Saturday, June 13, 2026
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यूपी में लू के पीछे जलवायु परिवर्तन: जानिए हीटवेव में कब बदल जाती है गर्मी?

यूपी में लू लगने की वजह से हॉस्पिटल में एडमिट होने वाले मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है. क्लाइमेट शिफ्ट इंडेक्स की एक स्टडी में बताया गया कि जलवायु परिवर्तन से उत्तर प्रदेश में लू चलने की संभावनाएं दोगुनी हो गई है.

क्लाइमेट शिफ्ट इंडेक्स वैज्ञानिकों का एक स्वतंत्र अमेरिकी समूह है. क्लाइमेट शिफ्ट इंडेक्स (सीएसआई) जलवायु परिवर्तन की वजह से तापमान में आए बदलाव पर रिसर्च करने का काम कर रहा है.

हाल ही में उत्तर प्रदेश के बलिया जिले के जिला अस्पताल में सोमवार तक पांच दिनों में 68 मरीजों की मौत हो गई. हालांकि, अधिकारियों का कहना है कि लू लगने से केवल दो लोगों की मौत हुई है. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक देवरिया जिले में भी भीषण गर्मी की वजह से कई लोगों की मौतें हुईं.

अब भीषण गर्मी का जलवायु परिवर्तन कनेक्शन पर सीएसई ने काम करना शुरू कर दिया है. क्लाइमेट सेंट्रल के शोधकर्ताओं ने इसका विश्लेषण किया कि ऐतिहासिक औसत से तापमान कितना और कितनी बार बढ़ा है.

 

यूपी में गर्मी पर क्लाइमेट सेंट्रल की रिपोर्ट क्या कहती है

14-16 जून के बीच उत्तर प्रदेश में भंयकर गर्मी पड़ी. इन तीन दिनों में हर दिन के मुकाबले दो गुना ज्यादा गर्मी पड़ी. रिपोर्ट के मुताबिक इस गर्मी का जिम्मेदार जलवायु परिवर्तन को बताया गया. यूपी के बलिया जिले में 16 जून को तापमान 42.2 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया.

सीएसआई ने रिपोर्ट में जलवायु परिवर्तन के गंभीर परिणामों की तरफ इशारा किया. इसे इस तरह से समझाया गया.

लेवल -1 : लेवल -1 क्लियर कलाइमेंट चेंज सिग्नल को दर्शाता है.

लेवल 2 और 5:लेवल 2 और 5 का मतलब ये कि जलवायु परिवर्तन की वजह से गर्मी दो से पांच गुना ज्यादा बढ़ी है

भारत के अलग-अलग हिस्सों में पड़ रही गर्मी के बारे में क्या कहती है रिपोर्ट 

उत्तर प्रदेश के अलावा पूरे भारत में अधिकांश स्थानों ने इसी अवधि के दौरान भीषण गर्मी का अनुभव किया. इस दौरान लू ने भारत में लाखों लोगों को प्रभावित किया. उत्तर प्रदेश और बिहार सबसे ज्यादा प्रभावित हुए. जबकि महाराष्ट्र के विदर्भ क्षेत्र, पूर्वी मध्य प्रदेश, झारखंड, छत्तीसगढ़, ओडिशा, तेलंगाना और तटीय आंध्र प्रदेश जैसे अन्य राज्यों में भी उच्च तापमान दर्ज किया गया.

क्लाइमेट सेंट्रल की रिपोर्ट के मुताबिक, जलवायु में तेजी से परिवर्तन की वजह से तीन दिनों के दौरान उच्च आर्द्रता के साथ तापमान भी तेजी से बढ़ा. रिपोर्ट में इस बात पर चिंता जताई गई कि जलवायु परिवर्तन गर्मी की लहरों की आवृत्ति और तीव्रता को जिस तरह से बढ़ा रहा है वो सबसे खतरनाक मौसम बन कर उभरेगा.

खराब होते मौसम के बावजूद हाल ही में हुए वर्ल्ड वेदर एट्रिब्यूशन (डब्ल्यूडब्ल्यूए) अध्ययन से पता चला है कि भारत में हीट एक्शन प्लान पर बहुत धीमी गति से काम हो रहा है. अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों के एक पैनल डब्ल्यूडब्ल्यूए के सह-प्रमुख फ्रीडेरिक ओटो ने कहा कि पूरी दुनिया में इस पर काम करने की जरूरत है, और भारत में सबसे ज्यादा.

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