Friday, May 1, 2026
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अग्नि दुर्घटना पर गर्माई सियासत, कमल नाथ ने की निष्‍पक्ष जांच की मांग, नरोत्‍तम बोले- डिजिटल युग में दस्‍तावेज नष्‍ट करना असंभव

 

भोपाल। सतपुड़ा भवन की आग में राजनीति शुरू हो गई है। कांग्रेस के कई बड़े नेताओं ने इसमें साजिश का आरोप लगाया है। उधर, भाजपा नेताओं ने कहा कि कांग्रेस का यही चरित्र है वह आग की दुर्घटना में भी राजनीति कर रही है। कांग्रेस के प्रदेशाध्‍यक्ष व पूर्व मुख्‍यमंत्री कमल नाथ ने मंगलवार को एक वीडियो संदेश जारी कर इस घटना पर चिंता जताते हुए निष्‍पक्ष जांच की मांग की हैकमल नाथ ने कहा कि सतपुड़ा भवन में आग लगना अत्यंत चिंता का विषय है। प्रश्न यह है कि आग लगी है या आग लगाई गई है? जिस तरह से विधानसभा चुनाव से पहले पूर्व में भी और इस बार भी सतपुड़ा भवन में आग लगी है, वह छोटी बात नहीं है। 12,000 से अधिक फाइल जल जाने के समाचार आ रहे हैं। यह भ्रष्टाचार का मामला है। आग लगने की स्वतंत्र एजेंसी से निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।इस पर प्रदेश के गृह मंत्री नरोत्‍तम मिश्रा कांग्रेस के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि भोपाल के सतपुड़ा भवन में आग लगने के कारणों की जांच के लिए उच्चस्तरीय समिति का गठन किया गया है, जो तीन दिन में अपनी रिपोर्ट देगी। डिजिटल युग में दस्तावेज नष्ट करना संभव नहीं है। थोड़ा समय लगेगा, लेकिन जल्द पूरा बैकअप क्रिएट कर लिया जाएगा।

इससे पूर्व सोमवार शाम सतपुड़ा भवन में आग लगने की घटना के बाद कांग्रेस के पूर्व प्रदेशाध्‍यक्ष अध्यक्ष अरुण यादव ने ट्वीट कर कहा कि प्रियंका गांधी ने घोटाले गिनाए, तो सतपुड़ा भवन में आग लग गई, कई महत्वपूर्ण फाइलें खाक हुईं। कहीं आग के बहाने घोटाले के दस्तावेज जलाने की सजिश तो नहीं। यह आग मध्य प्रदेश में बदलाव के संकेत दे रही है।

कांग्रेस विधायक जीतू पटवारी ने ट्वीट किया कि शिवराज के दफ़्तर की आग बता रही है, भाजपा सरकार मध्य प्रदेश से जा रही है। पूर्व मंत्री और विधायक उमंग सिंघार ने ट्वीट कर कहा कि 15 दिन पूर्व मैंने भोपाल में संपन्न पत्रकारों से बातचीत में कहा था कि सरकारी दफ्तरों में आग लगने का अभियान शुरू होगा और देखिए शुरू हो गया।

उधर, भाजपा के प्रदेश मीडिया प्रभारी डा.आशीष अग्रवाल ने कहा कि गिद्ध रूपी चारित्रिक कांग्रेस, जिसे आग में भी राजनीति नजर आती है। मध्य प्रदेश के संसाधन दुर्घटना से जलने का दुःख नहीं है, अपितु उस पर भी राजनीति कर रही है।

प्रदेश के स्‍वास्‍थ्‍य मंत्री डा प्रभुराम चौधरी ने कहा कि यह घटना दुर्भाग्यपूर्ण है। यह तो बाद में पता चलेगा कि क्या-क्या नुकसान हुआ है। कांग्रेस के आरोप निराधार हैं। कांग्रेसी तो पहले से आग लगने की बात कह चुके हैं।

विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष डा.गोविंद सिंह को पुलिस ने सतपुड़ा भवन में घुसने नहीं दिया

 

घटना के बाद स्थल निरीक्षण के लिए पहुंचे विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष डा.गोविंद सिंह और अन्य विधायकों को पुलिस ने भवन में प्रवेश नहीं करने दिया। इस पर नाराजगी जताते हुए उन्होंने भ्रष्टाचार को छुपाने का आरोप लगाया।

विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष के साथ पीसी शर्मा, सुनील सराफ, फुंदेलाल सिंह मार्को और मेवाराम जावट स्थिति देखने के लिए सतपुड़ा भवन पहुंचे पर उन्हें सुरक्षाकर्मियों ने अंदर नहीं जाने दिया। कुछ देर उनकी सुरक्षाकर्मियों से बहस भी हुई पर जब सुरक्षाकर्मियों ने अंदर जाने की अनुमति देने से साफ माना कर दिया तो वे नाराजगी जताते हुए भवन परिसर से बाहर निकलकर धरने पर बैठ गए।

 

उन्होंने मीडिया से चर्चा में आरोप लगाया कि विधायकों को पुलिसकर्मियों ने धक्का मारकर निकाला गया है। सरकार और उसके प्रतिनिधि अहंकार में हैं। जनता सब देख रही है। यह आग लगी नहीं, लगाई गई है। फाइलें और कंप्यूटर, सब जल गए। नर्सिंग घोटाले, स्वास्थ्य विभाग के टेंडर और छात्रवृत्ति से जुड़े दस्तावेज खाक हो गए।

 

 

 

 

वहीं, प्रदेश कांग्रेस के मीडिया विभाग के अध्यक्ष केके मिश्रा ने पत्रकारवार्ता में आरोप लगाया कि भ्रष्टाचार के जुड़े दस्तावेजों को प्रायोजित तरीके से जलाया गया है। अब तक जितने भी कार्यालयों में आग लगने की घटनाएं हुई हैं, उन पर किसी न किसी घोटाले की आंच है। उन्होंने राज्यपाल मंगुभाई पटेल से इस पूरी घटना के लिए अधिकारियों की जवाबदारी सुनिश्चित करने के साथ न्यायिक जांच कराने की मांग की है।
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