Monday, May 18, 2026
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व्यापार पर लागू हुआ नगर निगम का नया टैक्स, इंदौर में 50 हजार रुपये तक चुकाने होंगे

इंदौर  ।   मध्य प्रदेश के किसी भी शहर-कस्बे में व्यापार करने पर अब नगर निगम को एक और टैक्स चुकाना होगा। नगरीय विकास और आवास विभाग ने मप्र नगरपालिका व्यापार अनुज्ञापन नियम में संशोधन कर नया कर लगा दिया है। सभी नगर पालिक निगम, नगरपालिक परिषद और नगर परिषद व्यापारियों से उनके व्यवसाय स्थल यानी दुकान के क्षेत्रफल के हिसाब से कर वसूलेंगे। नया कर संपत्तिकर, विज्ञापन कर और पहले से लागू अन्य शुल्कों के अतिरिक्त होगा। शुक्रवार को इसका गजट नोटिफिकेशन जारी करने के साथ ही नया कर लागू कर दिया गया है। व्यापारियों ने नए टैक्स का विरोध भी शुरू कर दिया है। गजट नोटिफिकेशन के अनुसार, नगर निगम और परिषद व्यवसाय स्थल के बाहर की सड़क और कालोनी के अनुपात में दुकानदारों से नया टैक्स वसूलेगी। नगर पालिक निगम को सड़क की चौड़ाई के अनुपात में प्रति वर्गफीट 4 से 6 रुपये, नगरपालिक परिषद को 3 से 5 रुपये और नगर परिषद को 2 से 4 रुपये प्रति वर्ग फीट टैक्स सालाना वसूलने के अधिकार दिए गए हैं। हालांकि, नगर निगम के लिए अधिकतम सीमा 50 हजार रुपये, नगर पालिका परिषद के लिए 25 हजार और नगर परिषद के लिए 15 हजार रुपये तक की गई है। और तो और गाड़ियों से व्यापार करने वालों पर भी टैक्स लगा दिया गया है।

व्यापारी संगठनों ने की आंदोलन की घोषणा

शनिवार को नए टैक्स की अधिसूचना जारी होने की खबर फैलते ही व्यापारियों में हड़कंप मच गया। व्यापारियों ने नाराजगी जताते हुए इसे गलत बताया। शाम तक अलग-अलग व्यापारी संगठनों ने इसके खिलाफ संदेश जारी कर दिए। टैक्स के खिलाफ विरोध आंदोलन की घोषणा करते हुए व्यापारी संगठनों ने अपने सदस्य व्यापारियों की बैठक भी बुला ली।

विरोध में एकजुट हुए बाजार

इंदौर में बीते दिनों दुकानों के साइन बोर्ड पर लगे टैक्स का भारी विरोध हुआ था। चुनावी मौसम में अब नया टैक्स फिर से सरकार की नींद उड़ाता दिख रहा है। विपक्षी पार्टी इसे भुनाने में जुट गई है। मप्र उद्योग एवं व्यापार कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष अजय चौरड़िया ने कहा कि सरकार अंग्रेजों की तरह लगान वसूली पर उतर आई है। रविवार से ही पूरे प्रदेश के हर नगर में बाजारों में विरोध होगा। अहिल्या चैंबर आफ कामर्स एंड इंडस्ट्री ने भी नए टैक्स का विरोध कर दिया है। चैंबर के अध्यक्ष रमेश खंडेलवाल ने कहा कि एक व्यापारी कितने टैक्स देगा। जीएसटी, आयकर, प्रोफेशनल टैक्स, मंडी शुल्क और निगम के पांच-छह टैक्स पहले से ही व्यापारी चुका रहे हैं। लग रहा है कि सरकार व्यापार नहीं करने देना चाहती है। चैंबर ने विरोध की रणनीति बनाने के लिए 26 अप्रैल को 100 व्यापारी संगठनों की बैठक बुलाई है।

सरकार ने निर्णय वापस नहीं लिया तो बंद करेंगे व्यापार

इंदौर लोहा व्यापारी एसोसिएशन ने भी नए टैक्स का विरोध किया। एसोसिएशन के मोहम्मद पीठावाला ने कहा कि अब ओर टैक्स नहीं चुकाएंगे। यदि सरकार ने निर्णय वापस नहीं लिया तो व्यापार अनिश्चितकाल के लिए रोकने को भी हम तैयार हैं। व्यापारी मनोज शर्मा ने कहा कि लोहा कारोबारियों के गोडाउन तो दो-दो मंजिला हैं। पहले साल 50 हजार और फिर हर साल पांच प्रतिशत तक बढ़ाकर टैक्स देना होगा। ये मनमानी और अन्याय है।

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