Monday, April 27, 2026
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विस्थापितो की समस्याओ का समाधान शीघ्र होगा – कलेक्टर श्री गुप्ता

टेम मध्यम से सिंचाई परियोजना के विस्थापितो हेतु गठित समिति की बैठक सम्पन्न

विदिशा : सोमवार, मई 26, 2025,

कलेक्टर श्री अंशुल गुप्ता की अध्यक्षता में सोमवार को टेम मध्यम सिंचाई परियोजना के विस्थापितो हेतु गठित समिति की बैठक सम्पन्न हुई। उक्त बैठक को सम्बोधित करते हुए कलेक्टर श्री गुप्ता ने कहा कि विस्थापितो की सभी समस्याओं का समाधान शीघ्र कराया जाएगा। इस दौरान बतलाया गया कि टेम मध्यम सिंचाई परियोजना हेतु भू-अर्जन की प्रक्रिया पूर्ण की गई है। परियोजना के लिए प्रशासकीय स्वीकृति, सैंच्य क्षेत्र, कुल जल भराव क्षमता, जीवित जल भराव क्षमता, बांध के डूब क्षेत्र की भूमि और विदिशा जिले में डूब प्रभावित भूमि के संबंध में संजय सागर बाह्य परियोजना की कार्यपालन यंत्री सुश्री प्रियंका भण्डारी के द्वारा विस्तारपूर्वक जानकारी दी गई।

कलेक्टर श्री गुप्ता ने कार्यपालन यंत्री को निर्देश्ति किया है कि विस्थापन संबंधी कार्य आदर्श कालोनी के रूप में किया जाए। उन्होंने कालोनी के बीच में स्कूल और आंगनबाडी केन्द्र बनाए जाने पर विशेष बल देते हुए कहा कि एक गौशाला भी बनाई जाएं। उन्होंने प्रत्येक विस्थापितो को प्रदाय की जाने वाली राशि बैंक खातो में जमा की जा रही है अतः उन सबका जीवन ज्योति बीमा के तहत बीमा अवश्य कराया जाए।

बैठक में बताया कि टेम मध्यम सिंचाई परियोजना से प्रभावित कृषको की कुल संख्या 722 है जिसमें से 648 कृषको को आवार्ड पारित राशि का भुगतान किया जा चुका है। 74 कृषको की राशि भुगतान हेतु लंबित है। प्रभावित 1167 परिवारो के लिए पुर्नवास एवं पुर्नव्यवस्थापन कार्य किए जा रहे है जिनमें बिजली पानी, सीसी सडके, पक्की नालियां, पुलिया आदि का निर्माण किया जाएगा। इन परिवारो के निवास हेतु 800 वर्ग फुट भूखण्ड, प्रायमरी स्कूल, प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र, आंगनबाडी भवन, खेल का मैदान, चैपाल, शांति धाम, धार्मिक स्थल मंदिर, सामुदायिक भवन, पार्क और शौचालय का निर्माण कार्य शामिल है।

टेम मध्यम सिंचाई परियोजना अंतर्गत प्रभावित भूमि अर्जन के कारण तहसील लटेरी के ग्राम दपकन, नैनागढ़, धीरगढ़ एवं बैरागढ़ में 440 व्यक्तियों के मकान प्रभावित हो रहे हैं। जिसमें प्रभावित मकान धारकों के अलावा अधिनियम 2013 की धारा 3ड के तहत सर्वेक्षित 727 कुटुंब भी निवासरत हैं, इस प्रकार तहसील लटेरी में कुल 1167 प्रभावित कुटुंबों का पुनर्व्यवस्थापन किया जाना है। उपरोक्तानुसार परिवारों (कुटुंबों) को जो प्रभावित मकानों में स्थाई रूप से निवासरत हैं तथा जिनके अन्यत्र स्थानों पर निवास हेतु मकान नहीं है, को विस्थापित क्षेत्र में भूमि पुनर्व्यवस्थापन क्षेत्र के रूप में चिन्हित कर शासकीय आवासीय पट्टे 40×20 = 800 वर्गफुट साईज के भूखंड प्रदाय किये जाएंगे। जिसकी समय सीमा भू-अर्जन प्रकरणों में अवार्ड पारित होने के उपरांत तीन माह होगी। अधिनियम 2013की दूसरी अनुसूची अनुसार प्रभावित कुटुंबो का निम्नानुसार पुर्नवास और पुनर्व्यवस्थापन सहायतायें, सुविधायें दी जाएंगी।

ग्रामीण क्षेत्र में प्रभावित किसी मकान से वंचित किये जाने की दशा में प्रधानमंत्री आवास योजना विनिर्देशों के अनुसार एक निर्मित मकान उपलब्ध कराया जाएगा जिसका कुर्सी क्षेत्र 50 वर्गमीटर से कम नहीं होगा।

कंडिका-1 में वर्णित फायदों को ऐसे किसी प्रभावित कुटुंबों को, जो वासक्षेत्र भूमि से रहित है और जो प्रभावित क्षेत्रों की अधिसूचना की तारीख के पूर्ववर्ती तीन वर्ष से अन्यून अवधि तक लगातार क्षेत्र में रह रहा है और जिसे ऐसे क्षेत्र से अनिच्छा से विस्थापित किया गया है भी विस्तारित किया जाएगा।

यदि कोई प्रभावित कुटुंब जो प्रस्थापित मकान को न लेने का विकल्प करता है, तो निर्मित मकान के बदले मकान के समतुल्य खर्च प्रधानमंत्री आवास योजना विनिर्देशों के अनुसार प्रस्थापित किया जा सकेगा। अर्जन से प्रभावित किसी कुटुंब को इस अधिनियम के उपबंधों के अधीन एक से अधिक मकान नहीं दिया जाएगा।

ऐसे प्रत्येक प्रभावित कुटुंब, को पाँच लाख रूपये का एक बारगी संदाय दिया जाएगा। ऐसे प्रत्येक प्रभावित कुटुंब, जिसे अर्जित भूमि से विस्थापित किया गया है, को अधिनिर्णय की तारीख से एक वर्ष की अवधि तक प्रतिमास तीन हजार रूपये के समतुल्य मासवार जीवन निर्वाह भत्ता दिया जाएगा।

ऐसे प्रत्येक प्रभावित कुटुंब जो विस्थापित हुआ है, कुटुंब, भवन सामग्री, घरेलू सामग्री और पशुओं के स्थानांतरण के लिए परिवहन खर्च के रूप में एक बार पचास हजार रूपये की वित्तीय सहायता दी जाएगी। पशु या छोटी दुकान रखने वाले प्रत्येक प्रभावित कुटुंब ऐसी रकम की वित्तीय सहायता यथास्थिति, पशुबाड़े या छोटी दुकान के निर्माण के लिए, एक बारगी ऐसी रकम की वित्तीय सहायता प्राप्त करेगा जो समुचित सरकार द्वारा, न्यूनतम पच्चीस हजार रूपये की सीमा के अधीन रहते हुए अधिसूचना द्वारा विनिर्दिष्ट की जाए।

किसी कारीगर, छोटे व्यापारी या स्वनियोजित व्यक्ति के प्रत्येक प्रभावित कुटुम्ब या ऐसे प्रभावित कुटुंब जिसके स्वामित्वाधीन प्रभावित क्षेत्र में गैर-कृषिक भूमि या वाणिज्यिक, औधोगिक या संस्थागत ढांचा है और जिसे भूमि अर्जन के कारण प्रभावित क्षेत्र से अस्वैच्छिक रूप से विस्थापित किया गया है, ऐसी रकम की एक बारगी वित्तीय सहायता पाएगा जो समुचित सरकार द्वारा न्यूनतम पच्चीस हजार रूपये की सीमा के अधीन रहते हुए अधिसूचना द्वारा विनिर्दिष्ट की जाए। प्रभावित कुटुंबों को जलाशय में मछली पकड़ने के अधिकार की अनुज्ञा ऐसी रीति में दी जा सकेगी जो समुचित सरकार द्वारा विहित की जाए।

प्रत्येक प्रभावित कुटुंब को केवल पचास हजार रूपये का एक बार ष्पुनर्व्यवस्थापन भत्ताष् दिया जाएगा। प्रभावित कुटुंबों को आवंटित भूमि या मकान के रजिस्ट्रीकरण के लिए संदेय स्टांप शुल्क और अन्य फीस का वहन अपेक्षक निकाय द्वारा किया जाएगा। प्रभावित कुटुंबों को आवंटित मकान के लिए भूमि सभी विल्लंगमों से मुक्त होगी।

आवंटित भूमि या मकान प्रभावित कुटुंब की पत्नी और पति दोनों के संयुक्त नाम में हो सकेगा। अधिनियम 2013 की तीसरी अनुसूची अनुसार प्रभावित कुटुंबों, जनसमुदाय के पुनर्व्यवस्थापन के लिए अध्यपेक्षा प्राधिकारी के खर्चे पर निम्नलिखित अवसंरचनात्मक सहूलियतें और मूलभूत न्यूनतम सुविधाएं, यह सुनिश्चित करने के लिए उपलब्ध कराई जाएंगी कि नए गांव या कालोनी में पुनर्व्यवस्थापित जन समुदाय स्वयं के लिए एक युक्तियुक्त सामुदायिक जीवन स्तर प्राप्त कर सके और विस्थापन से हुए अभिघात को कम करने का प्रयास कर सकें। युक्तियुक्त वासयोग्य और सुनियोजित व्यवस्थापन के लिए न्यूनतम निम्नलिखित सहूलियतें और संसाधन उपलब्ध कराई जाएंगी।

सभी पुनर्व्यवस्थापित कुटुंबों के लिए पुनर्व्यवस्थापित ग्रामों के भीतर सड़को और पक्की सड़क, मार्ग से जुड़ी बारहमासी सड़क और सुखाधिकार की पर्याप्त व्यवस्था की जाए। वास्तविक पुनर्व्यवस्थापन के पहले उचित जल निकासी और स्वच्छता योजनाएं निष्पादित की जाएं।   भारत सरकार द्वारा विहित मानकों के अनुसार प्रत्येक कुटुंब के लिए सुरक्षित पेयजल का एक या अधिक सुनिश्चित संसाधन।

पशुओं के लिए पेयजल की व्यवस्था। राज्य की स्वीकार्य अनुपात के अनुसार चारागाह। उचित मूल्य की दुकान की युक्तियुक्त संख्या। यथोचित पंचायत घर। विस्थापित व्यक्तियों के पुनर्व्यवस्थापन के लिए स्थापित सभी नए ग्रामों को उपयुक्त परिवहन सुविधा

उपलब्ध कराई जाएगी। जिसमें नजदीकी विकास केन्द्र, शहरी रिहायशों से स्थानीय बस सेवाओं के माध्यम से सार्वजनिक परिवहन सुविधाएं अवश्य सम्मिलित होनी चाहिए। जाति-समुदायों और उनकी प्रथाओं के आधार पर कब्रिस्तान या शवदाह गृह। स्वच्छता के लिए सुविधाएं जिसके अंतर्गत व्यक्तिगत प्रसाधन स्थल। प्रत्येक घर और सार्वजनिक प्रकाश के लिए व्यक्तिगत एकल विद्युत कनेक्शन (या सौर ऊर्जा जैसे ऊर्जा के गैर-परंपरागत संसाधनों के माध्यम से कनेक्शन)। शिशु और माता को पूरक पोषणीय सेवाएं उपलब्ध कराने वाली आंगनबाड़ी। निःशुल्क और अनिवार्य बाल शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009 (2009 का 35) के उपबंधों के अनुसार विद्यालय। दो किलोमीटर क्षेत्र के भीतर उप स्वास्थ्य केन्द्र। भारत सरकार द्वारा यथाविहित प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र।बच्चो के लिए क्रीड़ा क्षेत्र। प्रत्येक सौ कुटुंबों के लिए एक सामुदायिक केन्द्र। प्रभावित क्षेत्र की संख्या और उनके आयाम से संगत प्रत्येक पचास कुटुंबों के लिए पूजा स्थल और सामुदायिक सभा के लिए चैपालध्वृक्ष चबूतरा। व्यवस्थापन के लिए समुचित सुरक्षा व्यवस्था उपलब्ध कराई जाए यदि आवश्यक हो। मानको के अनुसार पशुपालन सेवा केन्द्र। प्रभावित कुटुबों के पुनर्व्यवस्थापन हेतु तहसील लटेरी के ग्राम दपकन में शासकीय भूमि खसरा नंबर – 169 का रकवा 23.470 हेक्टेयर में से 15.035 हेक्टेयर भूमि न्यायालय कलेक्टर, विदिशा के प्रकरण क्रमांक 0007ध्अ-20 (3) ध् 2022-23 में पारित आदेश दिनांक 28ध्07ध्2023 द्वारा जल संसाधन विभाग के कार्यपालन यंत्री संजय सागर परियोजना, बाह नदी संभाग, गंजबासौदा, जिला-विदिशा को आवंटित की गई है, साथ ही लटेरी के ग्राम बैरागढ में शासकीय भूमि खसरा नम्बर 29ध्1 रकबा 10.431हे0 भूमि के पुनर्वास हेतु आवंटन की कार्यवाही प्रक्रियाधीन है। टेम मध्यम सिंचाई परियोजना अंतर्गत प्रभावित कुटुंबों को उपरोक्तानुसार पुर्नवास और पुनर्व्यवस्थापन नीति के तहत एक 40×20 = 800 वर्गफुट का आवासीय भू-खण्ड आवंटित भूमि पर प्रभावित कुटुंबों की मांग अनुसार आवंटन की कार्यवाही लॉटरी के माध्यम से की जाएगी।

उपरोक्तानुसार लाभ एवं सुविधायें प्रभावित व्यक्तियों को प्रभावित ग्रामध्मकानों में अधिनियम 2013 की धारा 11 के प्रकाशन दिनांक के पूर्व तीन वर्ष से अन्यून अवधि तक लगातार क्षेत्र में निवास करने की स्थिति में ही देय होंगे तथा धारा-11 के प्रकाशन दिनांक के पूर्व तीन वर्ष से अन्यून अवधि तक लगातार क्षेत्र में निवास को प्रमाणित किये जाने हेतु दस्तावेजी साक्ष्य प्रस्तुत किये जाने का उत्तरदायित्व संबंधित प्रभावित कुटुंबों (व्यक्तियों) का होगा।

   अधिनियम की धारा 3(ड) के तहत प्रभावित कुटुंब (व्यक्ति) द्वारा 18 वर्ष की आयु धारा- 11 की प्रारंभिक अधिसूचना दिनांक के पूर्व पूर्ण किये जाने का प्रमाण प्रस्तुत किये जाने पर ही उपरोक्तानुसार सुविधायें एवं लाभ प्रभावित व्यक्ति या कुटुंब को दिया जाएगा।

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