Saturday, May 9, 2026
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दक्षिण अफ्रीका से जेब्रा और जिराफ लाने की तैयारी कर रही मध्यप्रदेश सरकार

भोपाल। मध्य प्रदेश में चीतों के बाद अब राज्य सरकार दक्षिण अफ्रीका से जेब्रा और जिराफ भी लाएगी। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की पहल पर कॉरपोरेट सोशल रिस्पांसिबिलिटी (सीएसआर) फंड का उपयोग कर जिराफ और जेब्रा लाने की तैयारी की जा रही है। फंड का उपयोग अन्य कार्यों में भी किया जाएगा।

पहले चरण के लिए वन विहार राष्ट्रीय उद्यान भोपाल के लिए जिराफ और जेब्रा लाए जाएंगे। इसके लिए अलग से विशेष बाड़ा बनाएगा जाएगा, ताकि उन्हें अनुकूल माहौल दिया जा सके। इसके बाद अन्य राष्ट्रीय उद्यान में भी विदेश से अलग-अलग प्रजाति के वन्य जीव लाए जाएंगे।

इसके लिए विभिन्न शासकीय, अशासकीय संस्थाओं के प्रतिनिधियों की एक बैठक भी हो चुकी है। अब सीएसआर कॉन्क्लेव की कार्यशाला भोपाल में प्रस्तावित है, जिसमें आगे की प्रक्रिया पर चर्चा कर निर्णय लिया जाएगा।

विशेषज्ञ बताते हैं कि जेब्रा और जिराफ अर्ध-शुष्क जलवायु में रह सकते हैं। प्रारंभिक अध्ययन में पाया गया है कि भोपाल की जलवायु उनके अनुकूल है। वे पौधों की पत्तियां, फल और फूल खाते हैं। मुख्य रूप से बबूल की प्रजातियां उन्हें पसंद हैं, जो वन विहार और आसपास पर्याप्त मात्रा में है। बता दें, कोलकाता, मैसूर और पुणे सहित देश के 11 चिड़ियाघरों में लगभग 30 जिराफ हैं।

चीता लाने से पहले दक्षिण अफ्रीका गए वन मंत्री विजय शाह ने लौटकर जिराफ और जेब्रा लाने की घोषणा की थी। केंद्रीय चिड़ियाघर प्राधिकरण ने योजना को मंजूरी भी दे दी है। युवा नर और मादा जिराफ एवं जेब्रा लाए जाएंगे, ताकि उनकी वंशवृद्धि भी हो सके। उन्हें समुद्री मार्ग से यहां लाया जा सकता है। हालांकि यह उस देश के विशेषज्ञों से बात करके तय होगा, जिस देश से जिराफ और जेब्रा लाए जाएंगे।

 

मुख्यमंत्री ने दिए थे निर्देश, चीतों के लिए गांधी सागर भी तैयार

 

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने जून में मंत्रालय में बैठक कर कहा था कि प्रदेश के वन क्षेत्र में रायनो (गैंडा) तथा अन्य दुर्लभ व लुप्तप्राय: प्रजातियों के वन्य प्राणियों को लाने की संभावनाओं का अध्ययन कराया जाए।

उन्हें प्रदेश में बसाने के प्रयास तेजी से किए जाएंगे। मुख्यमंत्री ने चीतों का नया घर गांधी सागर अभयारण्य में की गई तैयारियों की भी जानकारी ली थी। अगले चरण में कूनो के बाद अब गांधीसागर में दक्षिण अफ्रीका और केन्या से चीते लाकर बसाए जाएंगे

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