भारत सरकार के खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय (MoFPI) के अधीन राष्ट्रीय महत्व के संस्थान, राष्ट्रीय खाद्य प्रौद्योगिकी उद्यमिता और प्रबंधन संस्थान-कुंडली (NIFTEM-K) ने खाद्य विज्ञान के क्षेत्र में अकादमिक और अनुसंधान सहयोग को बढ़ावा देने के लिए कनाडा के सास्काटून स्थित सस्केचेवान विश्वविद्यालय (USask) के साथ एक ऐतिहासिक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए हैं।
इस समझौता ज्ञापन पर एनआईएफटीईएम-के के निदेशक डॉ. हरिंदर सिंह ओबेरॉय और सस्केचेवान विश्वविद्यालय के उपाध्यक्ष (अनुसंधान) डॉ. बलजीत सिंह ने सस्केचेवान के प्रीमियर श्री स्कॉट मो, कृषि-खाद्य मंत्रालय के सचिव श्री अविनाश जोशी और संयुक्त सचिव श्री डी. प्रवीण की उपस्थिति में औपचारिक रूप से हस्ताक्षर किए। उच्च स्तरीय भागीदारी कृषि-खाद्य क्षेत्र में भारत और कनाडा के बीच द्विपक्षीय सहयोग को मजबूत करने में इस साझेदारी के रणनीतिक महत्व को दर्शाती है। यह समझौता ज्ञापन विशेष महत्व रखता है क्योंकि कल दोनों देशों के प्रधानमंत्रियों की उपस्थिति में भारत और कनाडा के संयुक्त सहयोग से दलहन प्रोटीन उत्कृष्टता केंद्र की स्थापना की घोषणा की गई थी। इस पहल का नेतृत्व भारत की ओर से एनआईएफटीईएम-के और कनाडा की ओर से सस्केचेवान विश्वविद्यालय करेंगे।
इस पांच वर्षीय समझौते के तहत, दोनों संस्थान खाद्य विज्ञान और प्रौद्योगिकी, खाद्य प्रणाली अर्थशास्त्र और व्यवसाय विकास में ऑनलाइन शिक्षण और प्रशिक्षण कार्यक्रम विकसित करने के लिए सहयोग करेंगे। यह साझेदारी शिक्षकों, शोधकर्ताओं और छात्रों के लिए अल्पकालिक विनिमय कार्यक्रमों को भी बढ़ावा देगी, जिससे खाद्य प्रसंस्करण और नवाचार में वैश्विक सर्वोत्तम प्रथाओं के बारे में जानकारी प्राप्त करने और सीखने का अवसर मिलेगा।
समझौता ज्ञापन में संयुक्त अनुसंधान परियोजनाओं, सहयोगात्मक वित्तपोषण प्रस्तावों और खाद्य प्रसंस्करण प्रौद्योगिकी में एकीकृत डिग्री कार्यक्रमों के विकास में सहयोग की रूपरेखा प्रस्तुत की गई है। इस सहयोग का उद्देश्य भारतीय खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र के लिए “वन स्टॉप सॉल्यूशन प्रोवाइडर” के रूप में NIFTEM-K के दायित्व के साथ-साथ USask के मजबूत कृषि-खाद्य पारिस्थितिकी तंत्र और वैश्विक अनुसंधान क्षमताओं का लाभ उठाना है। सहयोग के प्रमुख क्षेत्रों में संयुक्त सेमिनार और कार्यशालाओं का आयोजन, अल्पकालिक शैक्षणिक आदान-प्रदान, उद्योग-उन्मुख लघु पाठ्यक्रमों का विकास और सहयोगात्मक परियोजना योजना शामिल हैं। दोनों संस्थान पारस्परिक रूप से लाभकारी पहलों की पहचान करेंगे और बाद के सहयोग समझौतों के माध्यम से विशिष्ट परियोजनाओं को औपचारिक रूप देंगे, जिससे सुव्यवस्थित कार्यान्वयन और स्पष्ट परिणाम सुनिश्चित होंगे।
इस अवसर पर बोलते हुए, दोनों संस्थानों के नेतृत्व ने इस बात पर जोर दिया कि यह साझेदारी सतत खाद्य प्रणालियों के लिए नवाचार, क्षमता निर्माण और प्रौद्योगिकी-आधारित समाधानों को गति प्रदान करेगी। गतिशील कृषि-खाद्य पारिस्थितिकी तंत्र में स्थित दो अग्रणी संस्थानों की विशेषज्ञता को मिलाकर, यह सहयोग खाद्य सुरक्षा को बढ़ावा देने, खाद्य प्रसंस्करण मूल्य श्रृंखलाओं को मजबूत करने और दोनों देशों में अनुसंधान-आधारित औद्योगिक विकास को प्रोत्साहित करने में महत्वपूर्ण योगदान देगा।
यह समझौता ज्ञापन एनआईएफटीईएम-के के वैश्विक स्तर पर विस्तार करने और सार्थक अंतरराष्ट्रीय साझेदारियों के माध्यम से खाद्य प्रौद्योगिकी, उद्यमिता और प्रबंधन में भारत के नेतृत्व को सुदृढ़ करने के निरंतर प्रयासों में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है।

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