ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बाक़ाई ने आईआरआईएस देना फ्रिगेट के नौसैनिकों को श्रद्धांजलि अर्पित की। अमरीका ने देना फ्रिगेट को श्रीलंका के गाले तट से लगभग 40 समुद्री मील दूर अपनी पनडुब्बी द्वारा टॉरपीडो से हमला कर डुबो दिया था। श्री बाकाई ने अमरीका की कार्रवाई को युद्ध अपराध और अंतरराष्ट्रीय कानूनों का उल्लंघन बताया। देना को भारतीय नौसेना द्वारा संयुक्त नौसैनिक अभ्यास और बंदरगाह भ्रमण में भाग लेने के लिए आधिकारिक रूप से आमंत्रित किया गया था।
सोशल मीडिया पोस्ट में श्री बाक़ाई ने कहा कि अमरीका ने नौसैनिकों के बचाव अभियान में जानबूझकर बाधा डाली। उन्होंने कहा कि यह कृत्य न केवल संयुक्त राष्ट्र महासभा के प्रस्ताव 3314 के तहत आक्रामकता है, बल्कि जिनेवा कन्वेंशन II (1949) और अतिरिक्त प्रोटोकॉल I (1977) सहित युद्ध कानूनों का गंभीर उल्लंघन भी है। श्री बाक़ाई ने कहा कि ईरान के लोग इस जघन्य अपराध को न तो भूलेंगे और न ही माफ करेंगे।




