केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री श्री अश्विनी वैष्णव ने इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026 के उद्घाटन समारोह में न्यू डेल्ही फ्रंटियर एआई कमिटमेंट्स की घोषणा की, जो इस शिखर सम्मेलन का एक ऐतिहासिक परिणाम है। यह समावेशी और उत्तरदायी कृत्रिम बुद्धिमत्ता को आगे बढ़ाने के लिए अग्रणी फ्रंटियर एआई कंपनियों और भारत के घरेलू नवोन्मेषकों को एक साथ लाता है।

श्री अश्विनी वैष्णव ने समिट को संबोधित करते हुए भारत की एआई रणनीति को लोकतंत्रीकरण, व्यापकता और संप्रभुता पर आधारित रणनीति के रूप में प्रस्तुत किया। उन्होंने एआई स्टैक के पांच स्तरों – अनुप्रयोगों, मॉडलों, कंप्यूटिंग, प्रतिभा और ऊर्जा – में भारत के व्यापक दृष्टिकोण की रूपरेखा प्रस्तुत की, जिसमें स्वास्थ्य सेवा, कृषि, शिक्षा और सार्वजनिक सेवाओं में वास्तविक तैनाती पर बल दिया गया।
श्री अश्विनी वैष्णव ने अपने संबोधन में कहा, “कृत्रिम बुद्धिमत्ता एक मूलभूत प्रौद्योगिकी है। इसने पहले से ही हमारे काम करने, सीखने और निर्णय लेने के तरीकों को बदल आरंभ कर दिया है। हमारे प्रधानमंत्री जी का मानना है कि प्रौद्योगिकी का वास्तविक मूल्य इसके लाभों को जनमानस तक पहुंचाने में निहित है। हमारे प्रधानमंत्री का विजन प्रौद्योगिकी का लोकतंत्रीकरण करना, इसे व्यापक स्तर पर लागू करना और इसे सभी के लिए सुलभ बनाना है। यही कारण है कि भारत में हम कृत्रिम बुद्धिमत्ता के सभी पाँच स्तरों पर काम कर रहे हैं। जब हम ईमानदारी से कृत्रिम बुद्धिमत्ता के लाभों का उपयोग करने लगेंगे, तो जोखिमों को कम करने के लिए सामूहिक समाधान भी खोजने होंगे। कृत्रिम बुद्धिमत्ता के केंद्र में मानव सुरक्षा और गरिमा को रखकर हम दृढ़ विश्वास के साथ आगे बढ़ सकते हैं। आइए हम मनुष्यों के लिए, मनुष्यों द्वारा और मनुष्यों के भविष्य के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता का निर्माण करें। ”

स्वैच्छिक प्रतिबद्धताएं साझा दृष्टिकोण यह सुनिश्चित करने के लिए दर्शाती हैं कि एआई प्रणालियों का विकास और तैनाती समानता, सांस्कृतिक विविधता और वास्तविक दुनिया, विशेष रूप से विकासशील देशों की आवश्यकताओं के अनुरूप हों। प्रतिभागी संगठनों में भारत स्थित नवप्रवर्तक जैसे सर्वम, भारतजेन, ज्ञानी.एआई और सॉकेट के साथ-साथ वैश्विक स्तर पर अग्रणी एआई कंपनियां शामिल हैं।
पहली प्रतिबद्धता, “वास्तविक दुनिया में एआई के उपयोग की समझ को आगे बढ़ाना”, अनाम और एकत्रित जानकारियों के माध्यम से वास्तविक दुनिया में एआई के उपयोग पर केंद्रित है। प्रतिभागी संगठन रोजगार, कौशल, उत्पादकता और आर्थिक परिवर्तन पर एआई के प्रभाव से संबंधित नीति निर्माण में सहायक साक्ष्य जुटाने का काम करेंगे। विभिन्न क्षेत्रों में एआई के उपयोग का डेटा-आधारित विश्लेषण करके, इस पहल का उद्देश्य सरकारों और संस्थानों को ऐसी सूचित रणनीतियां बनाने में मदद करना है जो प्रौद्योगिकीय परिवर्तन से जुड़े जोखिमों को कम करते हुए अधिकतम लाभ प्रदान करें।
दूसरी प्रतिबद्धता, “बहुभाषी और प्रासंगिक मूल्यांकन का सुदृढ़ीकरण”, विभिन्न भाषाओं, संस्कृतियों और वास्तविक उपयोग के मामलों में एआई प्रणालियों की प्रभावशीलता सुनिश्चित करने के प्रयासों पर केंद्रित है। ये संगठन सरकारों और स्थानीय इकोसिस्टम के साथ मिलकर ऐसे डेटासेट, बेंचमार्क और विशेषज्ञता विकसित करेंगे जो कम प्रचलित भाषाओं और सांस्कृतिक संदर्भों में मूल्यांकन में सहायक हों। यह प्रयास विविध आबादी के लिए एआई के प्रदर्शन में सुधार करेगा और वैश्विक स्तर पर उच्च-गुणवत्ता वाले एआई अनुभवों तक पहुंच को लोकतांत्रिक बनाने में मदद करेगा, साथ ही टूल्स और मूल्यांकन पद्धतियों के चयन में लचीलापन बनाए रखेगा।
श्री वैष्णव ने इस बात पर जोर दिया कि मानव जाति की भलाई के लिए सरकारों, उद्योग और अनुसंधान समुदायों के बीच सहयोगात्मक कार्रवाई आवश्यक है। उन्होंने सहभागी संगठनों के अग्रणी व्यक्तियों को वैश्विक स्तर पर जिम्मेदार एआई विकास की नींव के रूप में इन प्रतिबद्धताओं को आगे बढ़ाने में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया।




