जबलपुर, जिंदा लोगों को मृत बताकर फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्र तैयार कर करोड़ों रुपये का फर्जीवाड़ा करने का खेल भानतलैया स्थित नगर निगम के जोन कार्यालय से किया गया। पुलिस को जांच में पता चला है कि जोन कार्यालय का एक ऑपरेटर इस खेल में शामिल था। यह जानकारी लगते ही पुलिस टीम ने शनिवार को ऑपरेटर को तलब किया, जहां उससे घंटो पूछताछ की और उसके बयान दर्ज किए।जांच में यह बात भी सामने आई है कि मध्य प्रदेश भवन एवं अन्य संनिर्माण कर्मकार कल्याण मंडल द्वारा संचालित सामाजिक सुरक्षा के अंतर्गत दी जाने वाले दो लाख रुपये की अनुग्रह और छह हजार रुपए की अंतेष्टी राशि में से आधी राशि ऑपरेटर रखता था। वहीं आधी राशि गिरोह के अन्य सदस्यों के पास जाती थी। ऐसा माना जा रहा है कि मामले में ऑपरेट की भी गिरफ्तारी की जा सकती है
ऐसे हुआ मामले का खुलासा
अधारताल न्यू नेता कॉलोनी निवासी शेख शहजाद की अधारताल में दुकान है। जहां से वह विभिन्न दस्तावेज बनाता था। वर्ष 2020 में अधारताल आनंद नगर निवासी सैयदा रिजवाना रिजवी उसकी दुकान पहुंची। जहां शहजाद ने उससे समग्र आईडी, पासपोर्ट साइज फोटो, आधार कार्ड समेत अन्य दस्तावेज और पांच हजार रुपए लिए।
छह माह बाद शहजाद ने सैयदा को मजदूरी कार्ड दे दिया। लेकिन इसके कुछ समय बाद सैयदा को पता चला कि शहजाद ने उसका फर्जी मृत्यु प्रमाणपत्र लगा मजदूरी कार्ड के जरिए सरकारी योजनाओं से रुपए निकाले हैं। तब मामले की शिकायत सैयदा ने हनुमानताल पुलिस से की।
कपास बुक को एडिट कर कारनामा
जांच के बाद पुलिस ने मामले में शहजाद समेत आनंद नगर पंप हाऊस अधारताल निवासी आकिब रफीक और मक्का नगर गली नम्बर एक निवासी मोहम्मद सद्दाम उर्फ सलमान को गिरफ्तार किया था। पुलिस के अनुसार आरोपित किसी भी मजदूर की समग्र आईडी से उसके स्वजन का नाम पता लगाते थे। इसके बाद बैंकपास बुक को एडिट कर यह नाम उसमें दर्ज किया जाता था। इसी पासबुक का एकाउंट नम्बर योजना में लगाया जाता था, ताकि राशि उसी एकाउंट में पहुंचे, जिसमें आरोपी चाहते थे।
पुलिस ने नगर निगम को पत्र लिखकर उन 40 लोगों की जानकारी मांगी थी, जिनके फर्जी प्रमाणपत्र आरोपियों के पास से मिले थे। नगर निगम द्वारा पुलिस को बताया गया कि उक्त 40 लोगो के प्रमाणपत्र न तो नगर निगम के मुख्य कार्यालय से जारी किए गए और न ही किसी जोन कार्यालय से।




