोखिमपूर्ण बनाते हैं। ऐसे में इस खंड का रेक्टिफिकेशन किया जाना अत्यंत आवश्यक हो जाता है, जिससे सड़क को सुरक्षित और सुगम बनाया जा सके।
स्थानीय पुलिस थानों में उपलब्ध अभिलेखों के अनुसार, जनवरी 2022 से दिसंबर 2024 के बीच इस खंड में कुल 51 सड़क दुर्घटनाएं दर्ज की गई हैं। इन दुर्घटनाओं में 18 लोगों की मृत्यु हुई है, जबकि लगभग 62 लोग घायल या गंभीर रूप से घायल हुए हैं। यह आंकड़े इस मार्ग की संवेदनशीलता को स्पष्ट रूप से दर्शाते हैं। इसके अतिरिक्त, यह भी संभावना है कि कई छोटी या अनरिपोर्टेड दुर्घटनाएं आधिकारिक रिकॉर्ड में शामिल नहीं हो पाई हों, जिससे वास्तविक स्थिति और भी गंभीर हो सकती है। इस मार्ग की एक महत्वपूर्ण विशेषता यह भी है कि यह क्षेत्र वन्यजीवों, विशेषकर वन्यजीवों की मूवमेंट कॉरिडोर का हिस्सा है। अक्सर जानवर सड़क पार करते हैं, जिससे अचानक दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ जाता है। यह स्थिति न केवल यात्रियों के लिए जोखिमपूर्ण है, बल्कि वन्यजीवों के जीवन के लिए भी गंभीर खतरा उत्पन्न करती है।
माननीय उच्च न्यायालय के निर्देशों के अनुसार NHAI की 4-लेन निर्माण योजना तैयार : स्टे हटने के बाद कार्य निर्देशनुसार होगा शुरू, ब्लैक स्पॉट्स का स्थायी समाधान, सुरक्षित ब्रिज-उंडरपास और वन्यजीव संरक्षण सुनिश्चित इस परियोजना के लिए एक ऐसा मजबूत और संतुलित प्लान तैयार किया गया है, जो आम लोगों की सुविधा के साथ-साथ वन्यजीवों और प्रकृति के संरक्षण को भी समान महत्व देता है। इसे भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए डिजाइन किया गया है, ताकि आने वाले वर्षों में यह मार्ग सुरक्षित, सुगम और भरोसेमंद बना रहे। वर्तमान में मौजूद 2-लेन सड़क को 4-लेन में विकसित किया जाएगा, जिससे सड़क की चौड़ाई बढ़ेगी और बढ़ते ट्रैफिक दबाव से राहत मिलेगी। रोजाना लगने वाले लंबे जाम की समस्या कम होगी और वाहनों की आवाजाही अधिक तेज और सुचारू हो सकेगी। साथ ही, घुमावदार और संकरी सड़क को बेहतर डिजाइन के साथ सुधारा जाएगा, जिससे सफर पहले से कहीं ज्यादा सुरक्षित और आरामदायक बनेगा।
इस खंड में चिन्हित ब्लैक स्पॉट्स का स्थायी समाधान भी किया जाएगा। इसके लिए विशेष रेक्टिफिकेशन प्लान तैयार किया गया है, जिसके तहत 3 माइनर ब्रिज बनाए जाएंगे। साथ ही 38 बॉक्स कलवर्ट्स पर कार्य किया जाएगा, जिसमें पुनर्निर्माण, चौड़ीकरण और आवश्यक सुधार शामिल हैं। यातायात को निर्बाध और सुरक्षित बनाने के लिए 1 रेलवे अंडर ब्रिज, 2 रोड ओवर ब्रिज और 1 व्हीकल अंडरपास का निर्माण भी प्रस्तावित है। इन सभी प्रयासों से सड़क की क्षमता बढ़ेगी और ट्रैफिक का प्रवाह बिना रुकावट के सुनिश्चित होगा।
वन्यजीव व प्रकृति संरक्षण को प्राथमिकता: माननीय उच्च न्यायालय व वाइल्डलाइफ बोर्ड के निर्देशों के अनुरूप बना प्लान ; वाइल्डलाइफ मिटीगेशन स्ट्रक्चर के साथ होगा निर्माण बरेठा घाट और अन्य संवेदनशील वन क्षेत्र खंडों के लिए NHAI ने एक खास योजना तैयार की है, जिसमें वन्यजीव और प्रकृति के संरक्षण को प्राथमिकता दी गई है। यह योजना माननीय उच्च न्यायालय और वाइल्डलाइफ बोर्ड के निर्देशों के अनुसार बनाई गई है, ताकि सड़क निर्माण के दौरान सुरक्षा और पर्यावरण दोनों का ध्यान रखा जा सके। इस योजना के तहत मार्ग में विशेष वाइल्डलाइफ मिटिगेशन स्ट्रक्चर का निर्माण किया जाएगा, जिसमें कुल 10 एनिमल अंडरपास और 1 एनिमल ओवरपास शामिल हैं। इन संरचनाओं के स्थान और डिजाइन में न्यायालय और वाइल्डलाइफ बोर्ड के निर्देशों के अनुसार आवश्यक बदलाव किए गए हैं, ताकि वन्यजीवों का प्राकृतिक आवागमन सुरक्षित रहे और उनके आवास पर कोई विपरीत प्रभाव न पड़े।
सड़क और पर्यावरण दोनों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए पूरे हाईवे में ट्रैफिक साइन, रोड मार्किंग और अन्य आवश्यक संकेत लगाए जाएंगे। घाट सेक्शन में NJ टाइप क्रैश बैरियर, रंबल स्ट्रिप और रेनवॉटर हार्वेस्टिंग जैसी सुविधाएं भी शामिल हैं। साथ ही पूरे मार्ग में नोइज़ बैरियर और चेन लिंक फेंसिंग के साथ बम्बू क्रीपर का उपयोग किया जाएगा, ताकि शोर और अन्य पर्यावरणीय प्रभाव कम हो और वन्यजीव सुरक्षित रहें।
परियोजना के प्रमुख लाभ और महत्त्व
- राज्य की मुख्य उत्तर–दक्षिण कनेक्टिविटी: NH-46 ग्वालियर से बेतुल तक लगभग 634 किमी लंबा है और पूरी तरह मध्यप्रदेश में स्थित सबसे लंबा राष्ट्रीय राजमार्ग है, जो उत्तरी और दक्षिणी हिस्सों को जोड़ता है।
- राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय संपर्क: यह मार्ग NH-44, NH-27, NH-52 और NH-47 जैसे अन्य प्रमुख राष्ट्रीय राजमार्गों से जुड़ता है। ग्वालियर–ब्यावरा खंड आगरा–बॉम्बे रोड (AB Road) का हिस्सा है, और एशियाई हाईवे 47 (AH47) में शामिल होने के कारण क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय व्यापार में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
- परियोजना का शेष खंड: इटारसी से बैतूल तक का खंड (पुराना NH-69) राज्य की राजधानी क्षेत्र के करीब (इटारसी/नर्मदापुरम) को दक्षिणी सीमा और मध्य भारत के हृदय क्षेत्र से जोड़ता है। इटारसी एक बड़ा रेल जंक्शन है, जबकि बैतूल – महाराष्ट्र की सीमा के पास स्थित महत्वपूर्ण शहर है।
- व्यापार और औद्योगिक विकास: यह राष्ट्रीय राजमार्ग राज्य के भीतर और बाहर माल एवं वस्तुओं के निर्बाध परिवहन को सक्षम बनाता है। मंडीदीप औद्योगिक क्षेत्र समेत कई उद्योगों के लिए यह मार्ग अत्यंत लाभकारी है।
- पर्यटन और सांस्कृतिक स्थलों तक पहुंच: इस मार्ग से सांची स्तूप, सतपुड़ा टाइगर रिज़र्व, उदयगिरि गुफाएं, भीमबेटका रॉक शेल्टर्स, सेठानी घाट, भोजपुर मंदिर, तवा डैम और बिजासन माता मंदिर सलकनपुर जैसी प्रमुख धार्मिक ,पर्यटन और सांस्कृतिक स्थलों तक पहुंच आसान होती है।
- आर्थिक और सामाजिक लाभ: यह परियोजना व्यापार, उद्योग और पर्यटन को बढ़ावा देती है, जिससे रोजगार, क्षेत्रीय विकास और मध्यप्रदेश की समग्र कनेक्टिविटी मजबूत होती है।




