तीन साल से ज्यादा समय की लंबी कैद के बाद एक बाघ को बाड़े से आजादी मिली थी, लेकिन यह आजादी महज ढाई महीने में ही खत्म हो गई। बाघ को 26 मार्च को आजाद किया गया था और जून के दूसरे सप्ताह में वापस बाड़े में डाल दिया गया। दरअसल बाघ के गले में चोट का निशान देखा गया था। वन विभाग का अनुमान है कि आजाद होने के बाद उस पर किसी दूसरे बाघ ने हमला किया जिससे वह घायल हो गया। एसडीओ सुधीर मिश्रा ने बताया कि गर्दन पर चोट लगी थी जिसे बाघ चाट नहीं पा रहा था। इसके कारण घाव में संक्रमण फैलने की आशंका थी। घाव के चाटने के कारण ही वन्यजीव ठीक हो पाते हैं। कैद करने के बाद प्रतिदिन उसे आवश्यक दवाइयां दी जा रही हैं।
मिल्ली में कायम कर रहा था राज
ताला की बाघिन की मौत बाघ से आपसी संघर्ष से हो गई थी। अनाथ होने के कारण शावक को तीन साल से ज्यादा समय तक बाड़े में रहना पड़ा था। वह मां से शिकार करने के गुर नहीं सीख पाया था। धमोखर रेंज के मिल्ली में उसे छोड़ा गया था, जहां यह अपना राज कायम कर रहा था। उसने खुद को शिकार के काबिल बनाया और अपना सत्ता कायम कर ली। इसी दौरान किसी अन्य बाघ से संघर्ष में उसे गर्दन में गहरा घाव हो गया।




