Saturday, February 21, 2026
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भारत बनेगा इलेक्ट्रिक वाहनों का ग्लोबल हब, जानें भारत में नई ईवी पॉलिसी का क्या-क्या लाभ मिल सकता है

EV Policy 2024: केंद्र की नरेंद्र मोदी ने भारत को मैन्युफैक्चरिंग हब के रूप में बढ़ावा देने के लिए इलेक्ट्रिक वाहन (ईवी) नीति को मंजूरी दे दी है। इसके तहत कम से कम 50 करोड़ डॉलर, यानी भारतीय मुद्रा में 4,150 करोड़ रुपये के निवेश के साथ देश में मैन्युफैक्चरिंग प्लांट लगाने वाली कंपनियों को शुल्क में रियायतें दी जाएंगी। वाणिज्य और उद्योग मंत्री के मुताबिक, ईवी पॉलिसी के जरिये भारत को ईवी के विनिर्माण गंतव्य के रूप में बढ़ावा देने और टेस्ला समेत अलग-अलग ग्लोबल ईवी मैन्युफैक्चरर्स से निवेश आकर्षित करने का प्रयास किया गया है।

नई इलेक्ट्रिक वीइकल पॉलिसी के तहत इलेक्ट्रिक वाहनों की मैन्युफैक्चरिंग यूनिट स्थापित करने वाली कंपनियों को कम सीमा शुल्क पर सीमित संख्या में कारों को आयात करने की अनुमति दी जाएगी। इस रियायत के लिए कंपनी को कम से कम 4,150 करोड़ रुपये का निवेश करना जरूरी होगा, जबकि निवेश की कोई अधिकतम सीमा नहीं होगी। मंत्रालय से दिए गए बयान के अनुसार, इंपोर्ट के लिए मंजूर ईवी की कुल संख्या पर शुल्क में दी गई रियायत उस कंपनी की निवेश राशि या पीएलआई योजना के तहत प्रोत्साहन राशि 6,484 करोड़ रुपये में से जो भी कम हो, तक सीमित होगा।ईवी पॉलिसी के मुताबिक, निवेश अगर 80 करोड़ डॉलर या उससे ज्यादा है तो हर साल ज्यादा से ज्यादा 8,000 की दर से अधिकतम 40,000 ईवी के आयात की अनुमति होगी। वार्षिक आयात सीमा से बची रह गई इकाइयों को आगे बढ़ाया जा सकेगा। योजना दिशानिर्देशों के तहत परिभाषित डीवीए (घरेलू मूल्यवर्धन) और न्यूनतम निवेश मानदंड हासिल न करने की स्थिति में बैंक गारंटी लागू की जाएगी। कंपनी की तरफ से जताई गई निवेश प्रतिबद्धता को छोड़े गए सीमा शुल्क के बदले में बैंक गारंटी से समर्थित होना होगा।वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय ने कहा है कि इस ईवी पॉलिसी से भारतीय कस्टमर को लेटेस्ट टेक्नॉलजी तक पहुंच प्रदान की जा सकेगी। यह मेक इन इंडिया पहल को बढ़ावा देगी और ईवी कंपनियों के बीच स्वस्थ प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा देकर ईवी परिवेश को मजबूत करेगी। इससे उत्पादन की उच्च मात्रा, अर्थव्यवस्था के विस्तार, उत्पादन की कम लागत और आयात में कटौती, कच्चे तेल की आयात कम होगी, व्यापार घाटा कम होगा, विशेषकर शहरों में वायु प्रदूषण कम होगा और स्वास्थ्य और पर्यावरण पर सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।इलेक्ट्रिक वाहन नीति के अनुसार, एक कंपनी को भारत में विनिर्माण इकाइयां स्थापित करने और ई-वाहनों का वाणिज्यिक उत्पादन शुरू करने के लिए तीन साल का समय मिलेगा, और ज्यादा से ज्यादा 5 साल के भीतर 50 फीसदी डोमेस्टिक वैल्यू एडिशन हासिल करना होगा।

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