त्रिपुरा दौरे के दौरान, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी (स्वतंत्र प्रभार), पृथ्वी विज्ञान , प्रधानमंत्री कार्यालय, कार्मिक, लोक शिकायत एवं पेंशन, परमाणु ऊर्जा एवं अंतरिक्ष मामलों के केंद्रीय राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने कमलासागर स्थित जिला अधिकारी कार्यालय के सम्मेलन कक्ष में सेपाहिजाला जिले में एक जिला-स्तरीय समीक्षा बैठक की अध्यक्षता की।
डॉ. जितेंद्र सिंह ने इस बैठक में कहा कि पूर्वोत्तर में दक्षिणपूर्व एशिया व्यापार गलियारे के रूप में विकसित होने की अपार संभावनाएं हैं। उन्होंने जिला प्रशासन से राज्य की विशाल बांस उत्पादन क्षमता का पता लगाने और इसके उपयोग को सुनियोजित और व्यावसायिक रूप से व्यवहार्य तरीके से बढ़ाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि त्रिपुरा से बांग्लादेश के लिए ट्रेन सेवा शुरू होने से यह एक आसान और किफायती व्यापार मार्ग भी बन जाएगा।
डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि त्रिपुरा में बांस के घने जंगल हैं फिर भी इस संसाधन का पूरी तरह से उपयोग नहीं हो रहा है। बांस एक बहुमुखी उत्पाद है जिसका उपयोग निर्माण, भवन निर्माण सामग्री, आंतरिक सज्जा, आभूषण, हस्तशिल्प और फर्नीचर में होता है। उन्होंने कहा कि मूल्यवर्धन बढ़ाने और बाजार तक व्यापक पहुंच से त्रिपुरा की व्यापार क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि हो सकती है और स्थायी आजीविका के अवसर पैदा हो सकते हैं।
डॉ. जितेंद्र सिंह ने क्षेत्रीय संपर्क का जिक्र करते हुए याद दिलाया कि त्रिपुरा को बांग्लादेश से जोड़ने वाली रेल लाइन पर उनके राज्यपाल रहते हुए काम शुरू हुआ था। परियोजना को मंजूरी मिल चुकी है और वह अभी भी जारी है। बांग्लादेश में मौजूदा हालात के कारण फिलहाल काम धीमी गति से चल रहा है। सीधी रेल सेवा शुरू होने के बाद त्रिपुरा और उसके साथ ही पूरा पूर्वोत्तर क्षेत्र व्यापार और कारोबार के लिए एक महत्वपूर्ण दक्षिण एशियाई गलियारे के रूप में खुल जाएगा।
इससे पहले, जिला प्रशासन ने विकास संकेतकों और शासन संबंधी पहलों पर एक विस्तृत प्रस्तुति दी। इस समीक्षा में प्रमुख ग्रामीण विकास योजनाओं, अवसंरचना परियोजनाओं, जल जीवन मिशन के कार्यान्वयन, पीएमएवाई-जी के प्रदर्शन, संस्थागत वितरण और टीकाकरण कवरेज के साथ-साथ कृषि, बागवानी, मत्स्य पालन और स्वयं सहायता समूह वित्तपोषण में हासिल की गई उपलब्धियों को शामिल किया गया।
बैठक के दौरान मंत्री के समक्ष बाल विवाह और किशोर गर्भावस्था को समाप्त करने के उद्देश्य से शुरू की गई मिशन संकल्प जैसी नवोन्मेषी पहल, कागज रहित प्रशासन के लिए ई-ऑफिस का कार्यान्वयन, क्यूआर-आधारित फीडबैक प्रणाली, शिकायत निवारण के लिए जन सुनवाई, छतों पर सौर ऊर्जा का उपयोग, वर्षा जल संरक्षण उपाय और क्षमता निर्माण कार्यक्रम भी रखे गए।





