Friday, February 20, 2026
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इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026: विनिर्माण क्षेत्र के एमएसएमई में एआई अपनाने और इसकी तैयारी पर विशेष सत्र आयोजित

इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026 के दूसरे दिन आज नई दिल्ली में “एडवांसिंग एआई रेडीनेस एंड एडॉप्शन इन मैन्युफैक्चरिंग एमएसएमई” विषय पर एक उच्च-स्तरीय विषयगत सत्र आयोजित किया गया। इस सत्र में भारत सरकार के प्रमुख मंत्रालयों, जिनमें इलेक्ट्रॉनिकी एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY), सूक्ष्मलघु और मध्यम उद्यम मंत्रालय (एमएसएमई)वस्त्र मंत्रालय और औषध विभाग (रसायन एवं उर्वरक मंत्रालय) शामिल थे, के साथ-साथ नीति निर्माताओं, उद्योग जगत के प्रतिनिधियों और शिक्षाविदों ने हिस्सा लिया।

सत्र के दौरान, इलेक्ट्रॉनिकी एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) और इंडिया एआई मिशन के तत्वावधान में नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ स्मार्ट गवर्नेंस (एनआईएसजी) और एथेना इंफोनॉमिक्स द्वारा संयुक्त रूप से तैयार किए गए एक अध्ययन का शुभारंभ किया गया। यह अध्ययन वस्त्र, फार्मास्युटिकल्स (चिकित्सा उपकरणों सहित) और इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे क्षेत्रों में विनिर्माण एमएसएसई में एआई अपनाने की गति तेज करने हेतु एक व्यावहारिक और ऑपरेशनल  रोडमैप विकसित करने पर केंद्रित होगा। इस अध्ययन के निष्कर्ष एमएसएमई द्वारा एआई को अपनाने के मार्ग प्रशस्त करेंगे और सरकार की उन पहलों का मार्गदर्शन करेंगे जो सीधे तौर पर राष्ट्रीय विनिर्माण उत्पादन, निर्यात प्रतिस्पर्धात्मकता और रोजगार के अवसरों को प्रभावित करते हैं।

इलेक्ट्रॉनिकी एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) के सचिव, श्री एस. कृष्णन ने विनिर्माण एमएसएमई क्षेत्र में उत्पादकता, दक्षता और क्षमताओं को बढ़ाने के लिए एआई का लाभ उठाने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि इंडिया एआई मिशन यह सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है कि एआई अर्थव्यवस्था के वास्तविक क्षेत्रों पर सार्थक प्रभाव डाले, विशेष रूप से विनिर्माण एमएसएमई को मजबूती प्रदान करने में।

अपने संबोधन में, एमएसएमई सचिव श्री एस. सी. एल. दास ने एआई को एक “ग्रेट फ़ोर्स मल्टीप्लायर” बताया और इस बात पर जोर दिया कि उद्योग जगत ही आत्मनिर्भर भारत की ओर भारतीय अर्थव्यवस्था के एआई-आधारित रूपांतरण को गति देगा। उन्होंने आगे कहा कि एमएसएमई को अधिक प्रतिस्पर्धी बनाने के लिए शॉप फ्लोर (उत्पादन स्तर) पर एआई का समावेश अत्यंत महत्वपूर्ण है।

आर्थिक सर्वेक्षण 2025–26 के अनुसार, भारत के सकल घरेलू उत्पाद में एमएसएमई क्षेत्र का योगदान लगभग 31.1 प्रतिशत है। यह क्षेत्र कुल विनिर्माण उत्पादन में 35.4 प्रतिशत और देश के कुल निर्यात में 48.6 प्रतिशत की हिस्सेदारी रखता है। वर्ष 2047 तक भारत को $35 ट्रिलियन की अर्थव्यवस्था बनाने के लक्ष्य में विनिर्माण क्षेत्र एक मुख्य आधार है। ऐसे में, तकनीक को अपनाने में तेजी लाना, वित्त तक पहुंच में सुधार करना और मार्केट लिंकेज को मजबूत करना, राष्ट्रीय आर्थिक विकास में एमएसएमई के योगदान को भविष्य के लिए सुरक्षित बनाने हेतु अत्यंत महत्वपूर्ण होगा।

यह अध्ययन भारत भर की 350 से अधिक एमएसएमई विनिर्माण इकाइयों को कवर करेगा, जिसमें कारखाने के निचले स्तर (शॉप फ्लोर) से लेकर वरिष्ठ प्रबंधन तक के अनुभवों के आधार पर सूक्ष्म जानकारी एकत्र की जाएगी। इस शोध का उद्देश्य एआई की ऐसी पहलों की पहचान करना है जो इकाई स्तर की आर्थिक स्थिति में ठोस सुधार ला सकें, उत्पादों एवं सेवाओं के विस्तार को बढ़ावा दे सकें और वैश्विक बाजार तक पहुंच एवं भागीदारी का विस्तार कर सकें।

एनआईएसजी के सीईओ श्री भुवनेश कुमार ने इस अध्ययन को शुरू करने पर अपना उत्साह व्यक्त किया। उन्होंने उल्लेख किया कि यह अध्ययन विनिर्माण एमएसएमई के बीच एआई अपनाने को बढ़ावा देने के लिए एक कार्यान्वयन योग्य रोडमैप प्रदान करेगा। उन्होंने आगे इस बात पर जोर दिया कि भारत की विश्व की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की यात्रा में एआई एक निर्णायक और केंद्रीय भूमिका निभाएगा।

वस्त्र मंत्रालय के अपर सचिव, श्री रोहित कंसल ने इस बात पर जोर दिया कि भारत का एआई  डिविडेंड वास्तव में कारखानों में ही साकार होगा। उन्होंने रेखांकित किया कि भारत का दीर्घकालिक आर्थिक बदलाव इस बात पर निर्भर करेगा कि क्या एआई वस्त्र, खाद्य प्रसंस्करण जैसे पारंपरिक उद्योगों का आधुनिकीकरण करने में सक्षम होता है।

औषध विभाग के संयुक्त सचिव, श्री अमन शर्मा ने रेखांकित किया कि एआई लागत में उल्लेखनीय कमी ला सकता है और एमएसएमई के लिए उत्पादन की गुणवत्ता में सुधार कर सकता है, जो इस क्षेत्र की 80 प्रतिशत से अधिक विनिर्माण इकाइयों का प्रतिनिधित्व करते हैं।

यह विषयगत सत्र ‘इंडिया एआई समिट 2026’ का एक महत्त्वपूर्ण हिस्सा था, जिसने एआई इकोसिस्टम के विभिन्न हितधारकों के बीच व्यवस्थित संवाद, ज्ञान के आदान-प्रदान और समन्वित कार्रवाई के लिए एक मंच के रूप में कार्य किया।

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