Friday, May 8, 2026
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प्रदेश के आक्रोशित किसानो का भोपाल में डेरा

प्रदेश के आक्रोशित किसानो का भोपाल में डेरा
_ ठंड में ठिठुरते भूखे प्यासे अन्नदाताओं का सरकार के खिलाफ धरना
_राज्य के हर गांव से एकत्र हुए
_ग्रामसभा से विधानसभा तक किसान मार्च
मुख्यमंत्री से ही करना चाहते है चर्चा

डॉ. सन्तोष पाटीदार
की विशेष रिपोर्ट

इंदौर। प्रदेश के हजारों किसान भोपाल में आज मंगलवार को डेरा डाल रहे हैं। केन्द्र और राज्य सरकार द्वारा खेती किसानी के साथ किए जा रहे छल कपट से त्रस्त किसानो को आंदोलन के लिए मजबूर होना पड़ा है।
यह दुर्भाग्य हे कि कड़कड़ाती ठंड में भूखे प्यासे , चटनी रोटी की पोटली बांधे किसान मजदूर भोपाल में शिव सरकार के विरोध में उस समय लामबंद हो रहे हैं जब सरकार , तयशुदा कार्पोरेट घरानों के लिए हमेशा की तरह स्वर्ण रजत पात्रों में 56 भोग पकवानों के साथ चुनावी रेड कारपेट बिछाए हुए है। यह बढ़ती तथाकथित विकास की असमानता आम लोगो को ज्यादा आक्रोशित करती है।
शाइनिंग एमपी , खुशहाल मप्र और चहूं ओर चमकती दमकती पॉलिटिकल इवेंट की हल्ला बोल राजनीति में किसानो के लिए कभी जगह नहीं रही हैं इसीलिए सरकार से गांव किसानो की नाराजगी बढ़ती जा रही है।
प्रदेश की अकूत संपदा,जनता का पैसा ,जमीन , प्राकृतिक संसाधन,खेती की उपजाऊ भूमि को मुठ्ठीभर कार्पोरेट घरानों पर न्योछावर करने के लिए आतुर सरकार पर कटाक्ष करते किसान नेेता सदाशिव पााटीदार कहते हे भ्रष्टाचार का पर्याय बन चुकी यह राजनीति असल में सच से मुंह चुराकर सुखी समृद्ध राज्य का भ्रमजाल बनाए हुए हैं । किसान की जीविका की कीमत पर सत्ता और पूंजीपतियों के गड़जोड़ के मुफीद असंतुलित विकास थोपा जा रहा है।
भ्रमजाल इसलिए कि इन्वेस्टर्स समिट की चकाचौंध और शाईइनिंग मप्र के ठीक विपरित भूखे प्यासे ठंड में ठिठुरते हजारों किसान है जो बीस वर्षो की बीजेपी और अल्पकाल की कांग्रेस सरकार के भ्रष्ट ,गैर जवाबदेह भ्रष्ट सरकारी तंत्र से इतने दुःखी हो चुके हैं कि वे अब सड़को पर उतरने के लिए मजबूर हुए हैं। सदाशिव कहते है (कांग्रेस _भाजपा दोनों) की नजरो में खेती किसानी कर रहे किसान दोयम दर्जे के रहे हैं। कमलनाथ सरकार ने भी खेती की जमीन हथियाने के कानून बनाए।
प्रदेश ,देश दुनिया की अर्थ व्यवस्था चलाते किसान शिव “राज” के सरकारी तंत्र मंत्र की हकीकत उजागर कर रहे हैं।
यह सब कुछ उस समय हो रहा हैं जब मुख्यमंत्री ,उनके गण और सरकारी तंत्र उड़नखटोलॉ और लक्जरी कारो में सवार चाटुकार राजनेता इंदौर में आलीशान शानदार परिसर में समृद्ध/प्रबुद्ध लोगों के साथ व्यंजनों का लुत्फ ले रहे होंगे तो दूसरी ओर खेतों में देर रात 3 बजे तक ठंड से ठिठुरते ठंडे पानी में खड़े होकर सिंचाई करने के बाद किसान सैकडो किलोमीटर दूर जेसे तेसे सुदूर स्थित भोपाल पहुंच रहे हैं,,,, जहां खुले मैदान में चटनी रोटी के साथ भूख शांत कर सरकार को नींद से जगाने की कोशिश करना चाहते हैं। क्या यह जीता जागता उदाहरण , किसी तरह भी तरह ,,किसी भी कीमत पर पुनः सत्ता पाने को लायायित सरकार को आईना दिखाने के लिए पर्याप्त नहीं हैं।
सवाल यह कि सरकार के खिलाफ आखिर किसानो को क्यों मोर्चा खोलना पड़ा ? वजह , विकास के नाम पर वनवासियों और ग्रामीणों की भूमि और उनके प्राकृतिक संसाधनों को सरकार , कार्पोरेट व राजनेताओं द्वारा अधिग्रहण कर हथियाना है। खेती के लिए जरूरी बीज , खाद,दवाई , बिजली ,पानी , फसल के उचित मूल्य ,मंडियों की लूट, अफसरों व स्ताधारी नेताओ की मनमानी आदि से त्रस्त किसान गुस्से में है। इसलिए किसान बिरादरी आंदोलन के लिए मजबूर हुई है या यह कहें कि सरकारें ही किसानो को आंदोलन के लिए मजबूर करती हैं। सरकारें शायद इनके धैर्य की परीक्षा लेती हैं।
शिवराज सरकार के खिलाफ उनकी ही मातृ संस्था आरएसएस के दाएं हाथ कहे जाने वाले भारतीय किसान संघ के नेतृत्व में यह आंदोलन हो रहा हैं।यह बताता है कि सरकारी तंत्र के हालात किस कदर बद से बदतर हैं कि किसानों को इस समय खेती का काम छोड़कर सैकडो किलोमीटर दूर भोपाल जाकर अपना आक्रोश व्यक्त करना पड़ रहा हैं। आंदोलन से सरकार में घबराहट है। यह इससे स्पष्ट है कि किसानो के आक्रोश के समाचार अखबार टीवी आदि पर नहीं आ पा रहे है जब कि आंदोलन की तैयारियां लंबे समय से हो रही हैं।
आरएसएस के वरिष्ठ प्रचारक और किसान संघ के क्षेत्रीय संगठन मंत्री महेश चोधरी के नेतृत्व में प्रदेश के हर गांव नगर के किसानो ने सरकार के खिलाफ मोर्चा लिया है। आंदोलन के लिए बीते छह माह से गांव गांव में बैठके हो रही थी। संघ ने तय किया कि किसानों की प्रमुख नीतिगत समस्यायों और मांगो पर सरकार से दो टूक बात की जायेगी। आंदोलन के लिए भी संघ ने प्रदेश की हर ग्रामसभा से खेती किसानी समस्याओं और मंगों पर किसानो से प्रस्ताव लिए है।इसी तरह आंदोलन के लिए तहसील से लेकर संभाग (संघ का प्रांत)स्तर और फिर प्रदेश स्तर तक बैठके हुई। हर जिले से भोपाल जाने वाले किसानो की संख्या , वाहनों की संख्या आदि जानकारी ली जा रही हैं । संभाग में सबसे ज्यादा किसान खरगोन, खंडवा , धार इंदौर ,देवास , उज्जैन आदि जिलों से पहुंच रहे हैं। संघ के प्रांत अधिकारी लक्ष्मी नारायण पटेल कहते हैं कि किसान अभी बोवनी आदि कार्यों में व्यस्त होने के बाद भी आंदोलन और धरना देने भोपाल जाकर सरकार को नींद से जगाएंगे। पूरे प्रदेश से हजारों किसान आंदोलन से जुड़ रहे है। संघ के इंदौर महानगर अध्य्क्ष दिलीप मुकाती कहते हैं आंदोलन के लिए इंदौर जिले में 8 दिनों से जनजागरण और बैठके हो रही हैं । एक वाहन को किसान यात्रा रथ बनाया हे जो गांव गांव जाकर जानकारी प्रचारित कर रहा हे। आपने बताया कि जो किसान भोपाल नहीं पहुंच पा रहे है उन्होंने अपना पूरा समर्थन आंदोलन को दिया हैं।
संघ के नेता कहते हैं कि सरकार और सत्ता की मदहोशी में डूबे हुए कांग्रेस बीजेपी दोनों के विधायक , सांसद और मंत्री इन सब ने किसानो के वोट से जीत तो पाई लेकिन जीत के बाद किसानो के बजाए कार्पोरेट कंपनियों , इन्वेस्टर्स और भ्रष्टाचारियों का दामन थाम लिया है।
नतीजतन आंदोलन की राह पकड़नी पड़ी।
आंदोलन के बारे में श्री चौधरी ने बताया कि विधानसभा में खेती किसानी से जुड़े विषयो पर चर्चा के लिए सात दिनों का विशेष सत्र बुलाया जाए। खेती की भूमि का अधिग्रहण बंद हो , विकास प्राधिकरण भी बंद किए जाए , कांग्रेस सरकार का लैंड पूलिंग कानून खत्म किया जाए आदि मांगो के साथ कुछ और जरूरी।मांगे भी है। इनमे बिजली विभाग से जुड़े खेती किसानी के मसले हे। एक अन्य विषय सहकारिता क्षेत्र का है जिसमे सोसायटी और बैंकिंग संबंधी मांग है।इसी तरह भूमि से जुड़े विषय हे। इनमे राज्य की कुल भूमि फिर इसमें सिंचित ,असिंचित ,बंजर भूमि ,खेती से होने वाली सरकारी आय और खर्च, खेती से रोजगार की स्थिति शामिल हे। इसके साथ प्रदेश में उपलब्ध जल संसाधन और उनका उपयोग भी बड़ा विषय हैं जिस पर सरकार को स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।कृषि विभाग से परेशान किसानो को बताया जाए कि प्रदेश में कुल कितना वास्तविक कृषि उत्पादन है। कुल कितनी इसकी खपत है। साथ ही जैविक खेती की स्थिति , उद्यानिकी और खाद्य प्रसंस्करण उद्योग ग्रामीण हाट बाजार आदि के बारे में सरकार स्थिति साफ करे।
इंदौर महानगर अध्यक्ष मुकाती कहते है सभी सरकारों के किए धरे से पशु पालनऔर प्राकृतिक संसाधन लगातार कम हो रहे हैं इसलिए पशु पालन , उनके आवास ,जंगली पशुओं ,वन क्षेत्र , वनोपज और अनवासियो की आर्थिक स्थिति पर सरकार क्या कर रही हे ओर इन विषयो पर क्या निर्णायक कदम उठाएगी यह बताए। इसके लिए कानूनी बदलाव करना हो तो सारे विधायक मिलकर वह भी करे।

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