Thursday, February 26, 2026
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विधानसभा में विधायक देशमुख के पूछे गए प्रश्न के उत्तर में मंत्री शिवाजी पटेल ने दी विस्तृत जानकारी

 

ड्रीमलैंड सिटी कॉलोनाइजर प्रकरण पर सरकार का बयान: फरार आरोपियों की तलाश जारी,उच्च न्यायालय में विचाराधीन मामला।

मध्य प्रदेश विधानसभा की कार्यवाही के दौरान 25 फरवरी 2026 को मुलताई के विधायक चंद्रशेखर देशमुख द्वारा पूछे गए तारांकित प्रश्न क्रमांक–2392 के उत्तर में राज्य मंत्री नरेंद्र शिवाजी पटेल ने ड्रीमलैंड सिटी कॉलोनाइजर से जुड़े बहुचर्चित प्रकरण पर विस्तृत जानकारी सदन के पटल पर रखी। मंत्री ने स्पष्ट किया कि प्रकरण की जांच सतत रूप से जारी है, विभिन्न स्तरों पर दस्तावेजों का परीक्षण किया गया है और फरार आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं।

राज्य मंत्री ने बताया कि प्रकरण की विवेचना 1 सितंबर 2024 से 30 जनवरी 2025 तक निरीक्षक राजेश सांतानकर द्वारा की गई। विवेचना के दौरान ड्रीमलैंड सिटी के कॉलोनाइजर के विरुद्ध चल रहे राजस्व प्रकरण, भूमि के खसरों की जानकारी, विकास की अनुमतियां, भूमि डायवर्जन संबंधी दस्तावेज प्राप्त करने के लिए एसडीएम मुलताई से पत्राचार किया गया। इसके अतिरिक्त नजरी नक्शों एवं रजिस्ट्री संबंधी जानकारी के लिए उप-पंजीयक कार्यालय से भी आवश्यक दस्तावेज मंगाए गए।मंत्री ने कहा कि प्रकरण की निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने के लिए मुख्य नगर पालिका अधिकारी, मुलताई से भी जानकारी प्राप्त की गई। कॉलोनी के स्वीकृत अभिन्यास (लेआउट), विकास अनुज्ञा, अभियंत्रण अनुमोदन एवं अन्य तकनीकी बिंदुओं पर जानकारी लेने के लिए उप संचालक टाउन एंड कंट्री प्लानिंग (टीसीपी) से पत्राचार किया गया। स्वीकृत नक्शों के अतिरिक्त अन्य नक्शों की स्थिति स्पष्ट करने के लिए भी पुनः संबंधित विभागों से संवाद किया गया। जांच के दौरान विक्रय किए गए भूखंडों की विस्तृत जानकारी भी एकत्रित की गई।

राज्य मंत्री नरेंद्र शिवाजी पटेल ने बताया कि उपलब्ध तथ्यों के आधार पर प्रकरण में भारतीय दंड संहिता की धारा 467, 468 एवं 471 के अंतर्गत धाराएं बढ़ाई गई हैं, जो गंभीर दस्तावेजी कूटरचना एवं जालसाजी से संबंधित हैं। उन्होंने कहा कि सरकार इस मामले को गंभीरता से ले रही है और किसी भी स्तर पर दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा। विवेचना के दूसरे चरण में 30 जनवरी 2025 से 9 अक्टूबर 2025 तक निरीक्षक देवकरण डेहरिया द्वारा जांच की गई। मंत्री के अनुसार इस अवधि में नगर पालिका मुलताई से कॉलोनी में वर्तमान स्थिति में हुए विकास कार्यों के संबंध में प्रत्यक्ष जानकारी प्राप्त की गई। 22 अगस्त 2025 को आरोपियों का पता लगाने के लिए पुलिस टीम को जिला यवतमाल एवं आर्वी (महाराष्ट्र) भेजा गया। 23 अगस्त 2025 को टीम संबंधित स्थानों पर पहुंची, किंतु आरोपी वहां उपस्थित नहीं मिले। इस दौरान स्थानीय स्तर पर पूछताछ भी की गई, परंतु आरोपियों की ठोस जानकारी प्राप्त नहीं हो सकी। वर्तमान में आरोपी फरार हैं। मंत्री ने आगे बताया कि 10 अक्टूबर 2025 से वर्तमान तक निरीक्षक नरेंद्र सिंह परिहार द्वारा विवेचना की जा रही है। आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए 31 अक्टूबर 2025 को पुलिस टीम नागपुर, महाराष्ट्र भेजी गई। इसके बाद 3 दिसंबर 2025 को एक बार फिर टीम को महाराष्ट्र रवाना किया गया, लेकिन आरोपियों का कोई स्पष्ट सुराग नहीं मिला। उन्होंने आश्वस्त किया कि फरार आरोपियों का पता लगाने के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं और आवश्यक कानूनी कार्रवाई प्रचलन में है।

राज्य मंत्री ने सदन को यह भी अवगत कराया कि आरोपियों की गिरफ्तारी के पश्चात आगामी विवेचना में उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर अंतिम प्रतिवेदन के संबंध में निर्णय लिया जाएगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रकरण में संबंधित अधिकारियों की भूमिका की भी जांच की जा रही है, परंतु अब तक किसी अधिकारी की प्रत्यक्ष जिम्मेदारी स्थापित नहीं हुई है। मंत्री ने बताया कि इस मामले में कॉलोनाइजर रामदेव बाबा द्वारा माननीय उच्च न्यायालय, जबलपुर खंडपीठ में दिनांक 18 अक्टूबर 2024 को रिट याचिका क्रमांक W.P. 32848/24 दायर की गई थी। न्यायालय द्वारा 23 अक्टूबर 2024 को प्रकरण का निराकरण किया गया। इसके पश्चात कलेक्टर बैतूल के आदेश दिनांक 29 अगस्त 2024 के विरुद्ध भी याचिका प्रस्तुत की गई, जो वर्तमान में माननीय उच्च न्यायालय में विचाराधीन है। इस कारण कुछ बिंदुओं पर अंतिम निर्णय न्यायालयीन प्रक्रिया के अधीन है।

विधानसभा में दिए गए इस विस्तृत उत्तर के माध्यम से राज्य मंत्री नरेंद्र शिवाजी पटेल ने स्पष्ट किया कि सरकार प्रकरण की तह तक जाने के लिए प्रतिबद्ध है। दस्तावेजी साक्ष्यों का परीक्षण, विभिन्न विभागों से समन्वय, आरोपियों की तलाश और न्यायालयीन प्रक्रिया—सभी पहलुओं पर कार्रवाई जारी है। सदन में इस विषय पर हुई चर्चा से यह स्पष्ट हुआ कि ड्रीमलैंड सिटी कॉलोनी प्रकरण केवल एक स्थानीय विवाद नहीं, बल्कि दस्तावेजी सत्यता, राजस्व प्रक्रिया और शहरी विकास अनुमतियों से जुड़ा व्यापक मामला है। सरकार ने यह संदेश देने का प्रयास किया कि पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए जांच प्रक्रिया को चरणबद्ध और विधिसम्मत ढंग से आगे बढ़ाया जा रहा है। 25 फरवरी 2026 को विधानसभा में प्रस्तुत यह उत्तर न केवल प्रकरण की वर्तमान स्थिति को स्पष्ट करता है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि सरकार न्यायालयीन निर्देशों और विधिक प्रावधानों के अनुरूप कार्रवाई करते हुए दोषियों को न्याय के कटघरे तक लाने के लिए प्रतिबद्ध है।

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