भोपाल। मध्य प्रदेश के पांच जिला अस्पतालों को पीपीपी मोड पर देने के सरकार के निर्णय के बाद अब कुछ सिविल अस्पताल और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों को भी पीपीपी मोड पर देने की तैयारी है। स्वास्थ्य संचालनालय इस संबंध में प्रस्ताव तैयार कर रहा है।शीघ्र ही इसे स्वीकृति के लिए कैबिनेट में लाया जाएगा। जिला अस्पतालों की तरह इन स्वास्थ्य संस्थाओं में भी निजी निवेशक 25 प्रतिशत बिस्तर प्राइवेट रख सकेगा। सुविधाएं बढ़ाकर निवेशक इन बिस्तरों में भर्ती रोगियों से निर्धारित शुल्क वसूल सकेगा।
कुछ सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र अच्छी स्थिति में
जबलपुर, भोपाल और इंदौर में कई सिविल अस्पताल शहर के बीच में होने के साथ ही साधन संपन्न हैं। यहां रोगियों की संख्या जिला अस्पतालों की तरह रहती है। इसी तरह से दूसरे जिलों में कुछ सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बहुत अच्छी स्थिति में हैँ। वहां सीजर डिलीवरी की सुविधा भी है।
कैबिनेट से स्वीकृति मिलने के बाद ऑफर बुलाए जाएंगे
मापदंड के अनुसार पांच विषय विशेषज्ञ भी हैं। ऐसे में लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग अब उन स्वास्थ्य संस्थाओं की सूची तैयार कर रहा है जिन्हें पीपीपी मोड पर दिया जा सकता है। कैबिनेट से स्वीकृति मिलने के बाद इन्हें पीपीपी मोड पर देने के लिए ऑफर बुलाए जाएंगे।
उल्लेखनीय है कि इसी वर्ष मार्च में राज्य सरकार ने प्रदेश के पांच जिलों में निजी मेडिकल कॉलेज खोलने के लिए वहां के जिला अस्पतालों को पीपीपी मोड पर देने का निर्णय लिया था। इनमें कटनी, पन्ना और मुरैना में पीपीपी से कालेज खोलने के लिए निजी निवेशकों से ऑफर बुलाए गए हैं। दो अन्य स्थानों के लिए भी शीघ्र ही निविदा जारी करने की तैयारी है।




